क्वांटम कंप्यूटिंग के लिए विकसित किया जाएगा 20 मिलीकेल्विन डायल्यूशन रेफ्रिजरेटर

क्वांटम कंप्यूटिंग के लिए विकसित किया जाएगा 20 मिलीकेल्विन डायल्यूशन रेफ्रिजरेटर
क्वांटम तकनीक के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में डीआरडीओ ने एक बड़ा कदम उठाया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ ने 20 मिलीकेल्विन डायल्यूशन रेफ्रिजरेटर के स्वदेशी विकास के लिए समझौता किया है।

नई दिल्ली, 24 सितंबर (आईएएनएस)। क्वांटम तकनीक के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में डीआरडीओ ने एक बड़ा कदम उठाया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ ने 20 मिलीकेल्विन डायल्यूशन रेफ्रिजरेटर के स्वदेशी विकास के लिए समझौता किया है।

इस परियोजना का लक्ष्य देश में ऐसी क्रायोजेनिक प्रणाली विकसित करना है, जो तापमान को बेहद निचले स्तर यानी 20 मिलीकेल्विन तक ले जा सके। इसका इस्तेमाल क्वांटम कंप्यूटिंग और उससे जुड़ी अत्याधुनिक तकनीकों में किया जाएगा।

टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड योजना के तहत यह समझौता राजस्थान के अलवर स्थित स्टार्टअप जीरो एमके इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ किया गया है। यह समझौता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह डीआरडीओ और किसी स्टार्टअप के बीच टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड के तहत हुआ पहला हाई-वैल्यू डीप-टेक परियोजना का समझौता है।

यह उस 500 करोड़ रुपए के कोष के तहत पहला हाई-वैल्यू समझौता है, जिसे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीप-टेक और अत्याधुनिक तकनीकी परियोजनाओं के लिए मंजूरी दी थी।

समझौते पर नई दिल्ली में टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड के निदेशक और जीरो एमके इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि ने हस्ताक्षर किए।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, डायल्यूशन रेफ्रिजरेटर विशेष क्रायोजेनिक प्रणालियां हैं। इनका इस्तेमाल अत्यंत कम तापमान पैदा करने के लिए किया जाता है। क्वांटम कंप्यूटिंग के कई प्लेटफॉर्म और संबंधित क्वांटम तकनीकें ऐसे ही बेहद कम तापमान वाले वातावरण में काम करती हैं। इसलिए क्वांटम कंप्यूटरों के विकास और परीक्षण के लिए इन प्रणालियों की अहम भूमिका है।

फिलहाल, इस तरह के अत्याधुनिक क्रायोजेनिक उपकरणों के लिए भारत को काफी हद तक विदेशी तकनीक और आयात पर निर्भर रहना पड़ता है। 20 मिलीकेल्विन श्रेणी के डायल्यूशन रेफ्रिजरेटर का स्वदेशी विकास इस निर्भरता को कम करने में मदद कर सकता है। साथ ही देश में क्वांटम तकनीक से जुड़े अनुसंधान, विकास और औद्योगिक क्षमताओं को बढ़ावा मिलेगा।

यह परियोजना राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के लक्ष्यों के अनुरूप भी है। इसके जरिए क्वांटम तकनीक के साथ-साथ उन्नत क्रायोजेनिक्स और रणनीतिक तकनीकों के क्षेत्र में घरेलू क्षमता विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस महत्वपूर्ण परियोजना से जुड़े डीआरडीओ, उद्योग और सभी हितधारकों को बधाई दी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि डीआरडीओ और उद्योग के बीच यह साझेदारी उभरती तकनीकों के क्षेत्र में भविष्य की ऐसी परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण मिसाल कायम करेगी।

रक्षा सचिव, रक्षा विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने भी परियोजना से जुड़ी टीमों को शुभकामनाएं दीं और परियोजना के उद्देश्यों को सफलतापूर्वक हासिल करने की कामना की।

इस अवसर पर माइक्रो इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज एंड कम्प्यूटेशनल सिस्टम एंड साइबर सिक्योरिटी के महानिदेशक, टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट के महानिदेशक, सॉलिड स्टेट फिजिक्स लेबोरेटरी के निदेशक और अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

परियोजना की निगरानी, मार्गदर्शन और तकनीकी सहायता सॉलिड स्टेट फिजिक्स लेबोरेटरी के निदेशक और उनकी टीम द्वारा की जा रही है। इस परियोजना की खास बात यह है कि इसमें डीआरडीओ की विशेषज्ञता और स्टार्टअप की तकनीकी क्षमता को एक साथ लाया गया है। ऐसे सहयोग से क्वांटम जैसी उभरती तकनीकों में भारत के लिए जरूरी अत्याधुनिक उपकरणों का स्वदेशी विकास तेज होने की उम्मीद है।

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Created On :   24 Sept 2026 9:03 PM IST

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