Nagpur News: एक मंजिल से दूसरी मंजिल तक पत्र पहंुचने में लग गया एक साल

एक मंजिल से दूसरी मंजिल तक पत्र पहंुचने में लग गया एक साल
  • डीजीजीआई और जीएसटी के बीच में समन्वय नहीं
  • सरकार को साढ़े पांच करोड़ के राजस्व का नुकसान

Nagpur News डायरेक्टरेट जनरल आफ जीएसटी इंटेलिजेंस (डीजीजीआई) से भेजा गया पत्र केंद्रीय वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) कार्यालय पहुंचने में एक साल लग गया। हैरत यह कि इन दोनों विभागों के कार्यालय का फासला महज एक मंजिल का है। जीएसटी का डिवीजन ऑफिस पहली मंजिल पर आैर डीजीजीआई का ऑफिस दूसरी मंजिल पर है। दोनों विभागों के बीच समन्वय नहीं होने की बात सामने आई है। पत्र पहुंचने में देरी होने से सरकार को साढ़े पांच करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ है। विभाग अब तक टैक्स चोर का पता नहीं लगा सका है। इस बीच पूरे मामले को लेकर उच्चस्तरीय जांच शुरू हो गई है।

पत्र में यह उल्लेख था

डीजीजीआई ने 12 अक्टूबर 2023 को अपनी विजिट में पाया कि हजारीपहाड़ रचना सयनतारा फेज-1 स्थित आर. के. इंटरप्राइजेस अस्तित्व में नहीं है। डीजीजीआई ने 26 अक्टूबर 2023 को जीएसटी नागपुर मुख्यालय, जीएसटी डिवीजन ऑफिस व जीएसटी रेंज ऑफिस को पत्र लिखकर संबंधित फर्म का रजिस्ट्रेशन कैंसिल करने को कहा। डीजीजीआई व जीएसटी डिवीजन ऑफिस सिविल लाइन्स में एनएस बिल्डिंग में है। दोनों विभागों के कार्यालयों के बीच महज एक मंजिल का फासला है।

रजिस्ट्रेशन कैंसिल से जुड़ा मामला

इस बीच जीएसटी प्रिवेंटिव ब्रांच ने 27 सितंबर 2024 को अपनी विजिट में पाया कि आर. के. इंटरप्राइजेस अस्तित्व में नहीं है। फर्म का आेनर रिंकू गोपाल हेमराजानी बताया गया। जीएसटी प्रिवेंटिव ब्रांच ने जीएसटी डिवीजन व रेंज ऑफिस को पत्र लिखकर संबंधित फर्म का रजिस्ट्रेशन कैंसिल करने को कहा। जीएसटी डिवीजन ऑफिस ने 3 अक्टूबर 2024 को संबंधित फर्म का रजिस्ट्रेशन कैंसिल किया। कार्रवाई करने में हुई देरी के कारण सरकार को साड़े पांच करोड़ के राजस्व का नुकसान हो गया।

बयान लिए जा रहे हैं

डीजीजीआई ने 2 अप्रैल 2025 को जीएसटी कमिश्नर को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच करने को कहा। समय पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई आैर टैक्स चोरी के लिए जिम्मेदार कौन यह निर्धारित करना है। जांच शुरू हुई आैर जीएसटी के तत्कालीन अधिकारी-कर्मचारियों के बयान लिए जा रहे हैं।

एक साल तक सोते रहे जिम्मेदार

डीजीजीआई 26 अक्टूबर 2023 को पत्र लिखने के बाद मामले को एक तरह से भूल गया। अपने पत्र पर कार्रवाई हुई या नहीं, इसकी पुष्टि करना भी जरूरी नहीं समझा। डीजीजीआई व जीएसटी ऑफिस के बीच महज एक मंजिल का फासला है। डीजीजीआई चाहता तो रिमाइंडर भेज सकता था। टेलीफोन करके मामले की जानकारी जीएसटी के संबंधित अधिकारी को दे सकता था। अपने कर्मचारी को भेजकर पूरे मामले की जानकारी हासिल कर सकता था। पत्राचार कर सकता था, लेकिन डीजीजीआई आैर जीएसटी विभाग के बीच समन्वय की कमी साफ दिखाई दे रही है। टैक्स चोर को ढूंढने की बजाय अधिकारी-कर्मचारियों की गलतियां ढूंढी जा रही है।

टैक्स चोर पर एफआईआर करें

सीजीएसटी एससी, एसटी एम्प्लाइज वेलफेयर आर्गनाइजेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय थुल ने कहा कि टैक्स चोर पर एफआईआर करनी चाहिए। टैक्स चोर को ढूंढने की बजाय कर्मचारियों की गलती ढूंढने का काम हो रहा है। डीजीजीआई ने पत्र भेजकर केवल आैपचारिकता निभाई। पत्र मिला या नहीं, फर्जी फर्म पर क्या कार्रवाई हुई, इस पर ध्यान नहीं दिया। जीएसटी के संबंधित अधिकारी को सूचना देना, फोन करना या संपर्क करना भी जरूरी नहीं समझा। एक ही मंत्रालय के अधीन काम करने वाले दोनों एजेंसियों के बीच समन्वय नहीं है।

टाइमिंग पर नजर

डीजीजीआई ने 26 अक्टूबर 2023 को जीएसटी को पत्र लिखकर रजिस्ट्रेशन कैंसिल करने को कहा।

जीएसटी प्रिवंेटिव ब्रांच ने 27 सितंबर 2024 को जीएसटी डिवीजन आफिस को पत्र लिखकर रजिस्ट्रेशन कैंसिल करने को कहा।

प्रिवेंटिव ब्रांच के पत्र के बाद जीएसटी डिवीजन ऑफिस ने 3 अक्टूबर 2024 को रजिस्ट्रेशन कैंसिल किया।

एक साल की देरी के चलते साढ़े पांच करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ।

जीएसटी डिवीजन का दावा है कि डीजीजीआई का पत्र मिला नहीं था, प्रिवेंटिव ब्रांच के पत्र के बाद पूरा मामला सामने आया।

डीजीजीआई ने इस संबंध में ई मेल भी किया था, लेकिन उसे देखा नहीं गया था।

डीजीजीआई ने 2 अप्रैल 2025 को जीएसटी कमिश्नर को पत्र लिखकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच करने को कहा।


Created On :   4 Feb 2026 12:52 PM IST

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