दैनिक भास्कर हिंदी: मानसून सत्र के पहले दिन हंगामा, फडणवीस बोले - साजिश रच भाजपा के 12 विधायक किए निलंबित

July 5th, 2021

हाईलाइट

  • बीजेपी के 12 विधायकों पर बड़ी कार्रवाई

डिजिटल डेस्क,  मुंबई। मानसून सत्र के पहले दिन हंगामा करने वाले भाजपा के 12 विधायकों को 1 वर्ष के लिए निलंबित कर दिया गया। विधानसभा में हंगामा करते हुए पीठासीन अध्यक्ष भास्कर जाधव से गैरव्यवहार करने पर भाजपा के 12 विधायकों पर कार्रवाई की गई है। सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग करते हुए भाजपा विधायकों ने सीढ़ियों पर बैठकर जमकर हंगामा किया। 12 भाजपा विधायकों पर कार्रवाई किए जाने से नाराज विरोधी पक्ष ने मानसून सत्र का बहिष्कार कर दिया। सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच ओबीसी आरक्षण को लेकर जमकर हंगामा हुआ। सभागृह में धक्का-मुक्की तक हुई। जिन विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की गई उनके नाम पराग अलवणी, राम सातपुते, संजय कुटे, आशीष शेलार, अभिमन्यु पवार, गिरीश महाजन, अतुल भातखलकर, हरीश पिंपले, जयकुमार रावल,  योगेश सागर, नारायण कुचे, कीर्तिकुमार भांगड़िया  है।

साजिश रचकर किया निलंबित-फडणवीस

विधानसभा में विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर राज्य सरकार का सच सबसे सामने लाने के चलते 12 विधायकों को साजिश रच कर निलंबित किया गया। उन्होंने कहा कि भले भाजपा के सभी 106 विधायक निलंबित हो जाएं लेकिन ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा पीछे नहीं हटेगी। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर सरकार की नाकामी हमने सामने लाई इसलिए कार्रवाई की गई लेकिन जब तक ओबीसी आरक्षण वापस नहीं लाएंगे तब तक भाजपा संघर्ष करती रहेगी। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी कई बार सदस्य अध्यक्ष के आसन के सामने गए हैं। अध्यक्ष की केबिन में बहस हुई है लेकिन किसी को निलंबित नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि मेरे खिलाफ चाहे कोई विशेषाधिकार प्रस्ताव लाए तो भी मैं बताना चाहता हूं कि कहानी रची गई है, भाजपा के किसी सदस्य ने गालीगलौज नहीं की। भास्कर जाधव ने क्या कहा यह मैं यहां नहीं बता सकता। शिवसेना सदस्यों ने भी वहां आकर धक्कामुक्की की। इसके बाद कुछ भाजपा सदस्य आक्रामक हुए लेकिन मैंने सबको शांत किया। जो धक्का मुक्की हुई उसे लेकर आशीष शेलार ने जाधव से माफी मांगी। इसके बाद जाधव शेलार और गिरीश महाजन से गले मिले। मामला खत्म कर हम बाहर आए। इसके बाद सरकार के कुछ मंत्रियों ने मिलकर साजिश रची और विधायकों को निलंबित करने के लिए कहानी तैयार की। फडणवीस ने कहा कि मराठा और ओबीसी आरक्षण को लेकर राज्य सरकार असफल साबित हुई है। 

