विदेश मंत्री जयशंकर ने यूएन महासचिव गुटेरेस से की मुलाकात, ग्लोबल साउथ के मुद्दों पर रहा फोकस

विदेश मंत्री जयशंकर ने यूएन महासचिव गुटेरेस से की मुलाकात, ग्लोबल साउथ के मुद्दों पर रहा फोकस
भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने भारतीय समयानुसार मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच वर्तमान समय में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जारी संघर्ष और झगड़ों को कम करने को लेकर बातचीत हुई।

संयुक्त राष्ट्र, 29 सितंबर (आईएएनएस)। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने भारतीय समयानुसार मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच वर्तमान समय में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जारी संघर्ष और झगड़ों को कम करने को लेकर बातचीत हुई।

एस. जयशंकर ने कहा, "संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मिलकर खुशी हुई। हमारी बातचीत चल रहे झगड़ों और उनके असर को कम करने की जरूरत पर फोकस थी, खासकर ग्लोबल साउथ को लेकर।"

इससे पहले विदेश मंत्री ने न्यूयॉर्क में आयोज‍ित एक कार्यक्रम में कहा कि भारत लंबे समय से अपनी रणनीतिक स्वायत्तता यानी अपने हितों के हिसाब से स्वतंत्र फैसले लेने की नीति के तहत जो करता रहा है, वही अब अमेरिका कर रहा है और वह है कई देशों के साथ रिश्तों को एक साथ संभालने की कोशिश।

जयशंकर ने सोमवार को कार्यक्रम के दौरान कहा था, "हमारे बारे में जो बातें पहले कही जाती थीं, आज वॉशिंगटन वही काम पूरे जोश के साथ कर रहा है।"

उन्होंने अमेरिका के पूर्व सहायक विदेश मंत्री डैनियल रसेल से बातचीत के दौरान कहा, "आप चीन से बात कर रहे हैं, रूस से बात कर रहे हैं, यूक्रेन से बात कर रहे हैं और एशिया के दूसरे हिस्सों या यूरोप के साथ भी संबंध संभाल रहे हैं।"

एस. जयशंकर ने कहा कि इस तरह देखा जाए तो वॉशिंगटन आज वही कर रहा है जो भारत पहले से करता आया है।

भारत की रणनीतिक स्वायत्तता पर सवाल पूछते समय डैनियल रसेल ने अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली एक आम कहावत का जिक्र किया, 'च्यूइंग गम चबाना और चलना।' इसका मतलब है कि कोई व्यक्ति एक ही समय में अलग-अलग काम संभाल सकता है। जयशंकर ने भी इसी उदाहरण को आगे बढ़ाते हुए मजाक में कहा, "मुझे लगता है कि वॉशिंगटन में उस च्यूइंगम की काफी बड़ी सप्लाई है।"

उनका इशारा इस ओर था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका एक ही समय में कई देशों के साथ अलग-अलग तरह के रिश्ते और कई बार एक-दूसरे के खिलाफ जाने वाले हितों को भी संभालने की कोशिश कर रहा है।

एस. जयशंकर ने कहा, "एक बार जब वॉशिंगटन इस मामले में आगे बढ़ता है तो एक तरह से यह पूरी दुनिया का सवाल बन जाता है। यही आज की हकीकत है।"

जयशंकर ने कहा कि एक समय ऐसा था जब भारत जैसे देशों से कहा जाता था कि वे बहुत ज्यादा विकल्प न रखें और अपने रिश्तों को किसी एक देश पर ज्यादा केंद्रित करें। जयशंकर ने कहा कि दूसरी ओर अमेरिका खुद अपने लिए ज्यादा विकल्प बनाए रखता था, क्योंकि वह एक वैश्विक ताकत है। उन्होंने कहा क‍ि आज यह दिखावा सभी के लिए खत्म हो चुका है। अब हर कोई खुले तौर पर हर किसी के साथ रिश्ते रख रहा है।

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Created On :   29 Sept 2026 11:59 PM IST

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