प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन का सीधा असर सेहत पर, जीवनशैली बदलने की जरूरत संतोष गंगवार

प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन का सीधा असर सेहत पर, जीवनशैली बदलने की जरूरत  संतोष गंगवार
झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने रविवार को कहा कि पर्यावरण, स्वास्थ्य और हमारी जीवनशैली एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं। जलवायु परिवर्तन, बढ़ते वायु प्रदूषण और जैव विविधता के सामने खड़ी चुनौतियों के बीच प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर चलना पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है। राज्यपाल आईआईटी (आईएसएम), धनबाद में आरोग्य भारती और आईआईटी-आईएसएम के सहयोग से आयोजित ‘राष्ट्रीय पर्यावरण कार्यशाला’ को संबोधित कर रहे थे।

धनबाद, 20 सितंबर (आईएएनएस)। झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने रविवार को कहा कि पर्यावरण, स्वास्थ्य और हमारी जीवनशैली एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं। जलवायु परिवर्तन, बढ़ते वायु प्रदूषण और जैव विविधता के सामने खड़ी चुनौतियों के बीच प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर चलना पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है। राज्यपाल आईआईटी (आईएसएम), धनबाद में आरोग्य भारती और आईआईटी-आईएसएम के सहयोग से आयोजित ‘राष्ट्रीय पर्यावरण कार्यशाला’ को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि प्रकृति का सम्मान भारतीय जीवन-पद्धति का हिस्सा रहा है। आज पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं का असर सीधे लोगों के स्वास्थ्य और जीवन पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं है। इसमें समाज, शैक्षणिक संस्थानों, वैज्ञानिकों, डॉक्टरों, उद्योगों और आम लोगों की भागीदारी जरूरी है। पानी और बिजली की बचत, कचरे का सही प्रबंधन और रोजमर्रा के जीवन में प्रकृति के प्रति जिम्मेदार व्यवहार जैसे छोटे कदम भी बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

राज्यपाल ने स्वस्थ जीवनशैली को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए योग की उपयोगिता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि योग शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक संतुलन और बेहतर जीवनशैली में मदद करता है। स्वास्थ्य व्यवस्था में केवल बीमारी का इलाज ही नहीं, बल्कि बीमारियों से बचाव, संतुलित खान-पान, योग और स्वच्छ पर्यावरण पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अलग-अलग चिकित्सा पद्धतियों और स्वास्थ्य से जुड़े दृष्टिकोणों को साथ लाकर लोगों के समग्र स्वास्थ्य के लिए बेहतर प्रयास किए जा सकते हैं।

इस दिशा में आरोग्य भारती की गतिविधियों को उन्होंने महत्वपूर्ण बताया। राज्यपाल ने आईआईटी (आईएसएम) जैसे तकनीकी संस्थानों की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि विज्ञान और तकनीक के जरिए जल संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा, कचरा प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण अनुकूल तकनीकों के क्षेत्र में व्यावहारिक समाधान विकसित किए जा सकते हैं। उन्होंने युवाओं और विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण को रोजमर्रा की आदतों में शामिल करने और परिवार तथा समाज के दूसरे लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करने की अपील की।

--आईएएनएस

एसएनसी/पीएम

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Created On :   20 Sept 2026 4:40 PM IST

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