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Jabalpur News: भारत के एकात्मता दर्शन के प्रतीक हैं भगवान श्रीराम

Jabalpur News: परमात्मा आत्मा के रूप में हर किसी के हृदय में निवास करता है। इसलिए हर शरीर एक मंदिर है और हर देह में परमात्मा नजर आना चाहिए। यह दर्शन भारतीय संस्कृति में पांच हजार साल पहले से है, लेकिन अब दुनिया भी इस दर्शन को 1948 के बाद से स्वीकार करने लगी है। भारत की संस्कृति अपनी बुनियादी जड़ों से जुड़ी हुई है। भारत का पूरा दर्शन ही राम हैं।
प्रभु श्रीराम भारत के एकात्मता दर्शन के प्रतीक हैं। उक्त विचार बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने मानस भवन में चतुर्थ वर्ल्ड रामायण काॅन्फ्रेंस के समापन अवसर पर व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति भेदभाव से नहीं, बल्कि आत्मा, चेतना और बुद्धि से परिभाषित होती है। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति विविधता का सम्मान करना सिखाती है। राज्यपाल ने कहा कि जीवन का वास्तविक उद्देश्य केवल सुख की प्राप्ति नहीं, बल्कि ज्ञान की प्राप्ति होना चाहिए, ताकि हम अपने भीतर की वास्तविक एकता को देख सकें। उन्होंने कहा कि बिना एकात्मता को पाए मोक्ष की प्राप्ति संभव नहीं।
श्रीराम के आदर्शों को जीवन में उतारें-
बाबा कल्याण दास, साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी, संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह, शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह, सांसद आशीष दुबे ने श्रीराम के चरित्र को जीवन में उतारने का आह्वान किया। कार्यक्रम में महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, विधायक अभिलाष पांडे, आयोजन अध्यक्ष अजय विश्नोई, सचिव डॉ. अखिलेश गुमास्ता, पूर्व न्यायाधीश पंकज गौर, अधिवक्ता रवि रंजन, संकेत मलैया सहित अन्य उपस्थित रहे। इस दौरान आचार्य रणछोड़लाल (आभरण बाबा) द्वारा रचित श्रीरामवल्लभ ग्रंथ का विमोचन किया गया।
शोध, विमर्श और वैचारिक सत्र-
जयपुर के प्रो. नरेंद्र कौशिक ने श्रीराम के पूर्वजों शिवि, इक्ष्वाकु, सगर, भागीरथ, दिलीप, रघु आदि के विषय में बताया। अमरकंटक की प्रो. अभिलाषा सिंह एवं अध्यक्ष रविंद्र वाजपेई ने शोध पत्र प्रस्तुत किए। प्रो. नीलांजना पाठक ने रामायण की पवित्र वनस्पतियों एवं जीव-जंतुओं से प्राप्त जीवन शिक्षाओं पर व्याख्यान दिया। भोपाल के शैलेंद्र तिवारी ने युवाओं के संदर्भ में भगवान राम और माता सीता के त्याग पर सारगर्भित विचार रखे। वहीं डॉ. अजय तिवारी तथा शिवाकांत बाजपेई ने विचार रखे।
रावण के ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व पर शोध प्रस्तुत किया। डॉ. पर्व परमार ने रामायण से प्रबंधन के वे पाठ जो आज के युवाओं को सशक्त बनाने में सहायक हों, विषय पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया।
रामनामी संप्रदाय ने किया राज्यपाल का अभिनंदन
राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान जैसे ही मानस भवन पहुंचे, द्वार पर रामनामी संप्रदाय के प्रतिनिधियों ने उनका स्वागत राम नाम का गमछा ओढ़ाकर किया। भाषण के बाद राज्यपाल ने मानस भवन में लगी प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने सेंड आर्ट से तैयार किए गए राम मंदिर को भी देखा।
रामलीला का हुआ मंचन-
शाम को बाबा कल्याण दास ने प्रवचन में कहा कि भारत की संस्कृति विविधता भरी है, जिसमें समरसता का भाव है। इसके बाद कवि सुदीप भोला एवं अन्य ने प्रस्तुतियां दीं। वहीं छिंदवाड़ा की रामलीला समिति द्वारा रामलीला का भावपूर्ण मंचन किया गया।
इंडो-थाई रामायण फोरम पर चर्चा-
सत्र के आरंभ में इंडो-थाई रामायण फोरम पर विशेष चर्चा हुई। को-ऑर्डिनेटर अमरेंद्र नारायण ने बताया कि इस फोरम की स्थापना प्रथम विश्व रामायण सम्मेलन में हुई थी, जिसका उद्देश्य भारत और थाईलैंड के बीच रामायण पर आधारित अकादमिक एवं सांस्कृतिक सहयोग को सुदृढ़ करना है।
Created On :   5 Jan 2026 4:55 PM IST












