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बजट में बढ़ा फ्यूल टैक्स, पेट्रोल 2.5 रुपए और डीजल 2.3 रुपए प्रति लीटर होगा महंगा


हाईलाइट

  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को अपना पहला बजट पेश किया
  • बजट में फ्यूल पर टैक्स बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है
  • इससे पेट्रोल के दामों में 2.5 और डीजल पर 2.3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी होगी

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में अपना पहला बजट पेश किया। बजट प्रस्तावों के प्रभावी होने के बाद टैक्स में बढ़ोतरी के चलते कई चीजों की कीमत बढ़ जाएगी जबकि कई की घटेगी भी। बजट में फ्यूल पर टैक्स बढ़ने के चलते पेट्रोल के दामों में 2.5 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 2.3 रुपये प्रति लीटर से अधिक की बढ़ोतरी होगी।

सीतारमण ने ऑटो फ्यूल पर एक्साइज ड्यूटी और रोड एंड इंफ्रास्ट्रकचर सेस 2 रुपये प्रति लीटर बढ़ाया है। इससे 28,000 करोड़ रुपये से अधिक जुटाए जाएंगे। स्थानीय बिक्री कर या वैल्यू ऐडेड टैक्स (VAT), जो बेस प्राइस पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क जोड़ने के बाद लगाया जाता है, को जोड़ने के बाद पेट्रोल की कीमत में 2.5 रुपये प्रति लीटर से अधिक और डीजल में 2.3 रुपये का इजाफा होगा।

शुक्रवार को दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 70.51 रुपये और मुंबई में 76.15 रुपये है। डीजल की कीमत दिल्ली में 64.33 रुपये प्रति लीटर और मुंबई में 67.40 रुपये प्रति लीटर है।

इसके अलावा, वित्त मंत्री ने क्रूड ऑइल पर 1 रुपए प्रति टन सीमा शुल्क या आयात शुल्क लगाया है। भारत 220 मिलियन टन से अधिक क्रूड आइल का आयात करता है और नया शुल्क सरकार को 22 करोड़ रुपये अतिरिक्त देगा। वर्तमान में, सरकार क्रूड आइल पर कोई सीमा शुल्क नहीं लगाती है। केवल 50 रुपये प्रति टन राष्ट्रीय आपदा आकस्मिक शुल्क (NCCD) लिया जाता है।

सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा, 'क्रूड की कीमतें अपने उच्च स्तर से नरम हो गई हैं। इससे पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क और उपकर की समीक्षा करने का मौका मिला है। मैं पेट्रोल और डीजल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क और सड़क और बुनियादी ढांचा उपकर 2 रुपये प्रति लीटर बढ़ाने का प्रस्ताव रखती हूं।'

पेट्रोल पर वर्तमान में कुल उत्पाद शुल्क 17.98 रुपये प्रति लीटर (2.98 रुपये मूल उत्पाद शुल्क, 7 रुपये विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क और 8 रुपये सड़क और बुनियादी ढांचा उपकर) लगता है। जबकि डीजल पर कुल 13.83 रुपये प्रति लीटर उत्पाद शुल्क लगता है (4.83 रुपे मूल उत्पाद शुल्क, 1 रुपए विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क और 8 रुपए सड़क और बुनियादी ढांचा उपकर)।

इनके ऊपर वैट लगाया जाता है जो अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग होता है। दिल्ली में, पेट्रोल पर वैट  27 प्रतिशत और डीजल पर 16.75 प्रतिशत की दर से लगाया जाता है। मुंबई में, पेट्रोल पर वैट 26 प्रतिशत और 7.12 रुपये प्रति लीटर अतिरिक्त कर लगता है, जबकि डीजल 24 प्रतिशत सेल्स टैक्स लगता है।

पेट्रोल और डीजल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाने के बाद हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। आईओसी 2.84 प्रतिशत की गिरावट के साथ 152.10 रुपये पर बंद हुआ, एचपीसीएल 0.71 प्रतिशत गिरकर 286.60 रुपये पर और बीपीसीएल 2.80 प्रतिशत की गिरावट के साथ एनएसई पर 369.35 रुपये पर बंद हुआ।

