संविधान की अनदेखी होगी तो विपक्ष सड़कों पर उतरेगा सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी

नई दिल्ली, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने कहा कि देश की जनता इस वक्त बेचैनी के दौर से गुजर रही है। उन्होंने विपक्ष के सड़कों पर उतरने को सही करार देते हुए कहा कि संविधान ने उन्हें इसलिए जगह दी है कि जब सत्तारूढ़ दल अहंकार में संविधान की अनदेखी करे तो उसे टोका जा सके। नदवी ने वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और एसआईआर के मुद्दों पर सरकार को घेरा और कहा कि बच्चों ने देश को विजन ऑफ इंडिया का क्लियर संदेश दिया।
सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने कहा, "संविधान ने विपक्ष को इसीलिए स्कोप दिया है कि जब-जब सत्तारूढ़ पार्टी अहंकार में डूबे, संविधान की अनदेखी करने लगे और उसके कदम हक से हट जाएं तो विपक्ष उनको टोक सके और आवाम के जज्बात, उनकी भावनाओं को सत्ता तक पहुंचाए, ताकि सत्तारूढ़ दल अपनी गलतियों को माने और अपने कदम पीछे हटाए। यह संवैधानिक तरीका है।"
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से अखिलेश यादव और राहुल गांधी, विपक्ष के ये दो बड़े चेहरे हैं। वे एलओपी हैं और एलओपी में सबसे बड़ी पार्टी के बाद दूसरे नंबर का बहुमत समाजवादी पार्टी का है। वक्फ संशोधन के समय ही जब इस बिल को रिजेक्ट करने पर सदन में वोटिंग हुई, तो संविधान और लोकतंत्र को बचाने के लिए जो पार्टियां साथ में थीं, उनका नाम इंडी गठबंधन पड़ा।
सपा सांसद ने कहा कि आज भी कई बैठकों के बाद और उससे पहले भी सबकी यह कोशिश है कि जो कमियां और गलतियां सत्तारूढ़ पार्टी कर रही है, संविधान की अनदेखी कर रही है, वह ऐसा न करे। आवाम में बेचैनी पैदा हो जाना लाजिमी था, क्योंकि करोड़ों की तादाद में लोगों के वोट खत्म किए गए। आज के अखबार में भी दिल्ली की खबर है कि दस लोगों को मृत दिखा दिया गया, जबकि वे जीवित थे।
उन्होंने कहा कि हम अफसोस करेंगे कि कोर्ट यह कह रहा है कि कोई बात नहीं, अगली दफा सुधार हो जाएगा। यह जो नाजायज सरकार पैदा हो गई, इसका क्या होगा? दस हजार वोट पाए गए लखीमपुर खीरी में अभी और छह हजार से भाजपा जीती। अगर वहां छह हजार वोटों से गड़बड़ी हुई, तो गलत हुआ ना?
सपा सांसद ने कहा कि आप किसी की जमीन पर, किसी की जगह पर, किसी के हक को नाजायज तरीके से छीन लें और उसके बाद कहें कि अगली दफा सुधार हो जाएगा। अरे, यह कौन-सी बात हो गई? यह लॉजिक नहीं है। यह 'माइट इज राइट' वाली बात है। हमने किया है गलत, तो यह गलत है।
उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर से बच्चों ने एक विजन ऑफ इंडिया का क्लियर मैसेज दिया। हमें उनसे बहुत सीखना चाहिए। हम हिंदू-मुसलमान में बंटे रहे। आईटीबीपी के डायरेक्टर शत्रुजीत सिंह कपूर ने क्या कहा? हमारा तो दिल फट गया। उन्होंने सच बताया और हर हिंदुस्तानी के दिल पर चोट लगी होगी कि एक लाचार और मजबूर फौज के अफसर की तरह वे कह रहे हैं कि हथियारों में हम चीन से बहुत पीछे हैं।
सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने कहा कि हमने चीन को अपना प्रतिद्वंद्वी समझा ही नहीं, जबकि चीन ने हम पर दो बार चढ़ाई की थी। आजादी के तुरंत बाद हमने सारी ताकत कहां लगाई? हिंदू-मुस्लिम और कश्मीर में लगा दी। कश्मीरी बेचारा आज तक यह नहीं कह रहा कि मुझे हिंदुस्तान से अलग होना है। वह अगर गुस्से में कुछ बोल देता है, तो हम कहते हैं कि नहीं, नहीं, यह सही बोल रहा है।
उन्होंने कहा कि हमने अपनी सारी फौजी क्षमताओं को वहां निवेश करके बर्बाद कर दिया। अपनी ही जनता में ऊर्जा व्यर्थ कर दी। हम चीन की तुलना में किससे मुकाबला करते रहे? पाकिस्तान से। पाकिस्तान का हमारा क्या मुकाबला? बांग्लादेश से हमारा क्या मुकाबला? म्यांमार, भूटान से हमारा क्या मुकाबला? मुकाबला अगर होना चाहिए था तो दुनिया की बड़ी ताकतों से होना चाहिए था।
सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने कहा कि हमारे पास बड़े आधुनिक हथियार होने चाहिए थे और हमारा सामाजिक ढांचा इतना मजबूत होना चाहिए था कि लोगों का चुनाव मेरिट पर होता। लेकिन हमने भ्रष्टाचार इतना बढ़ा दिया कि बच्चों के पेपर लीक हो रहे हैं, ताकि अपने लोगों को दाखिला मिल सके। यहां तक हुआ कि एक खास विचारधारा के लोगों को शामिल करने के लिए आईपीएस और आईएएस का दरवाजा खोल दिया गया।
उन्होंने कहा कि पी चिदंबरम जब गृहमंत्री थे, मैं उस मस्जिद में इमाम उस वक्त भी था और अभी भी हूं। एक बार मैंने उनसे कश्मीर के मुद्दे पर बात की। मैंने कहा कि कश्मीरियों को उतनी ही आजादी मिलनी चाहिए, जितनी इस देश के दूसरे राज्यों के लोगों को मिलती है और उनके जख्मों पर मरहम रखा जाना चाहिए। आप दिल पर हाथ रखकर बताइए, क्या कश्मीरी बच्चे और बच्चियां देश की यूनिवर्सिटियों में खुलकर पढ़ भी पा रहे हैं? हर साल कितनी शिकायतें आती हैं। उनके लोग सामान भी नहीं बेच सकते हैं।
उन्होंने कहा कि हम उनको दुश्मन क्यों बना रहे हैं? अपने लोगों को सीने से लगाकर देखिए। वह कश्मीरी है। वह आदिल शाह भी है जिसने अपने देशवासियों को बचाने के लिए अपनी जान दे दी। कारगिल युद्ध में कौन लड़ रहा था? सभी हिंदुस्तानी लड़ रहे थे, कश्मीरी भी थे। लेकिन इस विचारधारा ने देश का बहुत नुकसान किया है। ये बच्चे जंतर-मंतर से कह रहे हैं कि हिंदू-मुस्लिम के जहर को हमेशा के लिए खत्म कर देना चाहिए। किसी के साथ भी रंग या नस्ल की वजह से भेदभाव नहीं होना चाहिए।
सपा सांसद ने कहा कि अगर कोई ब्राह्मण भी कमजोर है, गरीब है, अनपढ़ है, तो उसको भी वैसे ही सम्मान और अवसर मिलने चाहिए जैसे दूसरे लोगों को मिलते हैं। अगर इसका प्रावधान नहीं है, तो प्रावधान करना चाहिए।
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