वीरभद्रासन में न करें ये गलतियां, जान लें करने का सही तरीका

वीरभद्रासन में न करें ये गलतियां, जान लें करने का सही तरीका
योग शरीर को स्वस्थ और मन को शांत रखने का एक अच्छा तरीका है। नियमित रूप से योग करने से शरीर में लचीलापन बढ़ता है, मांसपेशियां मजबूत होती हैं और शरीर का संतुलन बेहतर होता है। योग के कई आसनों में वीरभद्रासन भी शामिल है। यह आसन पैरों को मजबूती देने, शरीर का संतुलन सुधारने और कंधों को सक्रिय रखने में मदद करता है। हालांकि, इस आसन को करते समय सही मुद्रा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। छोटी-सी गलती भी घुटनों, कंधों और कमर पर अनावश्यक दबाव डाल सकती है।

नई दिल्ली, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। योग शरीर को स्वस्थ और मन को शांत रखने का एक अच्छा तरीका है। नियमित रूप से योग करने से शरीर में लचीलापन बढ़ता है, मांसपेशियां मजबूत होती हैं और शरीर का संतुलन बेहतर होता है। योग के कई आसनों में वीरभद्रासन भी शामिल है। यह आसन पैरों को मजबूती देने, शरीर का संतुलन सुधारने और कंधों को सक्रिय रखने में मदद करता है। हालांकि, इस आसन को करते समय सही मुद्रा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। छोटी-सी गलती भी घुटनों, कंधों और कमर पर अनावश्यक दबाव डाल सकती है।

वीरभद्रासन करते समय कई लोग अपनी भुजाओं को ढीला छोड़ देते हैं या कंधों को कानों की तरफ उठा लेते हैं। इससे शरीर की मुद्रा बिगड़ सकती है। इस आसन में दोनों भुजाओं को सक्रिय रखते हुए जमीन के समानांतर फैलाना चाहिए। साथ ही, कंधों को कानों से दूर रखना चाहिए।

एक आम गलती आगे वाले घुटने को गलत दिशा में मोड़ना है। कुछ लोग घुटने को टखने से आगे निकाल देते हैं, जबकि कुछ का घुटना अंदर की ओर झुक जाता है। इससे घुटने पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इसलिए आगे वाले घुटने को टखने के ठीक ऊपर रखें।

इसके अलावा, शरीर के ऊपरी हिस्से को आगे की ओर झुका लेना भी सही नहीं है। कोशिश करें कि धड़ सीधा रहे। इस आसन के दौरान शरीर का पूरा भार केवल आगे या पीछे वाले पैर पर डालना भी एक गलती है। दोनों पैरों को मजबूती से जमीन पर टिकाएं और शरीर का भार संतुलित रखें। पीछे वाले पैर को मैट से उठाने के बजाय उसकी पूरी स्थिति को स्थिर बनाए रखें।

वीरभद्रासन करने के लिए सबसे पहले मैट पर सीधे खड़े हो जाएं। दोनों पैरों के बीच उचित दूरी बनाएं और एक पैर को बाहर की ओर मोड़ें। दूसरे पैर को थोड़ा अंदर की ओर रखें। अब दोनों हाथों को कंधों की ऊंचाई पर फैलाएं, ताकि वे जमीन के समानांतर रहें।

इसके बाद आगे वाले घुटने को मोड़ें और ध्यान रखें कि वह टखने के ठीक ऊपर रहे। पीछे वाले पैर को सीधा रखते हुए उसके तलवे और बाहरी किनारे को मैट पर मजबूती से टिकाएं। छाती खुली रखें, कंधों को नीचे रखें और दोनों कूल्हों को समतल बनाए रखने की कोशिश करें। शरीर का भार दोनों पैरों पर संतुलित रखें और सामने की ओर देखें।

इस मुद्रा में अपनी क्षमता के अनुसार कुछ देर रुकें और फिर धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौट आएं। इसके बाद दूसरी तरफ से भी यही प्रक्रिया दोहराएं।

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