Gadchiroli News: हथियार के भरोसे परिवर्तन अब संभव नहीं , व्यवस्था में सुधार जरूरी

हथियार के भरोसे परिवर्तन अब संभव नहीं , व्यवस्था में सुधार जरूरी
आत्मसमर्पित नक्सल नेता भूपति ने की पत्रकारों से बातचीत

Gadchiroli News समाज में यदि शोषण हैं तो लोग क्रांति की ओर आकर्षित होंगे। इस कारण समाज को नक्सलवाद की आवश्यकता न पड़े इसका संज्ञान लेते हुए व्यवस्था से काम करना होगा। हमारी लड़ाई पुलिस के साथ कभी नहीं थी, बल्कि हमारा विरोध व्यवस्था पर था। लेकिन अब समय बदल गया है।

हथियार के भरोसे परिवर्तन लाना असंभव हो गया है। इसी कारण मैंने मुख्य प्रवाह में आने का निर्णय लिया। इस आशय की जानकारी आत्म्समर्पित नक्सली नेता सोनू उर्फ भूपति ने पत्रकारों से हुई बातचीत के दौरान दी। भूपति ने बताया कि, वर्ष 2013 से गड़चिरोली जिले के नक्सल आंदोलन में नई भर्ती नहीं हो पायी है। नक्सलवाद से जुड़े बड़े नेता लोगांे से दूर होने के कारण ही यह स्थिति निर्माण हुई। जिस समय संगठन लोगांे से दूर होता है, उसी समय से उसका अंत होना शुरू हो जाता है। वर्ष 2024 में संगठन के वरिष्ठ नेता गणपति, बसवराजू और देवजी के समक्ष अब शस्त्र के साथ काम करना असंभव होने की बात कही थी। उस समय कई नेताओं ने मुझे गलत ठहराया था।

देश की स्थिति को विचार करते ही मैंने आत्मसमर्पण का कदम उठाया। पिछले 43 वर्ष मध्य प्रांत के जंगलों में बिताये हंै। इस कारण मैंने पंद्रह वर्षों बाद पहली बार ही बिजली देखी। नक्सल गतिविधि में सर्वाधिक चर्चाओं में रहे हिडमा के संदर्भ में भूपति ने बताया कि, सोशल मीडिया के कारण युवाओं ने हिडमा को सिर पर चढ़ाया है। उसकी विचारधारा के साथ किसी ने भी काम नहीं किया है। संगठन में उसका कर्तृत्व बड़ा था, लेकिन विचारधारा भिन्न थी। वर्ष 2025 में बसवराजू भी मुख्य धारा से जुड़ने के लिए तैयार था। लेकिन उसने अपना निर्णय बदला और उसकी मुठभेड़ में मृत्यु

हो गयी। वर्ष 2008 से 2011 की कालावधि में मििलंद तेलतुंबडे के साथ भी कार्य किया है। वह मेरा अच्छा मित्र था। लेकिन उसे भी अपनी जान गंवानी पड़ी। आज के समय में सशस्त्र क्रांति संभव नहीं है और यह अंतिम सत्य भी है। इस कारण शेष नक्सलियों द्वारा ही मुख्य धारा को अपनाना चाहिए। ऐसा आह्वान भी इस समय भूपति ने किया।


Created On :   20 Feb 2026 4:32 PM IST

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