इस बजट के बाद जिन उत्पादों की कीमतें घटेंगी उनमें:

उत्‍पाद
नाफ्था   
प्रोप‍िलीन ऑक्‍साइड
ऊनी धागे, ऊन के गुच्‍छे
कोल्‍ड रोल्‍ड स्‍टील कॉयल
हॉट रोल्‍ड कॉयल
सेल्‍यूलर मोबाइल फोन के लिए कैमरा मॉडयूल
सेल्‍यूलर मोबाइल फोन का चार्जर/एडेप्‍टर
लिथियम ऑयन सेल
डिस्‍प्‍ले मॉडयूल
सेट टॉप बॉक्‍स
काम्‍पैक्‍ट कैमरा मॉड्यूल


जिन उत्पादों की कीमतें बढ़ेंगी उनमें:

उत्‍पाद
टूटे हुए काजू गिरी 
काजू गिरी
तेल रसायन और साबुन बनाने में उपयोग होने वाले जैतून ऐसटिरिन
प्‍लास्टिक का फ्लोर कवर, प्‍लास्टिक वॉल अथव सीलिंग कवर
प्‍लास्टिक की वस्‍तुएं
बुटाइल रबर
अखबारी कागज
समाचार पत्र की छपाई के लिए उपयोग किया जाने वाला बिना लेप किया गया कागज
मुद्रित पुस्‍तकें
ऑप्टिकल फाइबर केबल का निर्माण करने के लिए पानी को रोकने वाले टेप
सेरैमिक रूफ‍िंग टाइलें और सेरैमिक फ्लैग्‍स और खड़जा, भट्टियां  वॉल टाइल्‍स आदि
स्‍टेनलेस स्‍टील के उत्‍पाद
अन्‍य अयस्‍क इस्‍पात
फ‍िटिंग्‍स, फ्रेम और समान वस्‍तुएं जो फर्नीचर, दरवाजों, सीढि़यों, खिडिकियों, ऑटो मोबाइल के लिए हिंज
स्पिलट एयर कंडिशनर के इनडोर और आउटडोर यूनिट
सड़क निर्माण के लिए स्‍टोन क्रशिंग संयंत्र तोड़ने वाला
सीसीटीवी कैमरा/आईपी कैमरा और डीवीआर/एनवीआर का चार्जर पावर एडेप्‍टर
लाउडस्‍पीकर
डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर और नेटवर्क वीडियो रिकॉर्डर
सीसीटीवी कैमरा और आईपी कैमरा
ऑप्टिकल फाइबर, ऑप्टिकल फाइबर बंडल और केबल
मोटर वाहनों के रियर-व्‍यू मिरर सहित कांच के आइने
मोटर वाहनों में उपयोग किए जाने वाले तालें
मोटर वाहन के कैटालिस्‍ट कन्‍वर्टर
आंतरिक दहन इंजनों के लिए पेर्टोल फ‍िल्‍टर
आंतरिक दहन इंजनों के लिए इन्‍टेक एयर फ‍िल्‍टर
वाहन के हॉर्न
मार्बल की पट्टियां
इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स सामान जैसे स्‍वीच, सॉकेट, प्‍लग, कनेक्‍टर्स रिले आदि
चांदी बिना गढ़ी या अर्द्धनिर्मित अवस्‍था या चूर्ण अवस्‍था में
चांदी डोर बार
आधारभूत चांदी मढी हुई
सोना बिना गढ़ी या अर्धनिर्मित अवस्‍था अथवा चूर्ण अवस्‍था में
स्‍वर्ण डोर बार
प्‍लेटिनम बिना गढ़ा अथवा अर्धनिर्मित अवस्‍था
पात्र यात्री द्वारा सामान के रूप में आयातित सोना और चांदी
पेट्रोल व डीजल पर सड़क और अवसंरचना उपकर
सभी तरह की सिगरेट
अन्‍य सिगरेट
अन्‍य पीने वाला तंबाकू
चबाने वाला तंबाकू
जर्दे की खुशबू वाला तंबाकू
कच्‍चा पेट्रोलियम
पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्‍त उत्‍पाद शुल्‍क
डीजल पर विशेष अतिरिक्‍त उत्‍पाद शुल्‍क
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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।