यूपीआई भारत के डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर को दुनिया में पहुंचा रहा; अब तक 11 देशों में हुआ ऑपरेशनल
नई दिल्ली, 25 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्रियों ने यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) के 10 साल पूरे होने पर कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच से शुरू हुई क्रांति है और यह अब भारत के डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर को दुनिया में पहुंचा रहा है और अब तक 11 देशों में ऑपरेशनल हो चुका है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के ऑफिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कहा कि यूपीआई अब दुनिया के 11 देशों में ऑपरेशनल हो चुका है, जिसमें फ्रांस, सिंगापुर, यूएई, ग्रीस और मॉरिशस जैसे देशों का नाम शामिल है।
पोस्ट में आगे कहा गया कि भारत में आसान पेमेंट की सुविधा देने से लेकर सीमाओं के पार डिजिटल ट्रांजैक्शन को संभव बनाने तक, यूपीआई हमारे डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर को दुनिया भर में पहुंचा रहा है।
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने एक्स पर कहा कि यूपीआई, प्रधानमंत्री मोदी की सोच से शुरू हुई एक क्रांति है और 'डिजिटल इंडिया' की एक झलक है।
गोयल ने डिजिटल पेमेंट के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल का जिक्र करते हुए कहा कि "क्यूआर कोड प्लीज?" अब करोड़ों भारतीयों की रोजमर्रा की बातचीत का हिस्सा बन गया है।
वहीं, केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में आए बदलाव का श्रेय पीएम मोदी के नेतृत्व को दिया।
पुरी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "पीएम नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में यूपीआई भारत की डिजिटल यात्रा में एक क्रांतिकारी ताकत बन गया है।"
उन्होंने कहा कि यूपीआई ने पेमेंट को तेज, आसान, सुरक्षित और ज्यादा सुलभ बना दिया है, जिससे लाखों भारतीय वित्तीय भागीदारी के एक नए दौर में शामिल हो गए हैं।
वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यूपीआई, इनोवेशन के जरिए भारत के बदलाव का सफर तय करने के पीएम मोदी के विजन का एक बेहतरीन उदाहरण है।
यूपीआई के 10 वर्षों के दौरान, हमारे देश ने दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम दिया है और यह साबित किया है कि 'डिजिटल इंडिया' के जरिए हम लोगों को तेज, आसान और सुरक्षित इंटरफेस देकर उन्हें सशक्त बना सकते हैं।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, यूपीआई पर वार्षिक लेनदेन की संख्या बीते एक दशक में 13,000 गुना बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 24,162 करोड़ हो गई है, जबकि वित्त वर्ष 2016-17 में इनकी संख्या 1.78 करोड़ थी।
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Created On :   25 Aug 2026 1:08 PM IST












