उज्जैन धर्म के साथ विज्ञान की नगरी सीएम मोहन यादव
उज्जैन, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन धर्म की नगरी होने के साथ-साथ विज्ञान की भी नगरी है। महाकाल की इस नगरी की माटी में विज्ञान-गणित-खगोल-ब्रह्मांड का चिंतन सदियों से विद्यमान है।
उज्जैन के तारामंडल परिसर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 'महाकाल-द मास्टर ऑफ टाइम' का शुभारंभ करते हुए सीएम मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन धर्म की नगरी होने के साथ-साथ विज्ञान की भी नगरी है। महाकाल की नगरी की माटी में विज्ञान-गणित-खगोल-ब्रह्मांड का चिंतन सदियों से विद्यमान है। उज्जैन काल गणना का केंद्र रहा। यहां प्राचीन काल में सूर्य की छाया से समय नापने की कला विकसित हुई। प्राचीन भारतीय भूगोल के अनुसार उज्जैन कर्क रेखा पर स्थित है और इसे पृथ्वी का मध्य बिंदु माना जाता था। ग्रीनविच के वैश्विक मानक के अस्तित्व में आने से सदियों पहले शून्य देशांतर रेखा उज्जैन से होकर गुजरती थी। जब पश्चिम में खगोल शास्त्र का ज्ञान भी नहीं था, तब उज्जैन के ज्योतिष और विद्वान काल गणना के आधार पर नक्षत्र की स्थिति बता रहे थे। जब दुनिया समय को परिभाषित करना सीख रही थी, तब यहां महर्षियों ने खगोलीय गणनाओं का वैश्विक मानक स्थापित किया।
उन्होंने कहा कि विज्ञान के अनुसार ब्रह्मांड की हर वस्तु समय के अधीन है, लेकिन शिव उस अनंत का प्रतीक हैं जहां से समय जन्म लेता है और जहां समय का अंत होता है। इसीलिए वे काल के अधिष्ठाता यानी मास्टर ऑफ टाइम हैं। विज्ञान मानता है कि समय और अंतरिक्ष एक दूसरे से अविभाज्य हैं। हमारे शास्त्रों में युगों पहले शिव को विश्व स्वरूप और महाकाल कहकर इसी वैज्ञानिक सत्य को प्रतिपादित किया था।
उन्होंने कहा कि आने वाला सिंहस्थ 2028 उज्जैन की गरिमा को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का स्वर्णिम अवसर है। सिंहस्थ में लगभग 40 करोड़ श्रद्धालु आएंगे। वे महाकाल दर्शन का पुण्य प्राप्त करने के साथ-साथ काल गणना के इस केंद्र का वैज्ञानिक महत्व भी जानेंगे। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि अगर हमारे धार्मिक स्थलों को अध्ययन के स्तर पर देखा जाए तो उज्जैन, काशी, कांची और पुरी धाम भारतीय ज्ञान परंपरा विज्ञान-कला-संस्कृति-साहित्य-आध्यात्म आधारित प्रयोगशालाएं हैं। विज्ञान अध्यात्म के बिना अधूरा है। महाकाल की नगरी उज्जैन हमारी संस्कृति का पवित्र स्थान है, जिसका विशेष सांस्कृतिक महत्व है। दुनिया के किसी भी अनुसंधान को देखा जाए तो उज्जैन के बिना काल की गणना अधूरी है।
कार्यक्रम में लेखक-विचारक सुरेश सोनी ने कहा कि एक समय था, जब काल की गणना उज्जैन से होती थी। यहां काल के प्रतीक महाकाल परिसर में कर्कराजेश्वर मंदिर है। प्रसिद्ध पुरातत्वविद सर वीएस वाकणकर ने इसकी खोज की थी कि कर्क रेखा कालांतर में स्थान बदल रही है।
उन्होंने कहा कि अब आधुनिक तकनीक जीपीएस से भी यह सिद्ध हो गया है कि कर्क रेखा का केंद्र बिंदू उज्जैन के पास डोंगला में शिफ्ट हो गया है। इस सम्मेलन का उद्देश्य उज्जैन को वैश्विक काल गणना का केंद्र बनाना है। एमपीसीएसटी के महानिदेशक अनिल कोठारी ने कहा कि यहां तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘महाकाल- द मास्टर ऑफ टाइम’ के आयोजन में देशभर के 1000 से अधिक विद्यार्थी भी शामिल हुए हैं। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य उज्जैन को काल गणना का प्रमुख केंद्र बनाना है। कार्यक्रम में अनेक वरिष्ठ वैज्ञानिक, खगोलशास्त्री, ज्योतिषि, शिक्षाविद एवं बड़ी संख्या में शोधार्थी-विद्यार्थी उपस्थित थे।
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Created On :   3 April 2026 5:35 PM IST












