comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

चीन और 14 एशियाई देशों ने किया दुनिया का सबसे बड़ा व्यापार करार

November 15th, 2020 17:30 IST
 चीन और 14 एशियाई देशों ने किया दुनिया का सबसे बड़ा व्यापार करार

हाईलाइट

  • चीन और 14 एशियाई देशों ने किया दुनिया का सबसे बड़ा व्यापार करार

नई दिल्ली, 15 नवंबर (आईएएनएस)। चीन और 14 अन्य एशियाई देशों ने दुनिया के सबसे बड़े मुक्त व्यापार ब्लॉक बनाने पर सहमति व्यक्त की है जो कुल वैश्विक व्यापार का एक तिहाई हिस्सा है।

क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) के वार्षिक शिखर सम्मेलन में रविवार को करार पर हस्ताक्षर हुए। ये ब्लॉक 10 दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों समूह (आसियान) से बना है।

सम्मेलन के मेजबान वियतनाम के प्रधानमंत्री गुयेन जुआन फुच ने कहा, आरसीईपी पर जल्द ही सभी देश हस्ताक्षर कर देंगे, जिसके बाद ये प्रभावी हो जाएगा और कोविड-19 महामारी के बाद अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में काफी सहायक साबित होगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि आरईसीपी अपने सदस्य देशों के बीच व्यापार शुल्क कम करेगा। वियतनाम के अनुसार, आरसीईपी वैश्विक अर्थव्यवस्था का 30 प्रतिशत, वैश्विक आबादी का 30 प्रतिशत और 220 करोड़ उपभोक्ताओं तक पहुंच जाएगा।

10 आसियान देशों के अलावा, समझौते में चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड भी शामिल हैं, लेकिन अमेरिका नहीं।

अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के लिए यह समझौता अभी भी खुला है। भारत इस ट्रेडिंग ब्लॉक से घरेलू विरोध के चलते पिछले साल बाहर आ चुका है।

कैपिटल इकोनॉमिक्स के वरिष्ठ एशियाई अर्थशास्त्री गैरेथ लेदर ने एक रिपोर्ट में कहा कि यह समझौता चीन के लिए काफी महत्वपूर्ण है, जो 130 करोड़ से अधिक लोगों के साथ इस क्षेत्र का सबसे बड़ा बाजार है। यह समझौता बीजिंग को वैश्वीकरण और बहुपक्षीय सहयोग के चैंपियन के रूप में भूमिका अदा करने की अनुमति देता है और क्षेत्रीय व्यापार को नियंत्रित करने वाले नियमों पर भी अधिक प्रभाव देता है।

अल जजीरा ने कहा कि अमेरिका आरसीईपी और 11 राष्ट्रों के ट्रांस-पैसिफिक पार्टनरशिप (टीपीपी) में भी नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पद ग्रहण करने के कुछ समय बाद ही इससे अपने आपको अलग कर लिया था। यह दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को दो बड़े व्यापार समूहों से बाहर रखता है जो काफी तेजी से बढ़ रहा है।

एसकेपी/एसजीके

कमेंट करें
1xfTE
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।