राम मंदिर चढ़ावा विवाद यूथ कांग्रेस ने की ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष को निलंबित करने की मांग, जवाबदेही पर उठाए सवाल

राम मंदिर चढ़ावा विवाद यूथ कांग्रेस ने की ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष को निलंबित करने की मांग, जवाबदेही पर उठाए सवाल
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले में यूथ कांग्रेस नेता शरद शुक्ला ने कहा कि ट्रस्‍ट के हर व्‍यक्ति की जिम्‍मेदारी थी, क्‍योंकि ये किसी मोहल्‍ले की दुर्गा पूजा समिति जैसा ट्रस्‍ट नहीं है। उन्‍होंने ट्रस्‍ट के कोषाध्‍यक्ष को सस्‍पेंड करने की मांग की है।

अयोध्या, 5 जुलाई (आईएएनएस)। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले में यूथ कांग्रेस नेता शरद शुक्ला ने कहा कि ट्रस्‍ट के हर व्‍यक्ति की जिम्‍मेदारी थी, क्‍योंकि ये किसी मोहल्‍ले की दुर्गा पूजा समिति जैसा ट्रस्‍ट नहीं है। उन्‍होंने ट्रस्‍ट के कोषाध्‍यक्ष को सस्‍पेंड करने की मांग की है।

यूथ कांग्रेस नेता शरद शुक्ला ने राम मंदिर चंदे में हुई गड़बड़ियों पर आईएएएनएस से तीखी प्रतिक्रिया दी। शरद शुक्‍ला ने कहा कि यह ट्रस्‍ट मोहल्‍ले के दुर्गा पुजा समिति नहीं है और न ही यह गांव के चौराहे के राम लीला कमेटी जैसी है। यह इस देश की आस्‍था का केंद्र प्रभु श्रीराम जी की जन्‍मस्‍थली पर निर्मित रामजन्‍म भूमि का ट्रस्‍ट है। इस ट्रस्‍ट में रहने वाले हर व्‍यक्ति को जिम्‍मेदारी लेनी पड़ेगी।

उन्‍होंने कहा कि ट्रस्‍ट के कोष का धन और रामजी का खजाना लुटता रहा। ट्रस्‍ट के कोषाध्‍यक्ष को इसकी भनक तक नहीं लगी। बाद में बयानबाजी करना कि मैं इसका कोई लाभ नहीं लेता था, यह कहना अपनी जिम्‍मेदारी से भागना होगा। मैं यह कहता हूं कि आगामी बैठक शुरू होने पर ट्रस्‍ट के लोगों 2 तिहाई प्रस्‍ताव के साथ गोविंद देवगिरी को सस्‍पेंड करें। अगर आप (गोविंद देवगिरी) जिम्‍मेदारी नहीं निभा पाने में सक्षम थे तो इस तरह के महत्‍वपूर्ण पद को क्‍यों लिया।

कांग्रेस नेता ने कहा कि जब चढ़ावे की धनराशि चोरी हुई है तो ट्रस्‍ट का हर अधिकारी यही बात दोहराएगा। अगर चंपत राय और गोपाल राव यही कहें तो क्‍या वो बख्‍श दिए जाएंगे। खासकर कोषाध्‍यक्ष की जिम्‍मेदारी जरूर तय होनी चाहिए। मैं समझता हूं कि गोविंद देवगिरी के सस्‍पेंड होने के बाद चोरी के मामले में पहला न्‍याय होगा।

वहीं, कांग्रेस नेता दानिश अली ने कहा, " भाजपा और संघ ने राम के नाम का इस्तेमाल सिर्फ सत्ता हासिल करने के लिए किया है और अब इन भ्रष्ट चोरों का शासन डगमगा रहा है।"

उन्‍होंने कहा कि कमाल तो तब होता है जब खबरें आती हैं कि किसी ने रामचरित मानस सोने में जड़ा कर दिया और वह भी चोरी हो गया। किसी भी धर्म का ग्रंथ ईमानदारी, अमानत में खयानत से बचना सिखाता है। चढ़ावा चोरों ने उस ग्रंथ के पाठ को नहीं पढ़ा, इनकी नजर सिर्फ उस सोने पर थी।

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Created On :   5 July 2026 9:50 PM IST

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