सुनील गावस्कर साहस, धैर्य, तकनीक के दम पर भारतीय क्रिकेट में बल्लेबाजी के पहले पोस्टर बॉय रहे
नई दिल्ली, 9 जुलाई (आईएएनएस)। भारतीय क्रिकेट टीम में हर दौर में कोई न कोई ऐसा बल्लेबाज रहा जिसने अपनी करिश्माई बल्लेबाजी से पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। सुनील गावस्कर का नाम भी ऐसे ही बल्लेबाजों में शुमार है।
टेस्ट क्रिकेट के महानतम सलामी बल्लेबाजों में शुमार किए जाने वाले सुनील गावस्कर का जन्म 10 जुलाई 1949 को मुंबई में हुआ था। गावस्कर ने स्कूल के समय में ही क्रिकेट के क्षेत्र में कुछ बड़ा करने का लक्ष्य बना लिया था। 1966 में वह अपने स्कूली जीवन के आखिरी समय में थे, जब उन्होंने 246, 222 और 85 रन की पारी खेल न सिर्फ मुंबई क्रिकेट बल्कि पूरे देश में अपना नाम बना लिया था। इस प्रदर्शन की वजह से उन्हें 1966 में बेस्ट स्कूल बॉय क्रिकेटर ऑफ द ईयर का सम्मान दिया गया था।
1966-67 सत्र में उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया। लगातार 4 साल घरेलू क्रिकेट में बेहतरीन प्रदर्शन के बाद, उन्हें 1971 में भारतीय टीम के लिए टेस्ट में डेब्यू का मौका मिला था।
गावस्कर के दौर में वेस्टइंडीज और ऑस्ट्रेलिया जैसी टीमों के खतरनाक गेंदबाजों की तूती बोलती थी, लेकिन मुंबई के इस बल्लेबाज अपने साहस, धैर्य, तकनीक और बेहतरीन स्ट्रोक प्ले से खतरनाक गेंदबाजों की धार भी कूंद की। खरतनाक और जानलेवा बाउंसर्स के उस दौर में गावस्कर बिना हेलमेट के बल्लेबाजी किया करते थे। विकेटों के नियमित गिरने के बीच एक छोड़ संभालते हुए लंबी पारियां खेलना गावस्कर की क्षमता थी। देश हो या विदेश हर पिच पर गावस्कर ने अपनी दमदार बल्लेबाजी विपक्षी टीमों के लिए मुश्किल खड़ी की और इसी वजह से वह भारतीय बल्लेबाजी के पहले पोस्टर बॉय माने जाते हैं।
गावस्कर का टेस्ट करियर असाधारण और बाद में आने वाले युवाओं के लिए प्रेरणा था। गावस्कर को अपना आदर्श मानने वालों में 'गॉड ऑफ क्रिकेट' सचिन तेंदुलकर का नाम भी शामिल हैं।
1983 विश्व कप विजेता टीम के सदस्य रहे गावस्कर ने भारत के लिए टेस्ट में 1971 और वनडे में 1974 में डेब्यू किया था। 1987 तक के अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में गावस्कर ने भारत की तरफ से 125 टेस्ट और 108 वनडे खेले। टेस्ट क्रिकेट में गावस्कर महानतम बल्लेबाजों में शुमार किए जाते हैं। 214 पारियों में 51.12 की औसत से उन्होंने 10,122 रन बनाए थे। इस दौरान उनके बल्ले से 34 शतक और 45 अर्धशतक निकले थे। वनडे की 102 पारियों में 1 शतक और 27 अर्धशतक की मदद से उन्होंने 3,092 रन बनाए थे। संन्यास के समय गावस्कर के पास टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक रन और शतकों का रिकॉर्ड था।
क्रिकेट से संन्यास के बाद गावस्कर कॉलमिस्ट और कमेंटेटर के तौर पर बेहद सक्रिय और सम्मानित हैं। गावस्कर को भारत सरकार ने 1975 में अर्जुन पुरस्कार और पद्मश्री से सम्मानित किया था, जबकि 1980 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया था। 77 साल के हो रहे गावस्कर बेहद फिट हैं और आईपीएल के साथ ही तमाम अंतरराष्ट्रीय सीरीज और आईसीसी इवेंट्स में कमेंटेटर के तौर पर नजर आते हैं।
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Created On :   9 July 2026 7:42 PM IST











