राम मंदिर चढ़ावा विवाद अयोध्या का संत समाज चंपत राय के समर्थन में उतरा, कहा- 'इस्तीफा स्वीकार न करे ट्रस्ट'

राम मंदिर चढ़ावा विवाद  अयोध्या का संत समाज चंपत राय के समर्थन में उतरा, कहा- इस्तीफा स्वीकार न करे ट्रस्ट
अयोध्या के संत समाज ने राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा देने वाले चंपत राय का समर्थन करते हुए कहा है कि उनकी कोई गलती नहीं है और उनकी ईमानदारी पर कोई दाग नहीं है। संतों ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से अपील की है कि वे उनका इस्तीफा स्वीकार न करे।

अयोध्या, 4 जुलाई (आईएएनएस)। अयोध्या के संत समाज ने राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा देने वाले चंपत राय का समर्थन करते हुए कहा है कि उनकी कोई गलती नहीं है और उनकी ईमानदारी पर कोई दाग नहीं है। संतों ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से अपील की है कि वे उनका इस्तीफा स्वीकार न करे।

साकेत भवन के प्रमुख महंत सीताराम दास जी महाराज ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा, "संतों ने श्रीराम मंदिर चढ़ावा मामले में उन्हें निर्दोष बताते हुए जो कहा है, वह बहुत सराहनीय है। हमारे सम्मानित चंपत राय जी पूरी तरह बेदाग और निष्कलंक हैं। इन कामों में से किसी में भी उनकी कोई भूमिका नहीं है। चंपत राय ने खुद एसआईटी गठन की मांग की थी। अगर इनकी भक्ति और निष्‍ठा पर कोई सवाल खड़ा करेगा तो संत समाज मुखर हो जाएगा। संत समाज चंपत राय का इस्‍तीफा स्‍वीकार नहीं करता है।"

उन्‍होंने विपक्षी दलों पर हमला बोलते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी नमाजवादी पार्टी है और कांग्रेसी राम विरोधी रहे हैं। श्रीराम के अस्तित्‍व पर सवाल उठाने वाले लोग आज एकजुट होकर षड्यंत्र कर रहे हैं। संत समाज सनातन पर किसी प्रकार का कुठाराघात सहन नहीं करेगा।

आर्य संत वरुण दास महाराज कहते हैं, "संतों ने चंपत जी के समर्पण और कर्तव्य-बोध को देखते हुए उनके समर्थन में अपना बयान जारी किया है। उन्होंने एक संयुक्त प्रस्ताव के जरिए अपनी सामूहिक राय दी है, क्योंकि राम जन्मभूमि के प्रति उनकी निष्ठा पर कोई सवाल नहीं उठा सकता। जहां तक वहां हुई हेराफेरी और लूट की बात है, मुख्यमंत्री ने इसके लिए एक कमेटी बनाई थी, जिसकी मांग खुद ट्रस्ट ने की थी। जांच चल रही है, रिपोर्ट आने के बाद सच बिल्कुल साफ हो जाएगा।"

उन्‍होंने कहा कि चंपत राय के इस्‍तीफे को स्‍वीकार करना ट्रस्‍ट का विषय है। इस्‍तीफा इतनी जल्‍दी हो भी नहीं जाता है। एक माह पहले कहा जाता है कि हम इस्‍तीफा देना चाहते हैं। श्रीराम के मंदिर को बदनाम करने की साजिश हो रही है। किसी भी तरह के षड्यंत्र को हिंदू जनमानस सफल नहीं होने देगा। राम मंदिर की प्रतिष्‍ठा सदैव बनी रहेगी।

वहीं, इन सबके विपरीत रामदल ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित कल्कि राम कहते हैं कि जब सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर निर्माण के पक्ष में फैसला सुनाया, तो हमारे देश के प्रधानमंत्री मोदी ने एक ट्रस्ट बनाया, जिसका नाम श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट रखा गया। ट्रस्ट को मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई। प्रधानमंत्री के नेतृत्व और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में एक दिव्य और भव्य मंदिर का निर्माण हुआ है।

उन्‍होंने कहा कि ट्रस्ट मंदिर के लिए ही बनाया गया था। मंदिर बन गया, और अब जो विवाद सामने आया है, उसने पूरी जनता को परेशान कर दिया है। न्याय जरूर होगा, क्योंकि किसी मुद्दे को सिर्फ एक व्यक्ति की समझ से नहीं समझा जा सकता। इसलिए, ट्रस्ट को भंग कर दिया जाना चाहिए और ट्रस्ट का नया स्वरूप गठित किया जाना चाहिए।

कल्कि राम ने कहा कि मंदिर संचालन के लिए वर्तमान ट्रस्‍ट सक्षम नहीं है। लिहाजा, ट्रस्‍ट का नए सिरे से गठन किया जाए और इसमें उन लोगों को शामिल किया जाए,जो मंदिर आंदोलन में रहे हैं।

उन्‍होंने संत समाज के चंपत राय के इस्‍तीफे को स्‍वीकार न करने की अपील पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्‍होंने कहा कि अभी जांच चल रही है। सीएम ने जांच का दायरा बढ़ाने की बात कही है। संत समाज कौन होता है किसी को निर्दोष बताने वाला, हम किसी को क्‍लीन चिट देने का अधिकार नहीं रखते हैं।

ग्रेटर नोएडा में बिसरख रावण मंदिर के महंत रामदास ने राम मंदिर चढ़ावे में गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच की मांग की और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

महंत रामदास ने आईएएनएस से कहा कि संत समाज में भारी दुख है क्‍योंकि सबने चढ़ावा दिया था। राम मंदिर के लिए पर्ची कटने से ही चोरी हो रही है। केंद्र सरकार को मामले में दोषियों को कड़ी सजा देनी चाहिए और इनकी संपत्तियों को राम मंदिर को दान कर देना चाहिए।

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Created On :   4 July 2026 9:35 PM IST

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