अनशन का दूसरा दिन: जरांगे ने कहा - अब आश्वासन नहीं, जमीन पर कार्रवाई चाहिए, मांगें नहीं मानीं तो मुंबई ले जाएंगे आंदोलन - तारीख का ऐलान

जरांगे ने कहा - अब आश्वासन नहीं, जमीन पर कार्रवाई चाहिए, मांगें नहीं मानीं तो मुंबई ले जाएंगे आंदोलन - तारीख का ऐलान
  • 12 सितंबर को मुंबई कूच की तारीख का ऐलान
  • जाति सत्यापन समितियां खत्म करने की मांग
  • 12 सितंबर को मुंबई आंदोलन की तारीख बताएंगे

Antarwali Sarathi News. मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मनोज जरांगे पाटील का आमरण अनशन रविवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। देर रात तक आंदोलन स्थल पर मराठा समाज के लोगों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा और तड़के करीब 3 बजे तक आवाजाही बनी रही। जरांगे ने स्पष्ट किया कि सरकार की ओर से अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि घोषणाओं पर जमीन पर कार्रवाई चाहिए। जरांगे ने आरोप लगाया कि 58 लाख कुणबी रिकॉर्ड के अमल को लेकर सरकार के भीतर ही श्रेय लेने की होड़ चल रही है। उन्होंने दावा किया कि कुणबी रिकॉर्ड की संख्या कम करने का प्रयास किया जा रहा है और चार कुणबी प्रमाणपत्र रद्द किए गए हैं। उन्होंने लंबित आवेदनों का निपटारा कर कुणबी प्रमाणपत्रों को जाति वैधता देने, हैदराबाद गजट के अनुसार प्रक्रिया लागू करने और संबंधित शासनादेश (जीआर) पर अमल करने की मांग दोहराई।

जरांगे ने कहा कि यदि सरकार जीआर लागू नहीं करती है तो शांतिपूर्ण आंदोलन की सीमा सरकार ने ही तोड़ी होगी। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि मराठा युवाओं पर कार्रवाई की गई तो समाज की ताकत दिखाई जाएगी।

जाति सत्यापन समितियां खत्म करने की मांग

जरांगे ने महाराष्ट्र की जाति सत्यापन समितियों को समाप्त करने की मांग भी की। उनका दावा है कि देश के अन्य राज्यों में ऐसी व्यवस्था नहीं है, तो महाराष्ट्र में ही इसकी आवश्यकता क्यों है। उन्होंने कहा कि यह जानकारी उन्हें मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील ने दी थी।

12 सितंबर को मुंबई आंदोलन की तारीख बताएंगे

जरांगे ने कहा कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन मुंबई ले जाया जाएगा। 12 सितंबर को मुंबई में आंदोलन की तारीख घोषित की जाएगी। उन्होंने आंदोलन को पांच चरणों में चलाने का संकेत भी दिया। सूत्रों के अनुसार, नवी मुंबई में करीब 25 हजार आंदोलनकारियों के ठहरने की व्यवस्था की जा रही है।

जरांगे के निशाने पर शिंदे-जाधव, अगली बार घर बैठेंगे तो समझ आएगा

परभणी के सांसद बंडू जाधव द्वारा परभणी में आयोजित किसान सम्मेलन रद्द नहीं किए जाने से नाराज जरांगे ने उन पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जाधव को शायद पता नहीं है कि उन्होंने उनके लिए क्या किया है। अगली बार घर बैठने पर उन्हें इसका एहसास होगा। जरांगे ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि अब उनके बेटे बड़े हो गए हैं और कभी रिक्शा तो कभी बैलगाड़ी चलाने की बात करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जाधव ने ही शिंदे को परभणी बुलाया है। जरांगे ने जाधव पर मराठा समाज के खिलाफ खड़े होने का आरोप लगाते हुए उनके लिए आपत्तिजनक शब्दों का भी इस्तेमाल किया।

जाधव बोले- रात में कहते तो कार्यक्रम रद्द कर देता

कार्यक्रम रद्द करने की जरांगे की मांग पर सांसद बंडू जाधव ने कहा कि जरांगे को उनकी आलोचना करने का नैतिक अधिकार है। उनके अनुसार, सम्मेलन की तैयारी करीब 15 दिनों से चल रही थी और कार्यक्रम के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच चुके थे। जाधव ने कहा कि यदि जरांगे ने रात में भी कार्यक्रम रद्द करने के लिए कहा होता तो वे उसे रद्द कर देते। लेकिन कार्यक्रम स्थल पर लोगों के पहुंचने के बाद मौके पर कार्यक्रम रद्द करना उचित नहीं लगा। उन्होंने कहा कि जरांगे की भावनाएं उनकी भावनाओं से अलग नहीं हैं और वे उनका सम्मान करते हैं, लेकिन सभी तैयारियां पूरी होने के बाद अचानक कार्यक्रम रद्द करना संभव नहीं था।

शिंदे बोले- जरांगे की तड़प समझता हूं

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि वे जरांगे की तड़प समझते हैं। वे समाज के लिए लड़ने वाले सामान्य कार्यकर्ता हैं और वे स्वयं दो बार अंतरवाली जाकर जरांगे से मिल चुके हैं। शिंदे ने कहा कि महायुति सरकार ने किसी अन्य समाज के आरक्षण को कम किए बिना मराठा समाज को न्याय देने का प्रयास किया है। सरकार ने 10 प्रतिशत आरक्षण, 5,200 अधिसंख्य पदों के प्रश्न के समाधान, शिंदे समिति और शुक्रे आयोग जैसे कदम उठाए हैं। अण्णासाहेब पाटील महामंडल के कर्ज की सीमा भी 10 लाख से बढ़ाकर 15 लाख रुपये की गई है। उन्होंने किसान सम्मेलन को राजनीति से अलग बताते हुए कहा कि इसकी तैयारी पहले से चल रही थी और इसमें किसान तथा विभिन्न समाजों के लोग शामिल हैं।

Created On :   30 Aug 2026 9:53 PM IST

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