बड़ामलहरा न्यूज: तीर्थधाम सिद्धायतन में कलश स्थापना के साथ दशलक्षण विधान का हुआ शुभारंभ

तीर्थधाम सिद्धायतन में कलश स्थापना के साथ दशलक्षण विधान का हुआ शुभारंभ
दो विद्वानों के प्रवचनों से हुआ स्वाध्याय

डिजिटल डेस्क बड़ामलहरा/जैन धर्मावलंबियों के दशलक्षण महापर्व का बुधवार से आरंभ हो गया इस अवसर दशलक्षण विधान का भी शुभारंभ हो गया है। प्रातः काल जिनेन्द्र अभिषेक पूजन का विधान का आयोजन हुआ जिसमें प्रथम दिवस उत्तम क्षमा धर्म की पूजन पं पंकज जैन शास्त्री बमनी एवं पं रोहित शास्त्री सिद्धायतन ने सुमधुर स्वरों में सम्पन्न कराया। कार्यक्रम में उदयपुर, ग्वालियर,कोटा, इन्दौर, रहली, पथरिया और स्थानीय लोग आवासीय रहकर आत्म आराधन में संलग्न है। पूजन विधान उपरांत कोटा से पधारे विद्वान पं जयकुमार जी साधर्मी जनों को स्वाध्याय कराते हुए प्रवचन में कहा कि प्रत्येक द्रव्य की परिणति एक समय की होती है। मेरी पर्याय ज्ञान - दर्शन से सहित है ऐसा विचार करना चाहिए। क्रिया की शुद्धि व भावों की विशुद्धि की पूजा है। आठ कर्मो का नाश करना है इसलिए अष्ट द्रव्यों से पूजन करते हैं प्रत्येक द्रव्य का परिणमन अपने आधार से होता है। अष्ट द्रव्यों से पूजन - आठ कर्मों के नाश हेतु शुद्धाम्नाय में कहा है कि - हम द्रव्य भगवान को नहीं चढ़ाते, हम तो अपने भावों की पंक्ति चढ़ाते हैं। प्रत्येक द्रव्य एक कर्म के नाश का प्रतीक है और अपनी आत्मा में उस गुण को प्रगट करने का पुरुषार्थ है। दोपहर के वक्त बीना से पधारे पं गुलाबचंद्र जी ने आर्चाय कुंदकुंद के समयसार ग्रंथ पर सार गर्भित व्याख्यान दिया। संध्याकालीन जिनेन्द्र भक्ति सिद्धायतन के छात्रों द्वारा की गई तथा गुरुदेव श्री कानजीस्वामी के छहढ़ाला पर सीडी प्रवचनों का लाभ साधर्मीजनों ने लिया। विधान शुभारंभ अवसर पर जतिन जैन प्रशंसा जैन परिवार द्वारा कलश स्थापना की गई।


Created On :   16 Sept 2026 7:42 PM IST

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