विशेष मकोका अदालत: संतोष देशमुख हत्याकांड मामले में डिजिटल सबूतों पर हुई बहस, 1 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

संतोष देशमुख हत्याकांड मामले में डिजिटल सबूतों पर हुई बहस, 1 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
  • देशमुख हत्याकांड की सुनवाई बीड की विशेष मकोका अदालत में जारी
  • पेन ड्राइव में मौजूद डिजिटल सबूतों की प्रतिलिपि (कॉपी) बचाव पक्ष को उपलब्ध कराने की मांग पर बहस हुई

Beed News. सरपंच संतोष देशमुख हत्याकांड की सुनवाई बीड की विशेष मकोका अदालत में जारी है। मंगलवार (25 अगस्त) को हुई सुनवाई में मुख्य रूप से पेन ड्राइव में मौजूद डिजिटल सबूतों की प्रतिलिपि (कॉपी) बचाव पक्ष को उपलब्ध कराने की मांग पर बहस हुई। इस मुद्दे पर आगे की कार्यवाही के लिए अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 1 सितंबर 2026 तय की है। सुनवाई के दौरान आरोपियों के वकीलों ने जांच के दौरान जब्त की गई पेन ड्राइव में मौजूद डिजिटल सबूतों की कॉपी उपलब्ध कराने की मांग की। डिजिटल साक्ष्यों से संबंधित दस्तावेज और जानकारी बचाव पक्ष को उपलब्ध कराने के मुद्दे पर अदालत में विस्तृत बहस हुई। इसके कारण मुख्य मुकदमे में साक्ष्य और गवाहों की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।

यह मामला सरपंच संतोष देशमुख की हत्या से जुड़ा है, जिसमें वाल्मिक कराड सहित अन्य आरोपियों पर हत्या, अपहरण, रंगदारी और संगठित अपराध से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अदालत पहले ही आरोप तय कर चुकी है, जबकि सभी आरोपियों ने इन आरोपों से इनकार किया है।

पुलिस जांच में बड़ी मात्रा में डिजिटल सबूत एकत्र किए गए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार आरोपियों के मोबाइल फोन से हत्या से जुड़े 15 वीडियो, 8 फोटो, कॉल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डेटा बरामद हुए हैं, जिन्हें इस मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है।

बचाव पक्ष का कहना है कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए डिजिटल साक्ष्यों की पूरी प्रतिलिपि उन्हें उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इससे पहले भी जब्त किए गए लैपटॉप की क्लोन कॉपी देने की मांग की गई थी। बचाव पक्ष का आरोप है कि सरकारी पक्ष केवल अपने पक्ष के अनुकूल डिजिटल डेटा ही प्रस्तुत कर रहा है।

बचाव पक्ष का यह भी तर्क है कि जांच में जब्त किए गए लैपटॉप, पेन ड्राइव और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का पूरा डेटा देखने का अधिकार आरोपियों को है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी प्रकार की जानकारी छिपाई नहीं गई है। उन्होंने आवश्यकता पड़ने पर अदालत द्वारा भी पूरे डिजिटल डेटा की जांच कराने की मांग की है।

इससे पहले विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने अदालत में आरोप लगाया था कि आरोपी पक्ष लगातार नए आवेदन देकर मुकदमे की सुनवाई को लंबा खींचने का प्रयास कर रहा है। उनका कहना था कि सभी आवश्यक दस्तावेज और सबूत उपलब्ध कराए जाने के बावजूद बचाव पक्ष नए-नए आवेदन दाखिल कर सुनवाई टालने की कोशिश कर रहा है।

जांच एजेंसी का दावा है कि डिजिटल साक्ष्य आरोपियों के बीच संपर्क, घटना से पहले, घटना के दौरान और उसके बाद की गतिविधियों को स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि, किसी वीडियो या डिजिटल फाइल का बरामद होना और उसका अदालत में कानूनी रूप से स्वीकार्य साक्ष्य सिद्ध होना दो अलग-अलग बातें हैं। उसकी प्रामाणिकता, स्रोत, उसमें किसी प्रकार की छेड़छाड़ हुई है या नहीं तथा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य से संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन हुआ है या नहीं, इन सभी पहलुओं की जांच करने का अधिकार बचाव पक्ष को है।

Created On :   26 Aug 2026 8:11 PM IST

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