जिम्मेदारी बेहद महत्वपूर्ण: उद्धव ठाकरे से मिले बीड के 250 बीएलए, बोले- महाराष्ट्र में 2 करोड़ से ज्यादा मतदाता गायब

उद्धव ठाकरे से मिले बीड के 250 बीएलए, बोले- महाराष्ट्र में 2 करोड़ से ज्यादा मतदाता गायब
  • मतदाता सूची विवाद के बीच ठाकरे का संदेश
  • जनता के बीच जाकर पता करें कैसे नाम हटे
  • बीएलए की जिम्मेदारी अब बेहद महत्वपूर्ण

Mumbai News. महाराष्ट्र में मतदाता सूची को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से नई प्रारूप मतदाता सूची जारी किए जाने के बाद विपक्ष ने गंभीर सवाल उठाए हैं। दावा किया जा रहा है कि नई सूची में 2 करोड़ 6 लाख 88 हजार से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इसी मुद्दे को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच बीड जिले के करीब 250 बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) ने शिवसेना (उद्धव) पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे से मुलाकात की। बैठक के बाद ठाकरे ने बीड के इन बीएलए और शिवसैनिकों की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि बीएलए की जिम्मेदारी बेहद महत्वपूर्ण है और मतदाता सूची की निगरानी में उन्हें अहम भूमिका निभानी होगी। उन्हें जनता के बीच जाकर पता करना होगा कि उनके नाम किस वजह से हटे।

बीएलए की जिम्मेदारी अब बेहद महत्वपूर्ण

मतदाता सूची के मुद्दे पर भाजपा पर निशाना साधते हुए उद्धव ने कहा कि भाजपा निचले स्तर तक जाकर राजनीतिक रणनीति तैयार करती है और उसके बाद चुनाव जीतती है। उन्होंने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु का भी उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि वहां मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उद्धव ने दावा किया कि महाराष्ट्र में 2 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से गायब हुए हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या यह बात लोगों के ध्यान में आ रही है? उन्होंने बीएलए से अपील करते हुए कहा कि मतदाता सूची में नामों की जांच करना और वास्तविक मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखना अब बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उद्धव ने कहा कि शिवसेना (उद्धव) के नाम से पार्टी का पंजीकरण हो चुका है और इसी नाम से पार्टी को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के नाम का दुरुपयोग करने वाले कई लोग हैं, लेकिन जल्द ही इसका भी फैसला हो जाएगा।

कार्यकर्ता परिवार की चिंता किए बिना जनता के लिए काम करता है

उद्धव ठाकरे ने कहा कि वह पार्टी के वरिष्ठ नेता अंबादास दानवे और सभी शिवसैनिकों का अभिनंदन करते हैं। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता संगठन के लिए अपना घर-परिवार तक भूलकर जनता के लिए काम करता है। शहर की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं को अधिक कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ता है। दूरदराज के इलाकों में घूमकर संगठन का काम करने वाले कार्यकर्ताओं के परिवारों की चिंता भी जरूरी है। उद्धव ने कहा कि इसी उद्देश्य से कार्यकर्ताओं के परिवारों को सहारा देने की योजना शुरू की गई थी, लेकिन बीच में इसमें रुकावट आई। बाद में इसे और बेहतर तरीके से शुरू किया गया।शिवसेना में बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को जोड़ने की परंपरा पुरानी है और इसकी शुरुआत शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे के समय से हुई थी।

गठबंधन के कारण बीड में शिवसेना का अस्तित्व कम हुआ

बीड की राजनीति का जिक्र करते हुए उद्धव ने कहा कि उस समय शिवसेना और भाजपा के बीच गठबंधन था। गठबंधन में पारिवारिक संबंधों जैसे रिश्ते बन गए थे और इसी कारण बीड की कई सीटें सहयोगी दल को दी जाती रहीं। उन्होंने कहा कि इसका परिणाम यह हुआ कि बीड में शिवसेना का राजनीतिक अस्तित्व धीरे-धीरे कम होता गया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि अब एक बार फिर बीड को भगवा करने का अवसर सामने आया है।

Created On :   4 Sept 2026 8:50 PM IST

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