Edible oil prices: खाद्य तेल की बढ़ती कीमतों से चिंता में सरकार, पाम ऑइल की इंपोर्ट ड्यूटी 37.50 फीसदी से 27.50 की

Edible oil prices: खाद्य तेल की बढ़ती कीमतों से चिंता में सरकार, पाम ऑइल की इंपोर्ट ड्यूटी 37.50 फीसदी से 27.50 की

Bhaskar Hindi
Update: 2020-11-26 17:47 GMT
Edible oil prices: खाद्य तेल की बढ़ती कीमतों से चिंता में सरकार, पाम ऑइल की इंपोर्ट ड्यूटी 37.50 फीसदी से 27.50 की
हाईलाइट
  • क्रूड पाम ऑइल की इंपोर्ट ड्यूटी 37.50 फीसदी से घटकर 27.50 फीसदी
  • खाद्य तेल की बढ़ती कीमतें सरकार के लिए चिंता का कारण

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। खाद्य तेल की बढ़ती कीमतें सरकार के लिए चिंता का कारण बन गई हैं। पिछले एक साल में सभी खाद्य तेलों - मूंगफली, सरसों, वनसपती, सोयाबीन, सूरजमुखी और ताड़ के औसत दामों में 20 से 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ऐसे में अब सरकार ने खाने के तेल की महंगाई को काबू में करने के लिए क्रूड पाम ऑइल की इंपोर्ट ड्यूटी 37.50 फीसदी से घटाकर 27.50 फीसदी कर दी है। इंपोर्ट ड्यूटी की नई दर शुक्रवार से लागू होगी। 

बता दें कि इस समय क्रूड पाम तेल पर आयात शुल्क 37.50 फीसदी है, जो जनवरी 2020 से लागू है। इस पर सोशल वेलफेयर सेस यानी सामाजिक कल्याण उपकर 10 फीसदी लगता है। इस प्रकार, वर्तमान में क्रूड पाम तेल पर प्रभावी कर 41.25 फीसदी है, लेकिन 27 नवंबर से 27.50 फीसदी आयात कर और 10 फीसदी सोशल वेलफेयर सेस को जोड़ने के बाद 30.25 कर चुकाना होगा। तेल तिलहन बाजार के जानकार बताते हैं कि क्रूड पाम तेल पर आयात शुल्क घटने से देश में पाम तेल का आयात सस्ता होगा, जिसका असर अन्य खाद्य तेल के दाम पर भी दिखेगा, क्योंकि भारत खाद्य तेलों में सबसे ज्यादा पाम तेल का ही आयात करता है। 

भारत मलेशिया और इंडोनेशिया से पाम तेल का आयात करता है। क्रूड पाम तेल के वायदा भाव पर इसका असर गुरुवार को ही देखने को मिला और सीपीओ के सबसे सक्रिय वायदा अनुबंध में तीन फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। देश के सबसे बड़े वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर गुरुवार को रात 8.42 बजे क्रूड पाम ऑयल यानी सीपीओ के दिसंबर अनुबंध में पिछले सत्र से 33.20 रुपये यानी 3.69 फीसदी की गिरावट के साथ 866 रुपये प्रति 10 किलो पर कारोबार चल रहा था।

वहीं उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के मॉनिटरिंग सेल से प्राप्त आंकड़े बताते हैं कि सरसों के तेल की औसत कीमत 120 रुपए प्रति लीटर है। पिछले साल ये 100 रुपए प्रति लीटर थी। वनस्पती के मामले में एक साल पहले के 75.25 रुपए के मुकाबले कीमतें बढ़कर 102.5 प्रति किलोग्राम हो गई हैं। सोयाबीन तेल का औसत मूल्य 110 प्रति लीटर है, जबकि 2019 में 18 अक्टूबर को औसत मूल्य 90 था। सूरजमुखी और ताड़ के तेल के मामले में भी यही रुझान रहा है।

सूत्रों ने कहा कि मलेशिया में पिछले छह महीनों में पाम तेल उत्पादन में कमी अन्य खाद्य तेलों की कीमतों में वृद्धि के पीछे एक कारण है। देश में लगभग 70% पाल ऑइल का उपयोग प्रोसेस्ड फूड इंडस्ट्रि करती है, जो सबसे बड़े थोक उपभोक्ता है। इंडस्ट्रि के सूत्रों ने कहा कि अब सरकार पर निर्भर करता है कि क्या पाम ऑइल के आयात शुल्क को कम किया जाए, यह देखते हुए कि पाम ऑइल की कीमतों में वृद्धि सीधे अन्य खाद्य तेलों की कीमतों पर प्रभाव डालती है।

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