प्रयागराज में वर्षों से महात्मा गांधी की यादों को सहेज रहे अनिल गुप्ता, जयंती पर लगाई अनोखी प्रदर्शनी

प्रयागराज में वर्षों से महात्मा गांधी की यादों को सहेज रहे अनिल गुप्ता, जयंती पर लगाई अनोखी प्रदर्शनी
महात्मा गांधी की 157वीं जयंती के अवसर पर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के निवासी अनिल गुप्ता सुर्खियों में आए हैं। गांधी जयंती पर अनिल गुप्ता ने महात्मा गांधी की याद में एक खास प्रदर्शनी लगाई है, जिसमें दशकों से सजों कर रखी गई स्मृतियों को दर्शाया गया है।

प्रयागराज, 2 अक्टूबर (आईएएनएस)। महात्मा गांधी की 157वीं जयंती के अवसर पर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के निवासी अनिल गुप्ता सुर्खियों में आए हैं। गांधी जयंती पर अनिल गुप्ता ने महात्मा गांधी की याद में एक खास प्रदर्शनी लगाई है, जिसमें दशकों से सजों कर रखी गई स्मृतियों को दर्शाया गया है।

अनिल गुप्ता की ओर से लगाई गई इस अनोखी प्रदर्शनी को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। अनिल गुप्ता पिछले कई वर्षों से महात्मा गांधी से जुड़ी स्मृतियों को बड़े जतन से सहेज रहे हैं। उनके इस अनूठे संग्रह में महात्मा गांधी से जुड़े दुर्लभ पोस्टकार्ड और नोट सिक्के, डाक टिकट व अन्य कई ऐतिहासिक चीजें शामिल हैं।

महात्मा गांधी के प्रति उनके इस गहरे लगाव और समर्पण को देखकर स्थानीय लोग अब उन्हें 'गांधी जी का अनोखा प्रेमी' कहने लगे हैं। महात्मा गांधी के विचारों और उनकी स्मृतियों को दुनिया भर में पहुंचाने के लिए अनिल गुप्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिल चुकी है।

अनिल गुप्ता ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "मेरा टिकट संग्रह का शौक शुरुआत से रहा है। समाज में एक-दूसरे से संपर्क रहे और मैंने चीजों को सहेजकर रखना शुरू किया। हम लोग डाक टिकट मंगाते रहे और उन्हें इकट्ठा करते रहे। मेरे पास अभी महात्मा गांधी से जुड़े हुए 400 से अधिक टिकट और उनके बचपन से लेकर स्कूल तक की चीजों को इकट्ठा किया।"

अनिल गुप्ता ने कहा, "उनके पास जो अनोखी चीज है, वह 1948 में जारी महात्मा गांधी की डाक टिकट है। बैंक नोट और सिक्के भी मौजूद हैं। ईरान, ग्रेट ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों की ओर से जारी कवर भी इकट्ठा किए गए। जब इन चीजों की प्रदर्शनी लगाई, तो लोगों को यह पसंद आई। इसको लेकर लोगों का काफी समर्थन भी मिला है।"

उन्होंने कहा कि मैंने बचपन से ही महात्मा गांधी के बारे में पढ़ा। स्कूलों में भी बताया जाता था कि कैसे अहिंसा से भी क्रांति होती है और क्यों अहिंसा जरूरी है।

प्रदर्शनी में पहुंची कोमल ने आईएएनएस से कहा कि यहां बहुत सारी चीजें रखी हैं और बहुत कुछ सीखने को मिला है। मैंने महात्मा गांधी के बारे में स्कूल के समय पढ़ा था, लेकिन उसके बाद चीजें छूट गईं। अभी यहां चीजों को देखकर काफी अच्छा भी लग रहा है।

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Created On :   2 Oct 2026 10:04 AM IST

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