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राजवीर सिंह ने परंपरागत खेती से हटकर लहसून की खेती को अपनाया (सफलता की कहानी) पौने दो बीघा में कमाये डेढ़ लाख रूपये!

राजवीर सिंह ने परंपरागत खेती से हटकर लहसून की खेती को अपनाया (सफलता की कहानी) पौने दो बीघा में कमाये डेढ़ लाख रूपये!

डिजिटल डेस्क | मुरैना तहसील जौरा के ग्राम पंचायत गलैथा निवासी युवा राजवीर सिंह सिकरवार परंपरागत खेती से हटकर लहसून की खेती को अपनाया है। उन्होंने पौने दो बीघा में लहसून की खेती करके लगभग डेढ़ लाख रूपये कमाये हैं। युवा कृषक राजवीर सिंह सिकरवार ने बताया कि पहले हम अपने बुजुर्गो के कहने पर चना, सरसों, गेंहू, बाजरा की फसलें लेते थे। इन फसलों में लागत निकालकर हमें 50 से 60 हजार तक का मुनाफा होता था। मैं उन्नत खेती की ओर बढ़ना चाहता था, एक दिन कृषि विभाग के एसडीओ अनेक सिंह तोमर ने परंपरागत खेती को छोड़कर वैज्ञानिक तरीके से खेती को अपनाने को कहा। कृषि आंचलिक केन्द्र वैज्ञानिक डॉ. रघुवंशी ने मिट्टी परीक्षण के लिये सलाह दी।

उद्यानिकी के सहायक संचालक श्री बीएस भदौरिया ने मुझे मिर्च, लहसून फसल लेने की सलाह दी। मैंने सभी की बात को मानते हुये लहसून की खेती को अपनाया। युवा किसान राजवीर सिंह सिकरवार ने बताया कि पौने 2 बीघा खेत में 17 क्विंटल लहसुन हुआ है। जिसकी कीमत डेढ़ लाख रूपये हुई है। गलैथा निवासी राजवीर सिंह सिकरवार कहते हैं कि भारत वर्ष एक कृषि प्रधान देश है कृषि प्रधान देश होने के कारण हमारे देश में नाना प्रकार की फसलें पैदा होती है देश में खनिज संपदा ओं की भी कमी नहीं है उसको देखते हुए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहन ने भी किसानों के लिए कई एक योजना का शुभारंभ किया है जिसको लेकर किसान उनका लाभ ले सके चाहे वह बीज हो कृषि यंत्र हो कृषि यंत्र को लेकर यह सारी सुविधा किसानों को दी जा रही हैं इससे जागृत होकर मध्य प्रदेश के किसान अब परंपरागत खेती से हटकर उन्नत मिर्च मसाले, धनिया, लहसून तथा औषधियों की खेती कर रहे हैं।

ग्राम पंचायत में परंपरागत खेती को लेकर लोगों में विश्वास है फसल चक्र को अपनाना नहीं युवा किसान राजवीर सिंह सिकरवार जो समय लेकर खेती कार्य करते हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में भी जिला मुरैना में कार्य कर रहे हैं उनके छोटे भाई एक्स हवलदार अवधेश सिंह का उनका साथ रहा है दोनों भाइयों ने मिलकर पान दो बीघा खेत में लहसुन की खेती करने का प्लान किया और लहसुन को खेत में इसे देखकर ग्राम पंचायत के कुछ लोगों ने ताना देना शुरू कर दिया था। क्या होगा लेहसुन नहीं हो पाएगा इस तरीके से कई तरह की बातें मिलती रहे लेकिन इस को नकारते हुए वह अपने आत्मविश्वास पर लहसुन की खेती को अपनाने के लिये अडि़ग रहे।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।