कोरोना ने बिछड़ों को मिलाया, सात साल बाद बच्चों से एक साथ मिले माता-पिता

कोरोना ने बिछड़ों को मिलाया, सात साल बाद बच्चों से एक साथ मिले माता-पिता

Bhaskar Hindi
Update: 2020-04-20 09:25 GMT
कोरोना ने बिछड़ों को मिलाया, सात साल बाद बच्चों से एक साथ मिले माता-पिता

डिजिटल डेस्क जबलपुर। कोरोना वायरस से पूरी दुनिया जूझ रही है, इस महामारी से देश में बड़ा संकट छाया हुआ है, लेकिन जबलपुर के पाँच बच्चे ऐसे भी हैं, जिन्हें कोरोना के कारण अपने माता-पिता के साथ घर पर रहने का मौका मिला। सालों बाद एक साथ रह रहे बच्चे और उनके माता-पिता बेहद खुश हैं, लेकिन बच्चों के माता-पिता रोज ये प्रार्थना करते हैं कि भले ही उनकी छुट्टियाँ जल्दी खत्म हो जाएँ और जीवन जेल में कटे लेकिन जल्द से जल्द कोरोना का संकट देश-दुनिया से खत्म हो जाए ताकि कोई अपनों से जीवन भर के लिए दूर न हो। दरअसल जबलपुर के गौर क्षेत्र में रहने वाले अमर चौधरी के छोटे भाई की पत्नी की वर्ष 2014 में आग से जलने के कारण मौत हो गई थी। जिसके आरोप में अमर, उसकी पत्नी उषा, मंझले भाई इमरत उसकी पत्नी निशा और माँ-बहनों के खिलाफ छोटे भाई के ससुराल वालों ने दहेज हत्या का आरोप लगाया था। इस वजह से सभी लोगों को पुलिस ने धारा 304बी के तहत गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। 
बड़े बेटे ने बूट पॉलिस करके छोटे भाई-बहनों की परवरिश की 
परिवार के सभी सदस्यों के जेल जाने के बाद अपनी दो छोटी बहनों के साथ ही चचेरी दो बहनों की परवरिश की जिम्मेदारी अमर के बड़े बेटे राहुल पर आ गई। उस समय राहुल की उम्र महज 12 वर्ष थी, लेकिन राहुल ने हिम्मत नहीं हारी और अपने पिता की बूट पॉलिश की दुकान में बूट पॉलिश कर भाई-बहनों की परवरिश शुरू कर दी। इसके अलावा राहुल जेल में बंद अपने माता-पिता, चाचा-चाची और बुआ-दादी की भी सभी जरूरतों को पूरा करता रहा। राहुल की परेशानी उजागर होने पर तत्कालीन कलेक्टर एसएन रूपला ने राहुल और उसके भाई-बहनों को बालिग होने तक चाइल्ड हैल्प फंड से 2-2 हजार रुपए की मासिक मदद शुरू कर दी थी। दो साल तक न्यायालीन प्रक्रिया के बाद राहुल के परिवार के सभी लोगों को न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुना दी। जिसके बाद से वे लोग जबलपुर सेन्ट्रल जेल में बंद हैं। 
सात साल बाद एक साथ घर पर मिला परिवार 
 पिछले सात सालों में जेल में बंद चौधरी परिवार के सदस्यों को पैरोल अवकाश मिलता और हर बार किसी एक को घर पहुँचने का मौका मिलता था। लेकिन हाल ही में कोरोना संकट के चलते जेल में बंद बंदियों को दो माह के पैरोल अवकाश पर उनके घर भेज दिया गया और इस तरह सात साल बाद राहुल का पूरा परिवार एक साथ मिला।

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