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जेट एयरवेज के ऑफिस को HDFC करेगा नीलाम, नहीं चुकाए 414 करोड़ रुपए

जेट एयरवेज के ऑफिस को HDFC करेगा नीलाम, नहीं चुकाए 414 करोड़ रुपए

हाईलाइट

  • संकटग्रस्त जेट एयरवेज के ऑपरेशन बंद होने के बाद अब उसका कार्यालय नीलाम किया जा रहा है
  • मोर्टगेज लेंडर एचडीएफसी ने बकाया राशि की वसूली के लिए जेट के ऑफिस को नीलाम कर रहा है
  • जेट एयरवेज कार्यालय को 245 करोड़ रुपये के आरक्षित मूल्य के साथ बिक्री के लिए HDFC ने रखा है

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। संकटग्रस्त जेट एयरवेज के ऑपरेशन बंद होने के बाद अब उसका कार्यालय नीलाम किया जा रहा है। मोर्टगेज लेंडर एचडीएफसी ने बकाया राशि की वसूली के प्रयासों के तहत जेट एयरवेज कार्यालय को 245 करोड़ रुपये के आरक्षित मूल्य के साथ बिक्री के लिए रखा है। जेट एयरवेज, जिसने 17 अप्रैल को अपने ऑपरेशन बंद कर दिए थे, का एचडीएफसी पर लगभग 414 करोड़ रुपये बकाया है।

एक सार्वजनिक नोटिस में कहा गया है, 'उधारकर्ता (जेट एयरवेज) एचडीएफसी लिमिटेड की 414.80 करोड़ रुपये चुकाने में विफल रहा है। इसीलिए, एचडीएफसी लिमिटेड के पास जेट के ऑफिस को नीलाम कर वसूली करने का हकदार बन गया है।' मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) में 52,775 वर्ग फुट कारपेट एरिया में फैला जेट का कार्यालय चौथी मंजिल पर है। सार्वजनिक सूचना के अनुसार, 245 करोड़ रुपये के आरक्षित मूल्य के साथ कार्यालय की ई-नीलामी 15 मई को निर्धारित है।

बता दें कि एयरलाइन जिसके बेड़े में 120 से अधिक विमान थे वित्तीय संकट से जूझ रहा है। फुल सर्विस कैरियर ने कर्मचारियों को वेतन सहित विभिन्न भुगतान नहीं किए हैं। रिजॉल्यूशन के तहत, भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम ऑफ डोमेस्टिक लेंडर्स ने एयरलाइन में हिस्सेदारी बिक्री के लिए बोलियां मांगी हैं। जेट एयरवेज में हिस्सेदारी लेने में रुचि दिखाने के लिए चार एनटाइटीज - एतिहाद एयरवेज, टीपीजी कैपिटल, इंडिगो पार्टनर्स और नेशनल इंवेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (एनआईआईएफ) ने रुचि दिखाई है। शुक्रवार को बोली लगाने वालों का विवरण ज्ञात होने की उम्मीद है।

इस सप्ताह की शुरुआत में, जेट एयरवेज के पायलटों के एक समूह ने ऑपरेशन को फिर से शुरू करने के लिए एश्योर्ड इंटरिम फाइनेंस प्रदान करने के लिए एसबीआई को निर्देश देने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। नेशनल एविएटर्स गिल्ड की ओर से दायर याचिका में जेट एयरवेज के स्लॉट को स्थायी आधार पर अन्य एयरलाइंस को न देने के लिए केंद्र और नागरिक उड्डयन महानिदेशक (DGCA) को निर्देश देने की भी मांग की गई है।

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