समाज: एनसीपी (एसपी) ने 'दहेज मुक्त महाराष्ट्र-हिंसा मुक्त परिवार' अभियान की घोषणा की

एनसीपी (एसपी) ने दहेज मुक्त महाराष्ट्र-हिंसा मुक्त परिवार अभियान की घोषणा की
शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी यूनिट ने दहेज हत्याओं के बढ़ते मामलों के खिलाफ शुक्रवार को राज्यव्यापी विरोध-प्रदर्शन और "दहेज मुक्त महाराष्ट्र - हिंसा मुक्त परिवार" नाम से एक विशेष अभियान की घोषणा की। अभियान की शुरुआत पुणे की दहेज पीड़िता वैष्णवी कासपेते-हगावने की मौत से हुई।

मुंबई, 23 मई (आईएएनएस)। शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी यूनिट ने दहेज हत्याओं के बढ़ते मामलों के खिलाफ शुक्रवार को राज्यव्यापी विरोध-प्रदर्शन और "दहेज मुक्त महाराष्ट्र - हिंसा मुक्त परिवार" नाम से एक विशेष अभियान की घोषणा की। अभियान की शुरुआत पुणे की दहेज पीड़िता वैष्णवी कासपेते-हगावने की मौत से हुई।

शुक्रवार को औपचारिक घोषणा करने वाली एनसीपी (एसपी) नेता और सांसद सुप्रिया सुले ने कहा, “महिला मुक्ति के मामले में देश को दिशा दिखाने वाले राज्य में वैष्णवी जैसी बेटी का उत्पीड़न बेहद आक्रोशपूर्ण है। यह किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को परेशान करने वाला है। इस घटना से आज महाराष्ट्र सुन्न हो गया है। इसके लिए सिर्फ गुस्सा और दुख जताना ही काफी नहीं होगा, बल्कि हमें जागरूकता के मजबूत सक्रिय कदम उठाने होंगे।

इसलिए हम इस साल 22 जून से राज्य में दहेज उत्पीड़न और हिंसा मुक्त महाराष्ट्र के लिए लड़ाई शुरू करने के लिए दृढ़ संकल्प हैं। समाज के सभी वर्गों, सभी व्यवस्थाओं को इसमें भाग लेना होगा। और उस अभियान के जरिए ही अब 'दहेज मुक्त महाराष्ट्र और हिंसा मुक्त परिवार' का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है और यही वैष्णवी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”

सुले ने कहा कि तीन दशक पहले महाराष्ट्र राज्य ने पूर्व मुख्यमंत्री शरद पवार की पहल पर 22 जून 1994 को देश की पहली महिला नीति की घोषणा की थी। उस नीति के निर्माण में महाराष्ट्र के सभी घटकों और संस्थाओं ने योगदान दिया था।

महिला नीति के कारण राज्य में महिलाओं के जीवन में कई सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक बदलाव हुए हैं। लेकिन फिर भी यह एक सच्चाई है कि हम दहेज जैसी अवांछनीय प्रथाओं और महिलाओं को झेलने वाली घरेलू हिंसा को रोक नहीं पाए हैं। महाराष्ट्र का निर्माण छत्रपति शिवाजी, महात्मा फुले, राजर्षी शाहू और बी.आर. अंबेडकर के विचारों से हुआ है।

सुले ने कहा, "इस राज्य में राजमाता जिजाऊ, सावित्रीबाई फुले, पुण्यश्लोक राजमाता अहिल्यादेवी होल्कर जैसी प्रतिभाशाली और निपुण महान महिलाओं की परंपरा रही है। पिछले 50 वर्षों से राज्य में विभिन्न संस्थाएं, संगठन और व्यक्ति कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के साथ लैंगिक समानता के आंदोलन को आगे बढ़ा रहे हैं। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए मैं 22 जून 2025 को पुणे से इस अभियान की शुरुआत कर रही हूं।"

उन्होंने कहा कि प्रस्तावित अभियान पूरे वर्ष राज्य के सभी हिस्सों में अलग-अलग चरणों में लागू किया जाएगा और पार्टी इस अभियान का उद्देश्य पूरा होने तक इसका पालन करेगी। उन्होंने कहा, "इसलिए मैं आपसे इस संबंध में सुझाव और सक्रिय भागीदारी की अपील करती हूं। मैं अपने सभी भाइयों और बहनों से विनम्रतापूर्वक अपील करती हूं कि हम सब इस अभियान में भाग लें और दहेज मुक्त महाराष्ट्र और हिंसा मुक्त परिवार बनाने के लिए मिलकर काम करें।"

अस्वीकरण: यह न्यूज़ ऑटो फ़ीड्स द्वारा स्वतः प्रकाशित हुई खबर है। इस न्यूज़ में BhaskarHindi.com टीम के द्वारा किसी भी तरह का कोई बदलाव या परिवर्तन (एडिटिंग) नहीं किया गया है| इस न्यूज की एवं न्यूज में उपयोग में ली गई सामग्रियों की सम्पूर्ण जवाबदारी केवल और केवल न्यूज़ एजेंसी की है एवं इस न्यूज में दी गई जानकारी का उपयोग करने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों (वकील / इंजीनियर / ज्योतिष / वास्तुशास्त्री / डॉक्टर / न्यूज़ एजेंसी / अन्य विषय एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें। अतः संबंधित खबर एवं उपयोग में लिए गए टेक्स्ट मैटर, फोटो, विडियो एवं ऑडिओ को लेकर BhaskarHindi.com न्यूज पोर्टल की कोई भी जिम्मेदारी नहीं है|

Created On :   23 May 2025 11:47 PM IST

Tags

और पढ़ेंकम पढ़ें
Next Story