Amravati News: जिला प्रशासन के काफिलों में एक भी ई-वाहन नहीं, अफसर अब भी फूंक रहे ईंधन

  • सरकार का ई-व्हीकल का आदेश हवा में
  • अमरावती प्रशासन अब भी डीजल-पेट्रोल पर निर्भर
  • पर्यावरण को बचाने की बातें तो हो रहीं लेकिन अमल कब?

Amravati News ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते युद्ध जैसे हालातों के चलते ईंधन बचत को लेकर सरकार ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। राज्य के मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बुधवार को जारी सर्कुलर में सभी सरकारी विभागों को इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को अनिवार्य करने तथा पेट्रोल-डीजल वाहनों का उपयोग कम करने के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद अमरावती जिले का प्रशासनिक अमला अब भी पारंपरिक ईंधन आधारित वाहनों पर ही निर्भर बना हुआ है। क्योंकि समूचा महकमा इलेक्ट्रिक व्हीकल से अछूता है।

जिले के किसी बड़े विभाग में नहीं : हैरानी की बात यह है कि संभागीय राजस्व आयुक्तालय, जिलाधिकारी कार्यालय, जिला परिषद, महानगरपालिका, नगरपालिकाएं और तहसील कार्यालय जैसे प्रमुख सरकारी विभागों के काफिलों में आज तक एक भी इलेक्ट्रिक वाहन शामिल नहीं हो पाया है। संभागीय आयुक्त, कलेक्टर, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, मनपा आयुक्त तथा पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी अब भी डीजल और पेट्रोल से चलने वाले वाहनों का उपयोग कर रहे हैं।

चुनाव बाद किराए की गाड़ियां, लेकिन ई-वाहन गायब : अमरावती महानगरपालिका ने हाल ही में संपन्न हुए आम चुनाव के बाद पदाधिकारियों की सेवा में किराए के वाहन लगाए हैं, लेकिन इनमें भी एक भी इलेक्ट्रिक वाहन शामिल नहीं है। विशेष बात यह है कि मनपा के राजापेठ जोन कार्यालय परिसर में ई-वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन भी स्थापित किया गया है, जिसका लाभ फिलहाल बाहरी लोग उठा रहे हैं।

‘हरित ऊर्जा’ के दावों पर उठने लगे सवाल - केंद्र और राज्य सरकार लगातार पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए ई-वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहित कर रही हैं। ई-वाहनों पर सब्सिडी, चार्जिंग स्टेशन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर अपेक्षित पहल नजर नहीं आ रही। इससे पर्यावरण संरक्षण के दावों पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।

प्रशासन पहले खुद उदाहरण पेश करे : पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब आम नागरिकों को ई-वाहनों के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है, तब प्रशासन को स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। उनका मानना है कि यदि जिला प्रशासन अपने काफिलों में इलेक्ट्रिक वाहनों को शामिल करता है, तो इससे हरित ऊर्जा अभियान को नई गति मिलेगी और जनता में सकारात्मक संदेश जाएगा।

उत्पादन शुल्क विभाग की स्थिति और भी चौंकाने वाली : इस बीच एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। राज्य सरकार की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले उत्पादन शुल्क विभाग के अधीक्षक को न केवल इलेक्ट्रिक वाहन, बल्कि पेट्रोल-डीजल आधारित चारपहिया वाहन की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। इस संबंध में संपर्क करने पर एक्साइज विभाग के एसपी शशीकांत गरजे ने इसकी पुष्टि की।

कार्यालय से कुछ कदम दूर बंगले, फिर भी वाहन का उपयोग :एक ओर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों द्वारा ईंधन बचत के लिए काफिलों में वाहनों के उपयोग पर नियंत्रण और ई-वाहनों के उपयोग का आह्वान किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर संभागीय आयुक्त, जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त और पुलिस अधीक्षक जैसे वरिष्ठ अधिकारियों के बंगले उनके कार्यालयों से बेहद कम दूरी पर होने के बावजूद वे पेट्रोल-डीजल से चलने वाले सरकारी वाहनों का उपयोग कर रहे हैं। इसे लेकर प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

Created On :   15 May 2026 3:01 PM IST

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