अनशन के सातवें दिन: सरकार को सीधा अल्टीमेटम - 11 सितंबर तक सरकार को मोहलत, नहीं मानी मांग तो मुंबई कूच करेंगे जरांगे

सरकार को सीधा अल्टीमेटम - 11 सितंबर तक सरकार को मोहलत, नहीं मानी मांग तो मुंबई कूच करेंगे जरांगे
  • अनशन के सातवें दिन सरकार को सीधा अल्टीमेटम
  • 12 सितंबर की महाबैठक में तय होगी आंदोलन की अगली दिशा
  • बोले- दो-तीन दिन और सलाइन लूंगा, फिर पानी और इलाज भी छोड़ दूंगा

Jalna News. मराठा आरक्षण को लेकर अंतरवाली सराटी में आमरण अनशन पर बैठे मनोज जरांगे पाटिल ने शुक्रवार को अनशन के सातवें दिन राज्य सरकार को सीधा अल्टीमेटम दिया। उन्होंने 11 सितंबर तक हैदराबाद गजट के अनुसार 58 लाख कुणबी अभिलेखों के वितरण की आधिकारिक घोषणा करने की मांग की। जरांगे ने स्पष्ट किया कि जब तक संबंधित प्रमाण पत्र मराठा समाज के हाथों में नहीं आते, तब तक आंदोलन पीछे नहीं लिया जाएगा। जरांगे ने कहा कि 12 सितंबर को अंतरवाली सराटी में राज्यस्तरीय मराठा समाज की महाबैठक होगी। इसमें सरकार द्वारा मांगें पूरी नहीं किए जाने की स्थिति में मुंबई कूच की अंतिम तारीख तय की जाएगी।

12 सितंबर की बैठक में तय होगी मुंबई कूच की तारीख

पत्रकारों से बातचीत में जरांगे ने कहा कि यदि 11 सितंबर तक सरकार ने कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो 12 सितंबर की बैठक में मुंबई आंदोलन की तारीख घोषित कर दी जाएगी। उन्होंने महायुति सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि एक बार मुंबई आंदोलन की तारीख तय हो गई, तो इसके बाद सत्ताधारियों के हाथ में कोई अधिकार नहीं रहेगा। जरांगे ने यह भी कहा कि सतारा, कोल्हापुर और औंध रियासतों के गजट को भी मराठा समाज के लिए लागू करवाया जाएगा।

‘दो-तीन दिन और सलाइन लूंगा, फिर पानी भी छोड़ दूंगा’

अनशन के दौरान जारी चिकित्सीय उपचार को लेकर जरांगे ने सरकार को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों के आग्रह पर उन्होंने सलाइन लेना स्वीकार किया था। सलाइन मिलने के कारण ही वे फिलहाल बोलने की स्थिति में हैं। हालांकि, अब वे केवल दो-तीन दिन और सलाइन लेने की बात कह रहे हैं।उन्होंने चेतावनी दी कि इसके बाद सलाइन निकाल देंगे, पानी पीना बंद कर देंगे और इलाज भी रोक देंगे। उन्होंने कहा कि सरकार किसी तरह के भ्रम में न रहे।

भुजबल पर तीखा हमला, बोले- अब मराठों से क्यों जलते हैं?

जरांगे ने मंत्री छगन भुजबल पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भुजबल ने ओबीसी राजनीति के नाम पर अपना राजनीतिक स्वार्थ साधा है। जरांगे ने कहा कि भुजबल को अब अपनी राजनीति के साथ-साथ अपने भतीजे को सांसद बनाने की चिंता है। उन्होंने भुजबल पर ओबीसी निगम और महाराष्ट्र सदन से जुड़े मामलों में भी आरोप लगाए तथा राजनीतिक अवसर के अनुसार रुख बदलने का आरोप लगाया।

जरांगे ने कहा कि मराठा समाज की आबादी बड़ी है, लेकिन उसे महज 10 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। उन्होंने ओबीसी की आबादी 60 प्रतिशत होने के दावे पर भी सवाल उठाया और कहा कि मराठा समाज को ओबीसी कोटे से अपने हक का आरक्षण चाहिए।

भुजबल पर निशाना साधते हुए जरांगे ने कहा कि उम्र के इस पड़ाव पर उनसे समझदारी की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने भुजबल को अपनी राजनीति करने के बजाय स्वयं लॉन्ग मार्च निकालने की चुनौती भी दी।

Created On :   4 Sept 2026 8:07 PM IST

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