पश्चिम बंगाल में मतदान पर सियासी संग्राम तेज, टीएमसी ने लगाए हेराफेरी के आरोप
कोलकाता, 1 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में मतदान प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने वोट में हेराफेरी के गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि विपक्ष ने इन दावों को खारिज करते हुए राज्य में लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। इस बीच, चुनाव आयोग के फैसलों और व्यवस्थाओं को लेकर भी विवाद गहराता जा रहा है।
टीएमसी नेता कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। उन्होंने कहा, "मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं और वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटका रहे हैं।"
घोष ने कोलकाता के खुदीराम अनुशीलन केंद्र में स्थित एक स्ट्रॉन्ग रूम का जिक्र करते हुए दावा किया कि वहां संदिग्ध गतिविधियां देखी गईं। उनके अनुसार, मीडिया को मिले सीसीटीवी फुटेज में कुछ लोग बैलेट के साथ काम करते नजर आए, जबकि वहां उम्मीदवारों या उनके एजेंटों की मौजूदगी नहीं थी, जो कई सवाल खड़े करता है।
उन्होंने यह भी मांग की कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मीडिया को भी सीसीटीवी कैमरों तक सीधी पहुंच दी जानी चाहिए। घोष ने कहा, "केवल राजनीतिक दलों या उम्मीदवारों को ही नहीं, बल्कि चुनाव आयोग से मान्यता प्राप्त मीडिया संस्थानों को भी स्ट्रॉन्ग रूम की निगरानी प्रणाली देखने का अधिकार मिलना चाहिए। इससे किसी भी तरह के संदेह को दूर करने में मदद मिलेगी और जनता का भरोसा मजबूत होगा।"
चुनाव आयोग द्वारा कुछ बूथों पर पुनर्मतदान कराने के फैसले पर भी टीएमसी ने आपत्ति जताई है। कुणाल घोष ने कहा, "मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ था और जबरन पुनर्मतदान की मांग करना उचित नहीं है। जिन बूथों पर दोबारा मतदान होगा, वहां भी टीएमसी भारी बहुमत से जीत दर्ज करेगी।"
वहीं, विपक्षी दलों ने टीएमसी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए राज्य सरकार पर ही लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया है। सीपीआई(एम) नेता वृंदा करात ने कहा, "पश्चिम बंगाल में लोकतांत्रिक स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। टीएमसी के शासनकाल में चुनावी प्रक्रियाओं की निष्पक्षता पर लगातार सवाल उठते रहे हैं और विपक्षी दलों को स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का मौका भी कई बार नहीं मिला।"
वृंदा करात ने यह भी कहा कि पंचायत चुनावों सहित कई मौकों पर विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन तक दाखिल करने से रोका गया। उनके अनुसार, यह स्थिति लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है, और इससे चुनावी प्रणाली की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
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Created On :   1 May 2026 7:06 PM IST












