Chhindwara News: तराई क्षेत्रों में जमने लगी ओस की बूंदें, लगातार गिर रहा पारा, सतर्क रहने की सलाह

तराई क्षेत्रों में जमने लगी ओस की बूंदें, लगातार गिर रहा पारा, सतर्क रहने की सलाह
आज रहेगी शीतलहर, न्यूनतम तापमान में आएगी गिरावट

Chhindwara News: जिले में इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही है। जिला मुख्यालय में पारा 9 डिग्री के नीचे चल रहा है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में पारा 7 डिग्री के नीचे पहुंच गया है। अब आलम यह है कि रात के समय आम लोगों को अलाव की जरूरत महसूस होने लगी है। मौसम विभाग के मुताबिक आगामी दिनों में शीतलहर का प्रभाव ओर तेज होने की संभावना है।

दिसंबर के अंत में एवं जनवरी के दौरान शीतलहर का प्रकोप देखने को मिलता है। इस दौरान कई क्षेत्रों में न्यूनतम पारा 5 डिग्री तक नीचे पहुंच सकता है। जिससे जनमानस के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है।

जमने लगी ओस की बूंदें

कोयलांचल के तराई क्षेत्रों में कड़ाके की ठंड के चलते ओस की बूंदें जमने लगी हैं। गुरुवार की सुबह तामिया व न्यूटन क्षेत्र में पौधों पर ओस की बूंदें जमी देखी गई। इससे पूर्व मंगलवार की रात को जिले में इस सीजन की सबसे सर्द रात दर्ज की गई। इस दौरान पारा 6.8 डिग्री तक नीचे लुढ़क गया। आने वाले दिनों में पारा ओर गिरने की आशंका है।

शीतलहर के दौरान क्या करें

पर्याप्त मात्रा में गर्म कपड़े पहनें तथा कई परतों में वस्त्र धारण करें। सिर, गर्दन, हाथ एवं पैरों को अच्छी तरह ढकें। टोपी, मफलर एवं मोजे का प्रयोग करें। वॉटरफ्रूफ जूतों का उपयोग करें। गर्म एवं तरल पेय पदार्थ (चाय, सूप आदि) लेते रहें तथा संतुलित आहार व विटामिन-सी युक्त फल-सब्जियों का सेवन करें।

शीतलहर से बचाव के लिए एडवाइजरी जारी

शीतलहर को देखते हुए आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा तरुण राठी ने बचाव के लिए समस्त चिकित्सा महाविद्यालयों के अधिष्ठाता, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक द्वारा मैदानी कर्मियों एवं आम नागरिकों को शीतलहर के लक्षण, बचाव उपाय तथा जागरूक करने और आवश्यक तैयरियां रखने के निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने बताया कि अत्यधिक ठंड के कारण हाइपोथर्मिया, फ्रास्टबाइट जैसी शीतजनित बीमारियां तथा विषम परिस्थितियों में मृत्यु की संभावना भी हो सकती है। शीतलहर के दौरान विशेष रूप से 65 वर्ष से अधिक आयु के वृद्धजन, 5 वर्ष से कम आयु के बच्चें, हृदय एवं श्वसन रोग से पीड़ित व्यक्ति, बेघर लोग, खुले स्थानों व निर्माण स्थलों पर कार्यरत श्रमिक, सड़क किनारे रहने वाले व्यक्ति एवं छोटे व्यवसायी अत्यधिक संवेदनशील होते हैं।

Created On :   19 Dec 2025 2:31 PM IST

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