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हाईकोर्ट का आदेश: गोपनीयता पर अदालत गंभीर, जान लीजिए - बिना अनुमति आधिकारिक कॉल रिकॉर्डिंग अपराध है, आईटी एक्ट के तहत चलेगा मुकदमा

Nagpur News. बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि आधिकारिक बातचीत को बिना अनुमति रिकॉर्ड करना और उसे दूसरों को भेजना साइबर अपराध है। यह फैसला महाराष्ट्र मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (महा मेट्रो) के एक कर्मचारी से जुड़े मामले में न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी फालके की पीठ ने दिया है।
यह है मामला?
वर्ष 2019 में दर्ज एफआईआर के अनुसार, आरोपी कर्मचारी ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हुई कॉन्फ्रेंस कॉल को बिना अनुमति रिकॉर्ड किया और उसे एक अन्य सहकर्मी को भेज दिया। अदालत ने इसे कर्तव्य की सीमा का उल्लंघन और आधिकारिक जानकारी के अनधिकृत उपयोग का प्रयास माना। जांच के दौरान जब्त किए गए उपकरणों से ऑडियो क्लिप्स, कॉल लॉग्स और डिजिटल आदान-प्रदान के साक्ष्य मिले, जिनसे प्रथम दृष्टया यह साबित हुआ कि रिकॉर्डिंग और शेयरिंग की गई थी।
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अदालत का फैसला
अदालत ने कहा कि यह कृत्य आईटी एक्ट, 2000 की धारा 43 और 66 के अंतर्गत अपराध बनता है। इस आधार पर आरोपी के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दी गई है। हालांकि, इस मामले में आरोपी के विरुद्ध ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट, 1923 के अंतर्गत भी अपराध दर्ज किए गए थे। किंतु इस घटना का देश की सुरक्षा या किसी गोपनीय सूचना से कोई संबंध न होने के कारण, उक्त अधिनियम के तहत लगाए गए आरोप स्वीकार्य नहीं हैं- यह स्पष्ट करते हुए न्यायालय ने उन धाराओं के तहत दर्ज अपराध को रद्द कर दिया।
जानें - क्या है धारा 43 और 66
आईटी एक्ट, 2000 की धारा 43 और 66 साइबर अपराधों से निपटने के प्रमुख प्रावधान हैं। धारा 43 कंप्यूटर सिस्टम के अनधिकृत उपयोग, डेटा की चोरी या क्षति के लिए दीवानी जुर्माना और मुआवजे का प्रावधान करती है। जब यही कार्य बेईमानी या धोखाधड़ी की नीयत से किया जाता है, तब धारा 66 लागू होती है। इसके तहत दोषी को 3 साल तक की जेल या 5 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
Created On :   20 April 2026 7:00 PM IST












