- Home
- /
- राज्य
- /
- मध्य प्रदेश
- /
- भोपाल
- /
- आदिवासियों की जमीन गैर-आदिवासियों...
Bhopal News: आदिवासियों की जमीन गैर-आदिवासियों को ट्रांसफर कर दी
डिजिटल डेस्क,भोपाल। भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में सामने आया कि मप्र के कई जिलों में आदिवासियों की जमीन नियम विरुद्ध गैर आदिवासियों को ट्रांसफर कर दी। आदिवासियों की जमीन बेचने-ट्रांसफर करने के लिए नियमानुसार जिला कलेक्टर अधिकृत हैं, लेकिन एडीएम की अनुमतियों से आिदवासियों की जमीन सामान्य लोगों ने ले ली।
ऐसे मामले दमोह में 61, बालाघाट में 97 और छतरपुर में 43 सामने आए। कैग की रिपोर्ट में 39 मामलों में 2011 से 2019 के बीच 56.96 हेक्टेयर आदिवासियों की भूमि को गैर आदिवासी लोगों को दी गई। नियमों के विपरीत जहां कलेक्टर के पास भूमि हस्तांतरण का अधिकार होता है एडीएम ने अनुमति दी। दमोह में 26 ऐसे मामले सामने आए। यह मप्र भू - राजस्व संहिता का उल्लंघन है।
एमपीएलआईसी की धारा 165(6) द्वारा शासित होता है। नियम अनुसार कलेक्टर रैंक से नीचे का अधिकारी अनुमति नहीं दे सकता। शासन ने दमोह में जवाब में शक्तियों के प्रत्यायोजन का हवाला दिया जिसको कैग ने अस्वीकार कर दिया। वहीं बालाघाट और छतरपुर के मामलों का जवाब ही नहीं दिया गया।
कैग की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि सोहागपुर, जिला शहडोल में आदिवासी और गैर आदिवासी के बीच भूमि हस्तांतरण विवाद के तीन मामलों में उप खंड अधिकारी ने गैर आदिवासी पक्ष में निर्णय दिया। यह निर्णय प्रकरण फाइलों की अभिलेख, सूचना पर आधारित नहीं था।
इसलिए इसे आदिवासियों के वैध अधिकारों से वंचित माना गया। भूमि हस्तांतरण की वास्तविक प्रकृति और वैधता के सत्यापन के बिना ही निर्णय गैर आदिवासी जनजाति के पक्ष में किया गया।
शासकीय भूमि पर अवैध कालोनियां बनी
गुना में सितंबर 2023 पांच सर्वे में कैग ने पाया कि शासकीय भूमि के 4.99 हेक्टेयर क्षेत्रफल पर 6 अवैध आवासीय कॉलोनियों विकसित हो चुकी हैं। इसके साथ ही 1.07 हेक्टेयर भूमि को आवासीय उद्देश्य के लिए व्यापवर्तिति (डायवर्सन) निजी भूमि के रूप में खसरा में दिखाया गया।
नियमों के विपरीत डायवर्सन
प्रदेश के 10 जिलों के 20 चयनित उपखंडों, तहसीलों में 1082 व्यपवर्तन प्रकरणों में मई 2023 से दिसम्बर 2023 के बीच 109 भूमि डायवर्ट की गई। भोपाल में 2 भू भागों को आवासीय और व्यवसाय के लिए डायवर्जन किया गया। अधिकारियों ने विकास योजना के तहत 8 लाख 36 हजार 618 वर्ग मीटर भूखंडों का डायवर्सन आदेश जारी किया।
इनमें कृषि से आवासीय और व्यावसायिक किया गया। आवासीय से व्यावसायिक, कृषि से शैक्षिक और कृषि से औद्योगिक , खनन में परिवर्तित किया गया। उपखंड अधिकारी ने विकास योजना के विपरीत भूमि में परिवर्तन करने के लिए निदेशक, नगर और ग्राम निवेश से आवश्यक अनुमति नहीं ली, जो कि अनियमित और लागू प्रावधानों के प्रतिकूल थी। प्रकरणों में रांझी जबलपुर 1, दमोह 6, सोहागपुर शहडोल 7 प्रकरण शामिल है।
Created On :   23 Feb 2026 6:36 PM IST








