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Jabalpur News: एआई फिक्शन लिख तो सकता है लेकिन इमोशन और फील नहीं दे सकता

Jabalpur News: मुझे नहीं लगता है कि लेखन काे एआई या चैटजीपीटी जैसे टूल्स से कोई खतरा है, मैं इसे मौके की तरह देखता हूं। कई बार मैं अपने आर्टिकल्स की ग्रामर एआई से चैक करा लेता हूं, जो कि ज्यादा फास्ट और सटीक है। रिसर्च में भी इसकी मदद लेता हूं। हां लेकिन जब मौलिक लेखन की बात आती है, तब एआई आपको इमोशन नहीं दे सकता। एआई फिक्शन लिख सकता है लेकिन फील नहीं करा सकता।
आज चैटजीपीटी को आए 3 साल हो गए, लेकिन काेई भी ऐसी बेस्ट सेलर किताब नहीं आई जो एआई ने लिखी हो। लोगों की रुचि लोगों को सुनने और पढ़ने में होती है। इंटरनेट लोगों को कनेक्ट करने और असिस्टेंस के लिए बना है, यह लोगों की जगह नहीं ले सकता, इसलिए मौलिक लेखन की प्रासंगिकता बनी रहेगी।
यह कहना है प्रख्यात लेखक और मोटिवेटर चेतन भगत का। दैनिक भास्कर से विशेष चर्चा में उन्होंने कहा कि जबलपुर पहले भी कई बार आ चुका हूं। यह बहुत यंग शहर है, यहां स्टूडेंट्स बहुत हैं। मेरे पिता आर्मी में रहे हैं, जबलपुर मुझे आर्मी टाउन्स की याद दिलाता है।
अंग्रेजी ग्लोबल लैंग्वेज, लेकिन आसान होना जरूरी
मुझे आसान भाषा का साहित्य पढ़ना पसंद था और मैंने भी आसान भाषा में ही लिखने का प्रयास किया है। यही मेरी लोकप्रियता का कारण भी है, मेरा लेखन कोई भी पढ़ सकता है। मुझे लगता है कि अंग्रेेजी जरूरी है। आज अंग्रेजी ग्लोबल लैंग्वेज है, उसके बिना तरक्की नहीं होगी, लेकिन एकदम जटिल अंग्रेजी भी जरूरी नहीं है। मेरे रीडर्स के मुझसे अटैचमेंट की यह भी एक बड़ी वजह है।
मिलेनियल के साथ जेन जी भी पढ़ें
मेरी पिछली लव स्टोरी 2 स्टेट्स 2009 में आई और उस पर फिल्म 2014 में आई थी। आज 2026 चल रहा है। जेन जी का जमाना है। रिश्ते भी बदल गए हैं। जैसे 2 स्टेट्स में लड़का-लड़की शादी के लिए तैयार थे, लेकिन पैरेंट्स श्योर नहीं थे और वो पैरेंट्स मनाने की स्टोरी है। वहीं आजकल लड़का-लड़की श्योर नहीं हैं।
आज सिचुएशनशिप आ गई है, जिसका पहले वजूद नहीं था। "12 ईयर्स: माय मेस्ड-अप लव स्टोरी " ऐसे कपल की कहानी है जिनमें 12 वर्ष का ऐज गैप है। वो रिश्ते में तो हैं पर श्याेर भी नहीं हैं। इस कहानी का एक किरदार मिलेनियल है तो दूसरा जेन जी। मिलेनियल मेरी किताबों को पढ़कर बड़े हुए हैं, तो उन्हें खुश रखना है और अब जेन जी भी पढ़ें, मुझे यह चाहिए।
सोशल मीडिया आया तो लगा कॅरियर खत्म
आज की जेन जी जनरेशन तक अपने काम को पहुंचाना बहुत कठिन था। जब इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म आए तो मुझे लगा अब किताबें कोई नहीं पढ़ेगा, मेरा कॅरियर खत्म हो गया, पर मैं गलत था, हालांकि किताबें पढ़ना कम जरूर हुआ, यह बात सच है कि खत्म नहीं हुआ। रेडियो, फिल्में, टीवी आदि आने के बाद भी किताबें खत्म नहीं हुईं। किताबों में आज भी पॉवर है और वह आगे भी रहेगा।
रैपिड फायर सवाल
सवाल: "अगर आपको अपनी लाइफ की 'बायोपिक' के लिए एक टाइटल चुनना हो, तो वह क्या होगा?
जवाब: "गॉड्स पेन'
सवाल: IIT की इंजीनियरिंग या IIM की मार्केटिंग-लेखन में कौन सी पढ़ाई ज्यादा काम आई?
जवाब: दोनों ही काम आईं। आईआईटी ने दोस्त दिए, कहानी दी। आईआईएम से मैंने ब्रांड बनाना सीखा, खुद की ब्रांडिंग करना सीखा।
सवाल: एक ऐसी फिल्म जो आपकी किताब से बेहतर बनी हो?
जवाब: किताब आने के बाद फिल्म बनती है, तो बेहतर ही बननी चाहिए। एक फिल्म है और एक बुक है, दोनों काे कम्पेयर नहीं कर सकते।
Created On :   5 Jan 2026 3:52 PM IST












