उपराष्ट्रपति ने 20वें रामनाथ गोयनका पत्रकारिता पुरस्कार समारोह को किया संबोधित
नई दिल्ली, 27 मार्च (आईएएनएस)। भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने नई दिल्ली में इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप द्वारा आयोजित रामनाथ गोयनका एक्सीलेंस इन जर्नलिज्म अवार्ड्स के 20वें संस्करण को संबोधित किया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि ये पुरस्कार सिर्फ पेशेवर उपलब्धियों का सम्मान ही नहीं करते, बल्कि निडर और सच्चे पत्रकारिता के आत्मा का जश्न भी मनाते हैं। उन्होंने बताया कि 20 साल से ये पुरस्कार रामनाथ गोयनका की विरासत को सम्मानित करते हैं, जो साहस, स्वतंत्रता और सत्य के प्रति अडिग प्रतिबद्धता से भरी हुई है, खासकर भारत के सबसे चुनौतीपूर्ण समय में।
उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब मीडिया शक्तिशाली होने के साथ-साथ कड़ी जांच और आलोचना के अधीन है, गोयनका के आदर्श मार्गदर्शक बने रहते हैं।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि क्वीट इंडिया मूवमेंट के दौरान गोयनका ने ब्रिटिश सेंसरशिप के विरोध में अखबार बंद करने का साहस दिखाया। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि संविधान सभा के सदस्य के रूप में गोयनका ने समाचार पत्रों पर कराधान जैसे मुद्दों पर योगदान दिया।
आपातकाल के समय, गोयनका ने खाली संपादकीय प्रकाशित करके प्रेस की स्वतंत्रता और नागरिकों के अभिव्यक्ति के अधिकार का प्रतीक बनाया। उन्होंने बताया कि संपादकों की जेल, बिजली की कटौती, आर्थिक नुकसान और परेशानियों के बावजूद, गोयनका लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रति अडिग रहे।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि रामनाथ गोयनका का जीवन सफर दरभंगा से चेन्नई और बाद में विदिशा के सांसद के रूप में भारत की विविधता में एकता की भावना को दर्शाता है। उन्होंने यह भी बताया कि गोयनका ने अखबारों को कई क्षेत्रीय भाषाओं और अंग्रेजी में प्रकाशित किया, ताकि उनकी पहुंच ज्यादा से ज्यादा लोगों तक हो सके। इनके मूल्य आज भी इंडियन एक्सप्रेस को न्याय, साहस और स्वतंत्रता का प्रतीक बनाते हैं।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि चर्चा, बहस और असहमति का उद्देश्य देशहित में निर्णय लेने तक होना चाहिए, न कि विघटन पैदा करने तक।
उन्होंने प्रधानमंत्री के औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त होने के संदेश को याद किया और कहा कि इंडियन एक्सप्रेस जैसे मीडिया संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे वैश्विक और राष्ट्रीय घटनाओं को भारतीय दृष्टिकोण और सभ्यता की जड़ों से प्रस्तुत करें।
उपराष्ट्रपति ने प्रगति, नवाचार और जमीनी स्तर पर बदलाव की कहानियों को उजागर करने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि संतुलित पत्रकारिता में चुनौतियों के साथ उपलब्धियों को भी दिखाना चाहिए।
अपने संबोधन का समापन करते हुए, उपराष्ट्रपति ने सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी और आयोजकों की पत्रकारिता में उत्कृष्टता के सम्मान की परंपरा बनाए रखने की सराहना की।
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Created On :   27 March 2026 11:25 PM IST












