व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और बातचीत से सुधरेंगे भारत-पाकिस्तान के रिश्ते महबूबा मुफ्ती
श्रीनगर, 1 जुलाई (आईएएनएस)। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भारत और पाकिस्तान के बीच संवाद की जरूरत पर एक बार फिर जोर दिया। उन्होंने भारत-पाकिस्तान के हस्ताक्षरकर्ताओं की ओर से जारी अपील का समर्थन करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत, व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान ही रिश्तों को बेहतर बनाने का सबसे प्रभावी रास्ता है।
महबूबा मुफ्ती ने कहा कि पीडीपी शुरू से ही यह मानती रही है कि संवाद ही ऐसा समाधान है जो भारत और पाकिस्तान के बीच दूरियां कम कर सकता है। लोगों को इस पहल और इस पत्र के बारे में जानकारी लेनी चाहिए, क्योंकि मौजूदा हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं। इसका असर सिर्फ जम्मू-कश्मीर के लोगों पर ही नहीं, बल्कि पूरे देश पर पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि पीडीपी का हमेशा से एजेंडा मेल-मिलाप का रहा है। जम्मू-कश्मीर जंग का अखाड़ा नहीं, बल्कि भारत और पाकिस्तान के बीच अमन का पुल बनना चाहिए। दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही होनी चाहिए, रास्ते खुलने चाहिए और आपसी संबंध सामान्य होने चाहिए।
महबूबा मुफ्ती ने कहा कि उन्हें खुशी है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ नेताओं ने भी दोनों देशों के बीच संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की जरूरत पर सकारात्मक बात कही है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के उस प्रसिद्ध कथन का भी जिक्र किया कि "दोस्त बदले जा सकते हैं, लेकिन पड़ोसी नहीं बदले जा सकते।"
महबूबा मुफ्ती ने कहा कि किसी भी प्रधानमंत्री की असली विरासत उसकी ताकत या लंबे समय तक सत्ता में बने रहने से नहीं, बल्कि इस बात से तय होती है कि उसने कितने बड़े विवादों और संघर्षों का समाधान किया। आज दोनों नेताओं के पास रिश्तों को सुधारने का एक सुनहरा अवसर है।
उन्होंने सुझाव दिया कि दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) को फिर से सक्रिय किया जाए। भारत को इसकी अगुवाई अपने हाथ में लेनी चाहिए और जम्मू-कश्मीर को सार्क सहयोग का एक मॉडल बनाया जाना चाहिए, जहां सदस्य देश निवेश करें और क्षेत्र के विकास में भागीदारी निभाएं।
महबूबा मुफ्ती ने हाल ही में उत्तराखंड में लिपुलेख मार्ग खोले जाने का जिक्र करते हुए कहा कि जब चीन की दिशा में संपर्क बढ़ाया जा सकता है, तो खोतान, यारकंद और काशगर जैसे पुराने मार्ग भी लद्दाख के रास्ते क्यों नहीं खोले जा सकते। जम्मू-कश्मीर की भौगोलिक स्थिति भारत को मध्य एशिया और दक्षिण एशिया का प्रवेश द्वार (गेटवे) बना सकती है, जिससे पूरे क्षेत्र और देश की अर्थव्यवस्था को फायदा होगा।
उन्होंने कहा कि इसके लिए पाकिस्तान और चीन, दोनों के साथ अच्छे संबंध जरूरी हैं। महबूबा मुफ्ती ने आरोप लगाया कि 2019 में आर्टिकल 370 और 35ए हटाने के बावजूद जम्मू-कश्मीर की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। उन्होंने दावा किया कि आज भी जम्मू-कश्मीर के लोग अलगाव की भावना का सामना कर रहे हैं और पूरा क्षेत्र एक "ओपन प्रिजन" जैसा महसूस करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि पहले भारत का टकराव मुख्य रूप से पाकिस्तान से था, लेकिन 2019 के बाद लद्दाख में चीन के साथ तनाव भी बढ़ा है। ऐसे में उनका मानना है कि भारत को बड़े दिल का परिचय देते हुए पाकिस्तान और चीन, दोनों के साथ बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए।
महबूबा मुफ्ती ने कहा कि जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान, सियालकोट, करगिल, स्कर्दू, मध्य एशिया और दक्षिण एशिया की ओर जाने वाले कई महत्वपूर्ण मार्ग जुड़े हैं। यदि इन रास्तों को खोला जाए, लोगों की आवाजाही और व्यापार बढ़े, तो जम्मू-कश्मीर ही नहीं बल्कि पूरे देश को आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बड़ा लाभ मिलेगा।
उन्होंने कहा कि दुनिया बदल चुकी है और अब भारत को अपनी रणनीतिक भौगोलिक स्थिति का पूरा लाभ उठाना चाहिए। जिस तरह दूसरे देश अपनी भौगोलिक स्थिति का उपयोग कर रहे हैं, उसी तरह जम्मू-कश्मीर को भी दक्षिण एशिया और मध्य एशिया को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है।
बता दें कि भारत और पाकिस्तान के बीच शांति, बातचीत और सामान्य संबंध बहाल करने के लिए दोनों देशों की 117 प्रमुख हस्तियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को एक खुला संयुक्त पत्र लिखा है। यह पहल 'सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस' की ओर से की गई है।
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Created On :   1 July 2026 2:31 PM IST












