मंदी की मार के बीच RBI ने सरकार के लिए खोला खजाना, 1.76 लाख होंगे ट्रांसफर

मंदी की मार के बीच RBI ने सरकार के लिए खोला खजाना, 1.76 लाख होंगे ट्रांसफर

Bhaskar Hindi
Update: 2019-08-26 15:57 GMT
मंदी की मार के बीच RBI ने सरकार के लिए खोला खजाना, 1.76 लाख होंगे ट्रांसफर
हाईलाइट
  • RBI ने सोमवार को बिमल जालान पैनल की सिफारिश स्वीकार कर ली है
  • RBI सरकार को 1
  • 76
  • 051 करोड़ रुपये ट्रांसफर करेगी
  • ये फंड चरणबद्ध तरीके से 3 से 5 साल में ट्रांसफर किया जाएगा

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक ने सोमवार को बिमल जालान पैनल की सिफारिश को स्वीकार करते हुए 1,76,051 करोड़ रुपये की राशि सरकार को ट्रांसफर करने का फैसला किया। RBI अपने सरप्लस कैश को चरणबद्ध तरीके से 3 से 5 साल में सरकार को ट्रांसफर करेगा। बता दें कि RBI के इकोनॉमिक कैपिटल फ्रेमवर्क की जांच के लिए बिमल जालान पैनल को नवंबर में स्थापित किया गया था।

आरबीआई ने एक बयान में कहा "केंद्रीय बैंक के बोर्ड ने भारत सरकार को 1,76,051 करोड़ रुपये की राशि ट्रांसफर करने का फैसला किया। इसमें 1,23,414 करोड़ साल 2018-19 का सरप्लस और 52,637 करोड़ बाकी प्रावधानों से आई रकम है। कॉन्टिजेंसी फंड, करेंसी तथा गोल्ड रवैल्यूएशन अकाउंट को मिलाकर आरबीआई के पास 9.2 लाख करोड़ रुपये का रिजर्व है, जो केंद्रीय बैंक के टोटल बैलेंस शीट साइज का 25 फीसदी है।

बिमल जालान पैनल ने 14 अगस्त को सरकार को केंद्रीय बैंक के अतिरिक्त भंडार को ट्रांसफर करने का निर्णय लेने के लिए बैठक की थी। पैनल ने अपने कंपोजिशन में सिर्फ एक बदलाव के साथ अपनी प्रमुख सिफारिशों को बरकरार रखा। वित्त सचिव राजीव कुमार ने एक सदस्य के रूप में सुभाष चंद्र गर्ग की जगह ली।

रिजर्व बैंक की इस समिति के अहम सदस्यों में RBI के फॉर्मर डिप्टी गवर्नर राकेश मोहन को वाइस चेयरमैन बनाया गया था। समिति में वित्त सचिव राजीव कुमार, RBI के डिप्टी गवर्नर एन एस विश्वनाथन और RBI के सेंट्रल बोर्ड के दो मेंबर भरत दोशी और सुधीर मनकड़ भी हैं। घोषित सरप्लस ट्रांसफर से सरकार को अपने कर राजस्व में किसी भी संभावित कमी के आने पर मदद मिलेगी। 

इससे पहले वित्त मंत्रालय के प्रपोजल पर केंद्र और आरबीआई के बीच दरार की खबरें सामने आई थी। इस प्रपोजल में केंद्रीय बैंक के कुल भंडार के एक तिहाई से अधिक 3.6 लाख करोड़ रुपये के सरप्लस को सरकार को ट्रांसफर करने की बात कही गई थी। हालांकि, मंत्रालय ने कहा था कि इस सरप्लस को बैंक और सरकार संयुक्त रूप से संभाल सकते हैं।

इस उबलते मुद्दे के बीच, आरबीआई के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल ने भी व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। पटेल के इस्तीफे के बाद, तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि सरकार ने पटेल से इस्तीफे के लिए नहीं कहा है। जेटली ने कहा था कि RBI के बोर्ड की बैठक के दौरान RBI रिजर्व के मुद्दे पर सरकार और केंद्रीय बैंक के बीच पर चर्चा हुई।

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