जबलपुर न्यूज: ऐसा रोडमैप तैयार करें जिससे खाद्य तेल आयात में कमी आ जाए

डिजिटल डेस्क जबलपुर|खाद्य तेल के क्षेत्र में पुनरूत्थानशील कृषि नीतियों को जमीनी स्तर पर लागू करना और इसके माध्यम से घरेलु खाद्य तेल उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में कार्य करने की महती आवश्यकता है। भारत में खाद्य तेल की आपूर्ति के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता है, लिहाजा ऐसे में हमें रोडमैप तैयार करके जल्द ही शासन तक पहुंचाने की दिशा में कार्य किया जाना चाहिए, ताकि इस पहल से न केवल देश की खाद्य तेल सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि विदेशों से होने वाले महंगे तेल आयात पर भारत की निर्भरता भी कम होगी।
उपरोक्त विचार डॉ धीरेन्द्र खरे अधिष्ठाता कृषि संकाय ने जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय में खाद्य तेल आपूर्ति श्रृंखला में पुनरूत्थानशील कृषि नीतियों के साथ हितधारकों की परामर्श बैठक में मुख्य अतिथि की आसंदी से व्यक्त किए। इस मौके पर विशिष्ट अतिथि के रूप में संचालक अनुसंधान सेवाएं डॉ एके जैन, संचालक विस्तार सेवाएं डॉ टीआर शर्मा, संचालक प्रक्षेत्र डॉ विजय यादव, प्रभारी संचालक शिक्षण डॉ संजीव गर्ग, कुलसचिव श्रीमति रचना शर्मा, प्रभारी लेखानियंत्रक डॉ आरके भटनागर उपस्थित रहे। बीपीडी यूनिट एवं जवाहर राबी के सीईओ डॉ अनिल मिश्रा ने कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन एवं कार्यशाला के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की।
सोयाबीन सहित कई फसलें विकसित की-
डॉ एके जैन ने कहा कि जनेकृविवि ने 6 दशकों में सोयाबीन सहित अन्य प्रमुख तिलहनी फसलों की कई उन्नत किस्में विकसित की हैं। किसानों को उत्पादन बढ़ाने हेतु उसका सही प्रबंधन करने की दिशा में कार्य करना जरूरी है। डॉ टीआर शर्मा ने कहा कि किसानों को पैदावार और सही दाम दिलाने के लिए खेती में आधुनिक तकनीकों, सही प्रबंधन और बाजार से सीधे जुड़ाव की जरूरत है।
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