यूजीसी मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, केंद्र को जवाब दाखिल करने के लिए 4 हफ्ते का समय
नई दिल्ली, 20 अगस्त (आईएएनएस)। यूजीसी से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को अहम सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने कोर्ट से जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया।
सुनवाई के बाद वकील सत्यम पांडे ने आईएएनएस को बताया कि कोर्ट ने केंद्र सरकार को चार सप्ताह के भीतर अपना काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही मामले से जुड़े अन्य पक्षों को भी अपने-अपने काउंटर एफिडेविट और जवाब दाखिल करने की अनुमति दी गई है।
सत्यम पांडे ने आबिदा सलीम तड़वी की 2019 में दायर याचिका की मेंटेनेबिलिटी पर भी सवाल उठाया। वकील ने बताया कि इसी याचिका के आधार पर यूजीसी के ड्राफ्ट को तैयार करने का आदेश पारित हुआ था। उनकी ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि यह याचिका एक पीआईएल, यानी जनहित याचिका है और ऐसे मामले में याचिकाकर्ता का व्यक्तिगत हित नहीं होना चाहिए। उन्होंने अदालत के सामने यह पक्ष रखा कि यदि पीआईएल दाखिल करने वाला व्यक्ति सीधे तौर पर मामले से जुड़ा हुआ या व्यक्तिगत रूप से प्रभावित पक्ष है, तो ऐसी याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठता है।
वकील ने सुनवाई के दौरान यह भी तर्क दिया कि आबिदा सलीम तड़वी, पायल सलीम तड़वी की मां हैं। पायल सलीम तड़वी की कथित तौर पर जाति उत्पीड़न से परेशान होकर आत्महत्या किए जाने की बात मामले से जुड़ी है। सत्यम पांडे ने कहा कि उनकी ओर से अदालत के सामने यह आशंका जताई गई कि पीआईएल में याचिकाकर्ता के व्यक्तिगत संबंध और रुचि का प्रभाव निचली अदालत में लंबित ट्रायल पर पड़ सकता है। इससे ऐसा माहौल या परसेप्शन बन सकता है कि एक मां जाति उत्पीड़न के खिलाफ लड़ाई लड़ रही है और इसका प्रभाव उन लोगों के मामले पर पड़ सकता है जो निचली अदालत में ट्रायल का सामना कर रहे हैं।
सत्यम पांडे ने कहा कि देश के कानून का मूल सिद्धांत है कि जब तक किसी व्यक्ति का दोष सिद्ध नहीं हो जाता, तब तक उसे दोषी नहीं माना जा सकता। मौजूदा स्थिति में ऐसा वातावरण बन रहा था, जिसमें कुछ लोगों को पहले से ही दोषी मानने जैसा परसेप्शन पैदा हो रहा था। यह किसी मामले में निचली अदालत में चल रहे ट्रायल को प्रभावित कर सकता है। इसी आधार पर उनकी ओर से कोर्ट से मांग की गई कि व्यक्तिगत हित रखने वाले पक्षों के आधार पर पीआईएल को एंटरटेन नहीं किया जाना चाहिए और संबंधित पीआईएल को खारिज किया जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया। सत्यम पांडे के अनुसार, एसजी तुषार मेहता ने सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा था, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया। इसके साथ ही अदालत ने मामले के अन्य पक्षों को भी अपने-अपने काउंटर एफिडेविट और जवाब दाखिल करने की अनुमति दी है।
वकील सत्यम पांडे ने कहा कि अब यह मामला चार सप्ताह बाद अदालत के सामने आएगा। इस अवधि में केंद्र सरकार अपना काउंटर एफिडेविट दाखिल करेगी और अन्य संबंधित पक्ष भी अपने जवाब दाखिल कर सकेंगे।
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Created On :   21 Aug 2026 12:11 AM IST












