प्रदूषण से कराही गंगोत्री, मां गंगा के उद्गम पर एक दिन में निकले 100 बोरे वस्त्र
उत्तरकाशी, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। देशभर से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ इन दिनों गंगोत्री धाम पहुंच रही है, लेकिन आस्था के इस पवित्र केंद्र से एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। मां गंगा के उद्गम स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान के बाद वस्त्र, पूजा सामग्री, शृंगार सामग्री, साड़ियां, धोती, कंघी, शीशा और पुराने कपड़े गंगा की धारा में प्रवाहित कर रहे हैं। इससे गंगोत्री क्षेत्र में प्रदूषण की समस्या गंभीर रूप लेती जा रही है।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए गंगा विचार मंच के नेतृत्व में गुरुवार को गंगोत्री में एक वृहद स्वच्छता अभियान चलाया गया। अभियान में नगर पंचायत गंगोत्री, वन विभाग, गंगोत्री नेशनल पार्क के अधिकारी-कर्मचारी, साधु-संत और स्थानीय लोग शामिल हुए। संयुक्त अभियान के दौरान गंगा में प्रवाहित किए गए वस्त्रों और कचरे के लगभग 100 बोरे एकत्रित किए गए। यह आंकड़ा अपने आप में बताता है कि समस्या कितनी बड़ी हो चुकी है।
स्वच्छता अभियान के दौरान घाटों, किनारों और जलधारा में फंसे कपड़ों, पूजा सामग्री और अन्य कचरे को निकालने में घंटों मेहनत करनी पड़ी। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर सीजन में यही स्थिति बनती है, लेकिन भीड़ बढ़ने के साथ समस्या और विकराल होती जा रही है। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं हुआ तो गंगोत्री क्षेत्र की स्वच्छता, पर्यावरण और धार्मिक गरिमा पर गंभीर असर पड़ सकता है।
गंगा विचार मंच पिछले 12 वर्षों से लगातार इस विषय पर जनजागरण अभियान चला रहा है। मंच के कार्यकर्ता हर वर्ष तीर्थयात्रियों से अपील करते हैं कि मां गंगा में किसी भी प्रकार के वस्त्र, पूजा सामग्री या शृंगार सामग्री प्रवाहित न करें। मंच का कहना है कि गंगा को स्वच्छ रखना ही सबसे बड़ा पूजन है।
मंच के प्रदेश संयोजक लोकेंद्र सिंह बिष्ट ने कहा कि श्रद्धालु अगर मां गंगा को वस्त्र या अन्य सामग्री अर्पित करना चाहते हैं तो उसे गंगोत्री मंदिर में चढ़ाएं या जरूरतमंद लोगों को दान करें। गंगा की धारा में कपड़े और सामग्री बहाने से केवल प्रदूषण फैलता है। उन्होंने कहा कि मां गंगा इससे प्रसन्न नहीं होतीं, बल्कि उनकी निर्मलता को नुकसान पहुंचता है।
उन्होंने कहा कि समाज को अब धार्मिक परंपराओं के सही स्वरूप को समझने की जरूरत है। श्रद्धा का अर्थ प्रकृति को नुकसान पहुंचाना नहीं हो सकता। अगर लोग जरूरतमंदों को वस्त्र दान करें, मंदिर में चढ़ावा दें या सेवा कार्य करें तो वही सच्चा पुण्य होगा।
गंगा विचार मंच ने गंगोत्री मंदिर समिति से भी अपील की है कि मंदिर परिसर और घाटों पर लगातार घोषणाएं कर श्रद्धालुओं को जागरूक किया जाए। समिति से आग्रह किया गया है कि श्रद्धालुओं को समझाया जाए कि गंगा में वस्त्र और अन्य सामग्री न डालें, बल्कि मंदिर में ही भेंट करें।
पिछले वर्ष और इस वर्ष गंगोत्री में कई स्थानों पर बैनर, वाल पेंटिंग और जनजागरण संदेश लगाए गए हैं। इनमें स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि मां गंगा के प्रवाह में किसी भी प्रकार की सामग्री न डालें। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब तक प्रशासनिक सख्ती और व्यापक जनजागरूकता साथ-साथ नहीं चलेगी, तब तक स्थिति में सुधार कठिन है।
इस विषय को नमामि गंगे, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन, जल शक्ति मंत्रालय तथा प्रधानमंत्री कार्यालय तक भी पहुंचाया गया है। मंच ने उम्मीद जताई है कि भविष्य में इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाएगा ताकि देशभर में लोगों को जागरूक किया जा सके।
आज के स्वच्छता अभियान में नगर पंचायत गंगोत्री के अधिशासी अधिकारी जयानंद सेमवाल, रेंजर प्रदीप बिष्ट, राजबीर रावत, ब्रिज रमोला, दीपक सिंह, खेमराज राणा, महादेव प्रसाद, गोविंद सिंह, विक्रम सिंह, वीरबल राजवार, सतबीर, जयबीर, कुश राणा, श्रीदेव रावत, रेंजर जसवंत चौहान, स्वामी बृजनंद सहित अनेक लोगों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
गंगोत्री की यह तस्वीर पूरे देश के लिए संदेश है कि आस्था और स्वच्छता को साथ लेकर चलना होगा। गंगा करोड़ों लोगों की आस्था ही नहीं, जीवनरेखा भी है। यदि उद्गम स्थल ही प्रदूषित होगा तो नीचे बहने वाली धारा को निर्मल रखने के सारे प्रयास अधूरे रह जाएंगे। अब समय आ गया है कि श्रद्धालु गंगा को भेंट स्वरूप कचरा नहीं, बल्कि स्वच्छता का संकल्प दें।
उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि भविष्य में ईटीपी प्लांट लगाने की प्लानिंग चल रही है, जिससे परंपरा के अनुसार श्रद्धालु जो वस्त्रों का दान करते हैं, वो भी मेंटेन रहें और साथ ही साड़ी या शृंगार के सामानों को एसएजी के माध्यम से रिप्रॉसेस किया जा सके।
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Created On :   24 April 2026 10:57 PM IST












