विपक्षी नेताओं ने कहा- राहुल गांधी की चुनौती को स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री को जवाब देना चाहिए

विपक्षी नेताओं ने कहा- राहुल गांधी की चुनौती को स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री को जवाब देना चाहिए
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने वीडियो जारी करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से डिबेट करने की मांग की है। इस पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि डिबेट करने की जगह संसद है। इस बयान पर कांग्रेस समेत विपक्ष के नेताओं ने प्रतिक्रिया दी है।

नई दिल्ली, 4 नवंबर (आईएएनएस)। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने वीडियो जारी करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से डिबेट करने की मांग की है। इस पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि डिबेट करने की जगह संसद है। इस बयान पर कांग्रेस समेत विपक्ष के नेताओं ने प्रतिक्रिया दी है।

झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) नेता मनोज पांडे ने कहा, "राहुल गांधी संसद में मौजूद रहते हैं। वहीं, संसद सत्र में गृह मंत्री और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गैरमौजूदगी रही है। अब प्रधानमंत्री बहस में हिस्सा लेने से क्यों कतरा रहे हैं? बहस में कुछ सवालों के जवाब देना और सवाल पूछना तो होता ही है। पहले तो बहस होती थी और जवाब दिए जाते थे। प्रधानमंत्री को बहस की चुनौती को स्वीकार करना चाहिए, जिससे देश की जनता को पता चले कि सवालों का कैसे जवाब दिया जाता है।"

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी कहा कि प्रधानमंत्री को राहुल गांधी से बहस की चुनौती स्वीकार करनी चाहिए।

हैदराबाद में कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. रियाज ने कहा, "प्रधानमंत्री और गृह मंत्री अमित शाह कई महत्वपूर्ण बहसों के दौरान संसद के सत्रों से गैरहाजिर रहे हैं। इसी वजह से विपक्ष को ये मुद्दे सीधे जनता के सामने उठाने पड़ रहे हैं। कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी, सरकार द्वारा तय किए गए किसी भी मंच, जगह और समय पर प्रधानमंत्री के साथ बहस करने के लिए तैयार हैं।"

रियाज ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) और कांग्रेस पार्टी का गठबंधन पूरी तरह स्थिर और एकजुट है, भले ही उनकी साझेदारी को कमजोर करने की बाहरी कोशिशें की जा रही हों। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए केंद्र सरकार से जरूरी फंड जुटाने की लगातार कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र के इस असहयोग के कारण विकास कार्यों और सुचारू शासन में बाधा आ रही है। कांग्रेस शांति, पर्यटन और समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध है। केंद्र सरकार के असहयोग के बावजूद उमर अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर के लोगों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने के लिए भी संकल्पित हैं।

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