विधान परिषद में भी हंगामा, बायकॉट

विधान परिषद में स्थानीय निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी)  के राजनीतिक आरक्षण की बहाली के लिए ओबीसी का अनुभवजन्य आंकड़ा (एंपेरिकल डाटा) केंद्र सरकार से मांगने की सिफारिश वाले प्रस्ताव पर बोलन न देने से विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया। विपक्ष के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित हुई। आखिर में ओबीसी आरक्षण के प्रस्ताव पर बोलने की अनुमति न दिए जाने से नाराज विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया। सोमवार को सदन में नियम 106 के तहत प्रदेश के ग्रामीण विकास मंत्री हसन मुश्रीफ ने राज्य सरकार को ओबीसी का अनुभवजन्य आंकड़ा देने के लिए केंद्र सरकार को सिफारिश भेजने का प्रस्ताव पेश किया। सभापति रामराजे नाईक-निंबालकर ने इस प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित किए जाने की घोषणा की। इस बीच विपक्ष के सदस्य प्रस्ताव पर बोलने की अनुमति मांग रहे थे। विपक्ष के सदस्य वेल में आकर हंगामा करने लगे। इस पर सभापति ने कहा कि मुझे सदन में सदस्यों को बोलने अथवा न बोलने देने के बारे में फैसला लेने का अधिकार है। सभापति के इस रूख से बाद विपक्ष के सदस्य और हंगामा करने लगे। इस कारण सदन की कार्यवाही कई बार स्थगति हुई। फिर विधान परिषद में विपक्ष के नेता प्रवीण देरकर ने प्रस्ताव पर बोलने की अनुमति मांगा। हालांकि सभापति ने कहा कि सदन की कार्यवाही आगे बढ़ चुकी है। जिस पर नाराज होकर विपक्ष के सदस्यों ने सदन का वॉकआउट कर दिया।

निलंबन के बाद राज्यपाल के पास पहुंचे भाजपा विधायक

विधानसभा में भाजपा के 12 विधायकों के निलंबन के बाद इन विधायकों ने राजभवन जाकर राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को ज्ञापन सौपा। जिसमें कहा गया है कि राज्य सरकार  लोकतंत्र के खिलाफ काम कर रही है। केवल दो दिनों का अधिवेशन आयोजित करने के बावजूद सत्तापक्ष विपक्ष को बोलने नहीं दिया जा रहा है। सोमवार को महा विकास आघाडी के विधायकों ने हमारे साथ हाथापाई की है। भाजपा विधायकों पर गाली-गलौच करने का आरोप निराधार है। राज्यपाल इसकी रिपोर्ट मंगाए। राज्यपाल से मांग की गई है कि लोकतंत्र का गला घोटने से राज्य सरकार को रोका जाए।  

केंद्र आंकड़े दे तो बच सकता है आरक्षण  

राज्य के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल ने केंद्र सरकार से साल 2011 की जनगणना के दौरान जुटाए गए इंपेरिकल डाटा को केंद्र सरकार से मांगने से जुड़ा प्रस्ताव विधानसभा में पेश किया। उन्होंने दावा किया कि पिछली फडणवीस सरकार ने समय रहते कार्रवाई नहीं साथ ही केंद्र सरकार ने आंकड़े मुहैया नहीं कराए इसके चलते ओबीसी आरक्षण को लेकर मुश्किल खड़ी हुई है। उन्होंने दावा किया कि अगर केंद्र सरकार आंकड़े मुहैया करा दे तो स्थानीय निकायों में राजनीतिक आरक्षण बहाल किया जा सकता है। उन्होंने इससे जुड़ा प्रस्ताव विधानसभा में पेश किया जिसे ध्वनिमत से मंजूर कर लिया गया। विधानसभा में विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस इस मुद्दे पर भुजबल द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब देना चाहते थे। लेकिन वे मामले पर पहले ही बोल चुके थे इसलिए तालिका अध्यक्ष भास्कर जाधव ने इसकी मंजूरी नहीं दी। इससे नाराज भाजपा सदस्यों ने नारेबाजी शुरू कर दी और अध्यक्ष के आसन के सामने पहुंच गए। हंगामे के चलते विधानसभा की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। 

विधानसभा में 19 नेताओं के निधन पर शोक प्रस्ताव 

विधानमंडल मानसून सत्र के पहले दिन 19 नेताओं के निधन पर सोमवार को शोक जताया और पीठासीन अधिकारी भास्कर जाधव ने शोक प्रस्ताव पढ़ा।जिन 19 नेताओं का निधन हुआ है उनमें रावसाहेब अंतापुरकर, राजीव सातव, पूर्व मंत्री संजय देवतले, रामप्रसाद बोराडे, एकनाथ गायकवाड़, गंगाधरराव कुंतूरकर, शंकर नlम, संभाजी पवार और एकनाथराव साल्वे शामिल हैं।अन्य नेताओं में, केशवराव महिंद्रे पाटिल, हरिभाऊ बरकुले, आनंदराव वंजारी, रमाकांत मायेकर, दत्तात्रेय महाजन, प्रकाश दहाके, योगेंद्र भोए, पास्कल धनारे, ज्योति कलानी और लताबाई तांबे शामिल हैं। 
 
 

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