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Chandrapur News: इरई-झरपट नदी संगम के पास मिले पाषाण युग से लेकर यादवकालीन सभ्यता के प्रमाण
Chandrapur News चंद्रपुर शहर के इतिहास पर नया प्रकाश डालने वाला एक महत्वपूर्ण शोध सामने आया है। इतिहास शोधकर्ता प्रा. सुरेश चोपणे ने दावा किया है कि इरई और झरपट नदियों के संगम के निकट स्थित ‘बोर रिठ’ नामक स्थल पर पाषाण युग से लेकर सातवाहन, वाकाटक और यादवकालीन मानव बस्ती के प्रमाण मिले हैं। उपलब्ध पुरातात्त्विक संकेतों के आधार पर उन्होंने यह भी दावा किया है कि ‘बोर रिठ’ ही वर्तमान चंद्रपुर शहर की मूल बस्ती रही होगी।
चोपणे द्वारा किए गए सर्वेक्षण में लगभग 10 हजार वर्ष पुराने पाषाण युगीन औजार, तीन हजार वर्ष पुराने पत्थर के उपकरण, दो हजार वर्ष पुराने मिट्टी के बर्तनों के टुकड़े, पशुओं की हड्डियां और दांत तथा लोहे को गलाने वाली भट्टियों के अवशेष मिलने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा प्राचीन मंदिर के अवशेष, दो शिवलिंग और अन्य पत्थर की संरचनाएं भी इस क्षेत्र में दिखाई दी हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में इस स्थान पर एक हनुमान मंदिर स्थित है तथा आसपास खेती की जाती है, लेकिन पुराने अवशेषों के कारण यहां एक टीले जैसी संरचना विकसित हो गई है, जो प्राचीन मानव बस्ती की ओर संकेत करती है।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, कुछ वर्ष पूर्व खेती के दौरान इस क्षेत्र में प्राचीन सिक्के और आभूषण भी मिले थे। इससे संभावना जताई जा रही है कि यदि यहां वैज्ञानिक पद्धति से उत्खनन कराया जाए तो और भी महत्वपूर्ण पुरातात्त्विक साक्ष्य सामने आ सकते हैं। चोपणे के अनुसार, इरई और झरपट नदियों के किनारे का क्षेत्र अत्यंत प्राचीन काल से मानव निवास का केंद्र रहा है। दाताला, नागाला, देवाड़ा और आरवट क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पाषाण युगीन औजार मिले हैं, जिससे यह क्षेत्र देश के महत्वपूर्ण प्रागैतिहासिक स्थलों में शामिल हो सकता है। उन्होंने बताया कि झरपट नदी के किनारे स्थित पापामिया टेकड़ी क्षेत्र में भी बड़ी मात्रा में पाषाण युगीन अवशेष, शिवलिंग और हाथी की शिल्पाकृतियां मिली हैं, जो वहां भी प्राचीन मानव बस्ती होने के संकेत देती हैं।
शोध के दौरान चंद्रपुर शहर के आसपास स्थित कई अन्य प्राचीन बस्तियों का भी उल्लेख किया गया है। आरवट गांव के समीप, होम्योपैथी कॉलेज क्षेत्र, पठानपुरा गेट और संगम क्षेत्र में भी प्राचीन मानव निवास के प्रमाण मिलने की बात कही गई है। वहीं लालपेठ और बाबूपेठ क्षेत्रों की कुछ पुरानी बस्तियों का संबंध हिंदूकालीन लोकपुर और इंदूपुर गांवों से होने की संभावना भी व्यक्त की गई है।
इतिहास के अनुसार गोंड राजाओं के उदय से पहले इस क्षेत्र पर सातवाहन, वाकाटक और यादव शासकों का प्रभाव रहा। इसके बाद राजगोंड सत्ता का उदय हुआ तथा आगे चलकर भोसले और ब्रिटिश शासनकाल में चंद्रपुर का विकास हुआ। गोंड, भोसले और ब्रिटिश काल का इतिहास उपलब्ध है, लेकिन उससे पूर्व की मूल बस्ती की खोज के संदर्भ में ‘बोर रिठ’ का यह शोध महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘बोर रिठ’ में मिले अवशेषों की आधिकारिक पुष्टि, वैज्ञानिक सर्वेक्षण और पुरातत्व विभाग द्वारा उत्खनन के बाद ही इन दावों को शास्त्रीय मान्यता मिल सकेगी। इसके बावजूद इस शोध ने चंद्रपुर के प्राचीन इतिहास को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।
Created On :   2 Jun 2026 3:06 PM IST

















