गाँव के कमरे से डिजिटल दुनिया तक: कृष्णा और कौशिक की दोस्ती से जन्मा इंडिया हुड

कृष्णा और कौशिक की दोस्ती से जन्मा इंडिया हुड
आज, तीन साल बाद, इंडिया हुड हर महीने 50 लाख से ज़्यादा पाठकों तक पहुँच रहा है। पुश नोटिफिकेशन, ईमेल और व्हाट्सऐप पर इसके 10 लाख से अधिक सब्सक्राइबर हैं।

नई दिल्ली, अगस्त 26: कहते हैं कि बड़े सपनों को पूरा करने के लिए हमेशा बड़े शहरों या बड़े साधनों की ज़रूरत नहीं होती। कभी-कभी एक छोटे से गाँव के कमरे और दो दोस्तों की मेहनत भी लाखों लोगों तक पहुँचने वाली कहानी बना सकती है। यही कहानी है कृष्ण चंद्र गराई और कौशिक दत्ता की, जो पहली बार 2017 में फेसबुक पर मिले थे और 2022 में सिर्फ़ लैपटॉप और एक साधारण इंटरनेट कनेक्शन के साथ उन्होंने शुरुआत की इंडिया हुड ( India Hood ) की।

आज, तीन साल बाद, इंडिया हुड हर महीने 50 लाख से ज़्यादा पाठकों तक पहुँच रहा है। पुश नोटिफिकेशन, ईमेल और व्हाट्सऐप पर इसके 10 लाख से अधिक सब्सक्राइबर हैं। यही नहीं, अब यह सिर्फ़ दो दोस्तों का प्रोजेक्ट नहीं बल्कि 20 लोगों की टीम और Hoodgen Pvt Ltd नामक कंपनी का रूप ले चुका है।

इंडिया हुड के दो प्लेटफ़ॉर्म

इंडिया हुड की सबसे बड़ी ताक़त इसकी डुअल पहचान है। Indiahood.in एक Bangla khabar पोर्टल है, जो पश्चिम बंगाल के हर ज़िले और गाँव की ज़मीनी खबरों पर फोकस करता है। यहाँ पाठकों को मौसम पूर्वानुमान, सरकारी योजनाओं की जानकारी, स्थानीय नौकरी की सूचनाएँ और सांस्कृतिक आयोजनों की रिपोर्टिंग मिलती है।

दूसरी ओर, Indiahood.com अंग्रेज़ी भाषा का प्लेटफ़ॉर्म है, जो राष्ट्रीय स्तर की ख़बरों को कवर करता है। इसमें स्टार्टअप्स की कहानियाँ, बिज़नेस ट्रेंड्स, फ़ाइनेंशियल इनसाइट्स और देशभर की महत्वपूर्ण अपडेट्स शामिल होती हैं। इस तरह इंडिया हुड एक साथ दो अलग-अलग ऑडियंस को जोड़ता है — एक ओर गाँव-कस्बों के पाठक जिन्हें अपने आसपास की ज़रूरी खबरें चाहिए, और दूसरी ओर शहरों व बड़े बाज़ारों के पाठक जो देश-दुनिया की आर्थिक और व्यावसायिक हलचल जानना चाहते हैं।

दोस्ती से निकला आइडिया

कृष्णा और कौशिक भले ही अलग-अलग जगह से आते हों, लेकिन उनका विज़न एक था— ज़मीनी पत्रकारिता को मज़बूत बनाना। दोनों मानते हैं कि अगर खबर सच में ज़रूरी है, तो उसे हर गली और हर गाँव तक पहुँचना चाहिए।

खासियत जो अलग बनाती है

इंडिया हुड बाकी पोर्टल्स की तरह सिर्फ़ ब्रेकिंग या सनसनीखेज़ खबरों के पीछे नहीं भागता। यह वही खबरें देता है जो लोगों के लिए ज़रूरी होती हैं — चाहे वो सरकारी योजना हो, नौकरी की सूचना, मौसम अपडेट या फिर किसी कस्बे का सांस्कृतिक आयोजन। यही वजह है कि इंडिया हुड की टैगलाइन है: “जो खबर आपके लिए ज़रूरी।”

चुनौतियों से आगे

शुरुआत आसान नहीं थी। फंडिंग नहीं थी, इंटरनेट स्लो था और हर खबर को लिखने, एडिट करने और पब्लिश करने का काम दोनों को खुद करना पड़ता था। लेकिन मेहनत और भरोसे ने धीरे-धीरे दर्शकों का दिल जीत लिया।

आगे का लक्ष्य

कृष्णा और कौशिक का सपना सिर्फ़ न्यूज़ पोर्टल चलाना नहीं है। उनका लक्ष्य है कि आने वाले समय में इंडिया हुड को पश्चिम बंगाल के हर गली, हर ज़िला और हर गाँव तक पहुँचाया जाए।

साथ ही, वे चाहते हैं कि 100 से ज़्यादा स्थानीय रिपोर्टर्स और राइटर्स को नौकरी दी जाए, ताकि असली ज़मीनी पत्रकारिता को और मज़बूती मिल सके।

नतीजा

गाँव से शुरू हुई यह यात्रा हमें याद दिलाती है कि बड़ा बनने के लिए हमेशा बड़े निवेश या संसाधनों की ज़रूरत नहीं होती। कभी-कभी बस दोस्ती, मेहनत और विश्वास ही काफी होते हैं, और यही है इंडिया हुड की असली कहानी।

Created On :   29 Aug 2025 5:09 PM IST

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