'उनके जैसा कोई कोच नहीं है', पूर्व शूटरों ने जसपाल राणा के निधन को देश की बड़ी क्षति बताया
वाराणसी, 13 जून (आईएएनएस)। शूटिंग के दिग्गज खिलाड़ी और कोच रहे जसपाल राणा के असामयिक निधन से भारतीय खेल जगत सदमे में है। 49 साल के राणा का निधन भारतीय खेलों के लिए बड़े नुकसान के रूप में देखा जा रहा है। उनका निधन शुक्रवार की सुबह दिल्ली में हुआ था। इसके बाद उनका पार्थिव शरीर उनके देहरादून स्थित घर पर ले जाया गया, जहां उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।
जसपाल राणा का अंतिम संस्कार शनिवार को वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर किया जाना है। इसके लिए उनके परिजन निजी विमान ने उनका पार्थिव शरीर वाराणसी लेकर आ रहे हैं। वाराणसी एयरपोर्ट पर उन्हें श्रद्धांजलि दी जाएगी और उसके बाद मणिकर्णिका के लिए अंतिम यात्रा निकलेगी।
वाराणसी एयरपोर्ट पर जसपाल राणा के पार्थिव शरीर के आने का इंतजार उनके साथी और सीनियर रहे कई पूर्व खिलाड़ी कर रहे हैं। आईएएनएस से बातचीत में पूर्व खिलाड़ियों ने राणा के निधन को भारतीय खेल जगत के लिए बड़ी क्षति बताया।
वीरेंद्र उपाध्याय ने आईएएनएस से कहा, "जसपाल राणा का निधन खेल जगत के लिए एक बहुत बड़ी और अपूरणीय क्षति है। इतनी कम उम्र में उनका जाना बहुत कष्टदायी है।"
अंतरराष्ट्रीय कोच रोहित जैन ने कहा, "जसपाला राणा भारत की पिस्टल शूटिंग को सर्वोच्च शिखर पर ले जाने वाले पहले खिलाड़ी थे। उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड जब एक था, उस समय उन्होंने पहला पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया था। उनके जैसा कोई भी कोच मौजूदा समय में नहीं है।"
पूर्व राष्ट्रीय शूटर रामेंद्र शर्मा ने कहा, "यह एक अपूरणनीय क्षति है। इसको शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। हमने जसपाल राणा को 1987 से शूटिंग करते हुए देखा है। जसपाल राणा जूनियर विश्व चैंपियन बनने वाले पहले एथलीट थे। राणा की इस उपलब्धि के बाद ही देश में शूटिंग आगे बढ़ी है। हमारे एक सीनियर अशोक पंडित ने कहा था कि जसपाल राणा बनाए नहीं जाते, पैदा होते हैं। राणा के साथ भी कई शूटर खेले लेकिन उनकी जैसी उपलब्धि कोई हासिल नहीं कर सका।"
पूर्व राइफल शूटर पंकज श्रीवास्तव ने कहा, "जसपाल राणा का जाना एक बहुत बड़ी क्षति है। निशानेबाजी को बड़ा नुकसान हुआ है। जसपाल राणा ने ही सबसे पहले अपने प्रदर्शन से यह साबित किया कि हम विदेशों में भी पदक जीत सकते हैं। उन्होंने विश्व रिकॉर्ड भी बनाया था, जो लंबे समय तक अटूट रहा। सबसे कम उम्र में उन्होंने अर्जुन पुरस्कार जीता। इसके बाद पद्मश्री और अर्जुन पुरस्कार भी उन्हें मिला। इस समय साई में वह कोच भी थे। उनकी इच्छा थी कि उनका अंतिम संस्कार काशी में हो। हम सभी उनके आने का इंतजार कर रहे हैं।"
अस्वीकरण: यह न्यूज़ ऑटो फ़ीड्स द्वारा स्वतः प्रकाशित हुई खबर है। इस न्यूज़ में BhaskarHindi.com टीम के द्वारा किसी भी तरह का कोई बदलाव या परिवर्तन (एडिटिंग) नहीं किया गया है| इस न्यूज की एवं न्यूज में उपयोग में ली गई सामग्रियों की सम्पूर्ण जवाबदारी केवल और केवल न्यूज़ एजेंसी की है एवं इस न्यूज में दी गई जानकारी का उपयोग करने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों (वकील / इंजीनियर / ज्योतिष / वास्तुशास्त्री / डॉक्टर / न्यूज़ एजेंसी / अन्य विषय एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें। अतः संबंधित खबर एवं उपयोग में लिए गए टेक्स्ट मैटर, फोटो, विडियो एवं ऑडिओ को लेकर BhaskarHindi.com न्यूज पोर्टल की कोई भी जिम्मेदारी नहीं है|
Created On :   13 Jun 2026 5:31 PM IST












