Amravati News: डफरिन में तीन नवजातों की मौत मामला ,तीन रेड सिग्नल के बाद भी एनआईसीयू के बाहर सोती रहीं दो नर्सें

डफरिन  में तीन नवजातों की मौत मामला ,तीन रेड सिग्नल के बाद भी एनआईसीयू के बाहर सोती रहीं दो नर्सें
  • सीसीटीवी फुटेज सामने रख पूर्व पालकमंत्री डॉ. सुनील देशमुख ने सरकारी जांच पर उठाए सवाल
  • चौथी बार लाल संकेत मिलने पर जागीं नर्सें, दरवाजा खोलते ही एनआईसीयू में हुआ जोरदार विस्फोट
  • तीन नवजातों की मौत के बाद पांच अधिकारी निलंबित, सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदारी पर फिर उठे सवाल

डफरिन अस्पताल के एनआईसीयू में 24 अगस्त की रात तीन नवजातों की मौत के बाद अब सरकारी जांच रिपोर्ट ही सवालों के घेरे में आ गई है। पूर्व पालकमंत्री व कांग्रेस नेता डॉ. सुनील देशमुख ने बुधवार को हादसे की रात का 4 मिनट 22 सेकंड का सीसीटीवी फुटेज और 30 पन्नों की जांच रिपोर्ट मीडिया के सामने रखकर पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। उनके अनुसार, विस्फोट से पहले एनआईसीयू से लगातार तीन बार रेड सिग्नल मिले। लाल चेतावनी रोशनी बाहर की दीवार तक दिखाई देती रही, लेकिन एनआईसीयू के बाहर बरामदे में मौजूद दो नर्सें नहीं जागीं। चौथी बार संकेत मिलने पर नर्सें उठीं, दरवाजा खोला और इसी दौरान भीतर जोरदार विस्फोट हो गया।

कांग्रेस नेता डॉ. सुनील देशमुख के अनुसार, चौथी बार लाल संकेत मिलने पर एक नर्स की नींद खुली। उसने दूसरी नर्स को जगाया। दोनों ने एनआईसीयू का दरवाजा खोला और उसी दौरान भीतर जोरदार विस्फोट हुआ। देखते ही देखते कमरे में धुआं भर गया। हादसे में तीन नवजातों की मौत हुई। मीडिया को उपलब्ध कराए गए सीसीटीवी फुटेज में घटनाक्रम का यह पूरा दृश्य देखा जा सकता है।

देशमुख ने सवाल उठाया कि जब खतरे के संकेत लगातार मिल रहे थे, तब नवजातों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार निगरानी व्यवस्था कहां थी? प्रारंभिक रिपोर्टों में आग को वेंटिलेटर में हुए विस्फोट से जोड़ा गया था। हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदारी को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

निगरानी व्यवस्था पर सीधा सवाल

डॉ. देशमुख ने निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस समय एनआईसीयू में नवजातों की जिंदगी खतरे में थी, उस समय स्टाफ नर्स भीतर क्यों मौजूद नहीं थी? यदि लगातार रेड सिग्नल मिल रहे थे तो उन्हें किसने देखा, किसने नजरअंदाज किया और समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई? सबसे अहम सवाल यह भी है कि सीसीटीवी में दिख रहे इस घटनाक्रम को जांच के दायरे से बाहर क्यों रखा गया?

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी घटना का स्वत: संज्ञान लेकर महाराष्ट्र के मुख्य सचिव से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी।

9 सितंबर को पांच अधिकारी निलंबित

सरकार ने जांच रिपोर्ट के आधार पर 9 सितंबर को अकोला उपसंचालक डॉ. सुशीलकुमार वाघचौरे, वैद्यकीय अधीक्षक डॉ. विनोद पवार, अतिरिक्त शल्यचिकित्सक डॉ. अरुण सालुंखे, डफरिन के प्रशासकीय अधिकारी संदीप तारगे और विद्युत कर्मी गोकुल राठोड़ को निलंबित किया। जांच में वेंटिलेटर के रखरखाव में देरी, अग्नि अलार्म व स्प्रिंकलर व्यवस्था में खामियां और फायर पंप हाउस बंद होने जैसी कमियां दर्ज की गईं। कुछ एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई और उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया के निर्देश भी दिए गए।

जिम्मेदारों को बचाकर निर्दोषों पर कार्रवाई का आरोप

पूर्व पालकमंत्री ने सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि ‘चोर को छोड़कर संन्यासी को फांसी देने’ जैसी स्थिति बनाई जा रही है।

उनका कहना है कि अस्पताल के अधिकारियों पर कार्रवाई से मामला खत्म नहीं होता। भवन निर्माण, विद्युत व्यवस्था, अग्निसुरक्षा, चिकित्सा उपकरणों के रखरखाव और ठेका प्रक्रिया हर स्तर पर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

सीसीटीवी ने खड़े किए नए सवाल

सार्वजनिक किए गए फुटेज में रेड सिग्नल, नर्सों की मौजूदगी और विस्फोट से ठीक पहले की गतिविधियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। देशमुख ने मांग की कि फुटेज को जांच का हिस्सा बनाकर घटनाक्रम का स्वतंत्र परीक्षण किया जाए। उनका कहना है कि यदि जांच के दौरान यह महत्वपूर्ण दृश्य उपलब्ध नहीं था तो अब इसे नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा।

Created On :   1 Oct 2026 1:00 PM IST

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