इंडिया केम-2026: मप्र में लगेंगे रसायन और पेट्रोकेमिकल उद्योग, मुख्यमंत्री ने मुंबई में निवेशकों से किया संवाद

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मुंबई में चल रहे इंडिया केम-2026 में शुक्रवार को मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव शामिल हुए। उन्होंने निवेशकों और एद्योगपतियों को मप्र में पेट्रोकेमिकल्स, फर्टिलाइजर और दवा निर्माण संबंधी स्कॉप के बारे में जानकारी दी। जनवरी-2027 में प्रदेश में होने वाली जीआईएस मीट के लिए भी आमंत्रण दिया। डॉ यादव ने कहा कि मप्र में निवेश के लिए आसान, सरल और पारदर्शी व्यवस्था बनाई है। रसायन एवं उर्वरक क्षेत्र में निवेश के इच्छुक निवेशकों को राज्य सरकार पूरी सुविधा, साथ, सहयोग, सुरक्षा देगी। बिना किसी संकोच के मप्र में निवेश करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश को रसायन एवं पेट्रोकेमिकल उद्योग के प्रमुख 'ग्लोबल हब' बनाने का है। इंडिया केम की इस साल की थीम 'एडवांटेज भारत-एन इमर्जिंग ग्लोबल केमिकल्स हब है। इसमें मप्र, आंध्रप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल स्टेट पार्टनर्स है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि बीना मप्र के पेट्रोकेमिकल उद्योग का नया गढ़ बन रहा है। यहां लगभग 50 हजार करोड़ की लागत से डाउनस्ट्रीम पेट्रोकेमिकल यूनिट का भूमि-पूजन किया जा चुका है। हर साल 22 लाख टन से अधिक पेट्रोकेमिकल उत्पाद तैयार होंगे। भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड की लगभग 49 हजार करोड़ रुपये की एथिलीन क्रैकर एवं रिफाइनरी विस्तार परियोजना भी मध्य भारत में पेट्रोकेमिकल आधारित उद्योगों के लिए अवसर उपलब्ध कराएगी। उन्होंने इंडियन ऑयल, रिलायंस और हल्दिया पेट्रोकेमिकल्स जैसी कंपनियों से बीना के आसपास पॉलिमर प्रसंस्करण और वितरण में निवेश के लिए आग्रह किया। रायसेन के तामोट में 121 एकड़ और ग्वालियर के बिलौआ में 93 एकड़ के प्लास्टिक पार्क तैयार किए गए हैं। तामोट में सिपेट का उन्नत प्लास्टिक उत्पाद अनुकरण एवं मूल्यांकन केंद्र भी है। सीहोर जिले के आष्टा में गेल इंडिया की पेट्रोकेमिकल परियोजना को भी उन्होंने महत्वपूर्ण बताया। नागदा में ग्रेसिम इंडस्ट्रीज प्रदेश की रासायनिक उद्योग क्षमता काे दर्शाता है।
निर्यात उद्योगों को आमंत्रण
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यूपीएल, पीआई इंडस्ट्रीज, धनुका और सिंजेंटा जैसी कंपनियों से प्रदेश को केवल बाज़ार नहीं, विनिर्माण के लिए भी चुनने का आग्रह किया। दीपक नाइट्राइट और आरती इंडस्ट्रीज से उन्होंने विशिष्ट रसायन के क्षेत्र में नई इकाइयां और इनके विस्तार पर भी खुलकर विचार करने को कहा। केमेक्सिल और निर्यातकों के साथ विशेष संवाद की मंशा जताई। वैश्विक कंपनियों में बीएएसएफ, डाऊ, आर्केमा, लैनक्सेस और मित्सुबिशी केमिकल से उन्होंने 'फ्यूचर ग्रोथ केके 1 स्ट्रेटेजी' अंतर्गत मध्यप्रदेश की संभावनाओं पर गहनता से आंकलन करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पिछले पौने तीन साल में प्रदेश को 34 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिनमें करीब 12 लाख करोड़ के, धरातल पर उतर चुके हैं।
उद्योगपतियों से वन-टू-वन चर्चा, बिरला को दिया आमंत्रण
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आदित्य बिरला समूह के प्रमुख कुमार मंगलम और उनके बेटे आर्यमन विक्रम बिरला से भेंट की। मुख्यमंत्री जीआईएस के लिए आमंत्रित किया। जबकि वस्त्र, उच्च शिक्षा, रसायन एवं उर्वरक तथा फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने उद्योगपतियों के साथ वन टू वन बैठकें भी की। भीलोस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक रमेशचंद्र तेजराज जैन से वस्त्र उद्योग के लिए बात की। कंपनी की योजना के अनुसार, दो परियोजनाओं में लगभग 7,500 करोड़ रुपये का निवेश और करीब 3,750 रोजगार के अवसर प्रस्तावित हैं। सितारे यूनिवर्सिटी के संस्थापक डॉ. अमित सिंघल के उच्च शिक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कंप्यूटर साइंस के क्षेत्र में संस्थागत निवेश की संभावनाओं पर चर्चा हुई। देवास के पास लगभग 40 एकड़ भूमि पर एआई एवं कंप्यूटर साइंस केंद्रित आवासीय विश्वविद्यालय परिसर स्थापित करने की योजना प्रस्तावित है। मध्य भारत फॉस्फेट प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक पुनीत गोपीकिशन मखारिया के साथ बैठक में उर्वरक निर्माण और रसायन उद्योग में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की गई। कंपनी की मेघनगर में लगभग 350 करोड़ रुपये की एकीकृत उर्वरक परियोजना प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त, पूर्वी मध्यप्रदेश में लगभग 700 करोड़ रुपये के निवेश से नई इकाई स्थापित करने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है। ल्यूपिन लिमिटेड के प्रतिनिधि केआर गुप्ता के ने फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र में निवेश और औषधि निर्माण से जुड़ी संभावनाओं पर विचार किया।
1-1 हजार करोड़ के रसायन पार्क
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अौर रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि देश की पेट्रोकेमिकल और केमिकल इंडस्ट्री मजबूती से आगे बढ़ेगी। वर्तमान में भारत की पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्री का आकार 220 बिलियन डॉलर है। वर्ष 2040 तक हमने इसे एक ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। विकसित भारत 2047 तक देश की पेट्रोकेमिकल और रसायन इंडस्ट्री 1.6 ट्रिलियन डॉलर से आगे निकल जाएगी। इसे हासिल करने के लिए देश के सभी इंडस्ट्री लीडर्स के साथ मंथन और उनके सुझावों की जरूरत है। रसायन पार्क बनाने के लिए 1-1 हजार करोड़ रुपए (प्रति रसायन पार्क) मिल रहा है। केन्द्र ने इस योजना को बजट में शामिल कर लिया है।
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