Bhopal News: स्लीमनाबाद टनल निर्माण में अप्रत्याशित घटना की आशंका में अफसरों ने ठेकेदार को दे दिया 39.60 करोड़

बरगी डायवर्जन प्रोजेक्ट के तहत बरगी बांध (नर्मदा नदी पर स्थित) के पानी को मोड़ने के लिए यह टनल बनाई जा रही।

डिजिटल डेस्क,भोपाल। कटनी जिले की स्लीमनाबाद तहसील में बनाई जा रही स्लीमनाबाद टनल में अफसरों और ठेकेदारों की मिलीभगत कैग की रिपोर्ट में सामने आई है। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (एनवीडीए) के अफसरों ने ठेकेदार पटेल इंजीनियरिंग लिमिटेड को टनल निर्माण के दौरान अप्रत्याशित घटना होने की आशंका में 39.60 करोड़ रुपए दे दिए।

भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक (कैग) ने इसका खुलासा किया है। दरअसल, बरगी डायवर्जन प्रोजेक्ट के तहत बरगी बांध (नर्मदा नदी पर स्थित) के पानी को मोड़ने के लिए यह टनल बनाई जा रही। इस प्रोजेक्ट में कटनी जिले की स्लीमनाबाद तहसील के पास 10 मीटर व्यास वाली 12 किमी लंबी सुरंग का निर्माण शामिल है। भूवैज्ञानिक जांच की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में खुदाई और बोरिंग स्थल का जल स्तर बहुत ऊंचा था, इसलिए जल निकासी को कार्यक्षेत्र में शामिल किया गया।

इसे पटेल इंजीनियरिंग को ही करना था। लेकिन टनल की खुदाई के समय, टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) का उपयोग करते हुए पानी उच्च दाब के साथ आने वाले पानी की निकासी ठेकेदार पटेल इंजीनियरिंग को अपने संसाधनों से सुरंग से जल निकासी करनी पड़ी। टनल निर्माण के दौरान किए गए अनुबंध की शर्तों के अनुसार सक्षम प्राधिकारी अप्रत्याशित घटना की परिस्थितियों में अतिरिक्त समय की अनुमति दे सकेगा।

हालांकि, अप्रत्याशित घटना के कारण ठेकेदार को हुए किसी भी नुकसान के लिए कोई मुआवजा नहीं दिया जाएगा। अनुबंध में यह भी प्रावधान है कि अप्रत्याशित घटना की परिभाषा नियोक्ता और ठेकेदार के नियंत्रण से परे एक ऐसी घटना है, जो किसी पक्ष के लिए कार्य करना असंभव या अवैध बना देती है।

अनुबंध के खिलाफ किया भुगतान

कैग ने जांच में पाया कि एनवीडीए की 257वीं बैठक में चीफ इंजीनियर, जबलपुर द्वारा प्रस्तुत तथ्यों को संज्ञान में लिया, जिसमें अत्यधिक जल-निकासी से उत्पन्न स्थिति और उसके लिए अप्रत्याशित घटना के अंतर्गत किए जाने वाले भुगतान के बारे में बताया गया था। चीफ इंजीनियर ने अप्रत्याशित घटना के अंतर्गत अनुबंध की शर्तों के विपरीत फरवरी, 2023 में 20.81 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान करने की मंजूरी दे दी।

एनवीडीए ने जल-निकासी के लिए 338वें आरए बिल तक ₹ 39.60 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान भी कर दिया जो कि अनुबंध के प्रावधानों के विरूद्ध किया गया है। एनआईटी की शर्तों में केवल अप्रत्याशित परिस्थितियों में अतिरिक्त समय की अनुमति दी गई थी। इसके अलावा, टनल निर्माण के दौरान जल निकासी का काम ठेकेदार को ही करना था, इसका अलग से भुगतान करने का अनुबंध में प्रावधान नहीं है।

अफसरों ने तर्क दिया, बदल गई थी परिस्थितयां

कैग के जांच दल ने एनवीडी के सदस्य (वित्त) ने पूछा तो एनवीडीए के अिधकारियों ने फरवरी 2025 में बताया कि प्रारंभिक जांच के बाद टेंडर के लिए कार्यक्षेत्र निर्धारित कर भुगतान को टेंडर में शामिल किया गया। यह भी तर्क दिया कि टनल के तल से 6-8 मीटर ऊपर वॉटर टेबल अपेक्षित थी जो कि अनुबंध समझौते में है।

जबकि मौके पर वॉटर टेबल 12-18 मीटर के बीच मिला। परिस्थितियां पूरी तरह बदल गई और कठिन परिस्थिति के कारण एनवीडीए के अधिकारियों ने ऐसा निर्णय लिया है। कैग ने अधिकारियों के इस जवाब को मंजूर नहीं किया और टिप्पणी दी कि जल निकासी का काम ठेकेदार पटेल इंजीनियरिंग को ही करना था, यह भुगतान अनियमित है।

Created On :   23 Feb 2026 6:29 PM IST

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