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नई औद्योगिक नीति: सरकार का अहम कदम - पांच साल में 30 हजार करोड़ तक निवेश का अनुमान, नागपुर-वर्धा-अमरावती में डिफेंस कॉरिडोर

Nagpur News. विदर्भ को डिफेंस (रक्षा) उत्पादन का बड़ा केंद्र बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने अहम कदम उठाया है। नई औद्योगिक नीति के तहत नागपुर, वर्धा और अमरावती को जोड़ते हुए यह डिफेंस कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद इस संबंध में विस्तृत सरकारी निर्णय (जीआर) जारी कर दिया गया है।
250 किलोमीटर में होगा कॉरिडोर
जीआर के अनुसार यह कॉरिडोर नागपुर, वर्धा, अमरावती और सावनेर क्षेत्र से होकर गुजरेगा। करीब 250 किलोमीटर में फैले इस कॉरिडोर में देसी और विदेशी दोनों तरह की बड़ी रक्षा कंपनियां निवेश करेंगी। यहां अत्याधुनिक हथियारों, गोला-बारूद, मिसाइल और एयरोस्पेस से जुड़े उत्पादों का निर्माण किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य एयरोस्पेस और उच्च तकनीक आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना है।
इस नए कॉरिडोर से छोटे और मध्यम उद्योगों को भी बड़ा फायदा होगा। बड़ी रक्षा कंपनियों को बड़ी मात्रा में हजारों छोटे कलपुर्जों, सेंसर और तकनीकी सेवाओं की जरूरत पड़ती है। यह मांग स्थानीय उद्योगों द्वारा ही पूरी होती है। ऐसे में इस सेक्टर में पहले ही स्थापित छोटी कंपनियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। पूरे क्षेत्र में रोजगार के भी नए अवसर खुलेंगे।
नागपुर बनेगा कोर हब
डिफेंस (रक्षा) कॉरिडोर के तहत नागपुर को मुख्य उत्पादन और लॉजिस्टिक हब के रूप में विकसित किया जाएगा। वर्धा में सहायक उद्योगों के साथ प्रशिक्षण और अनुसंधान गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा, जबकि अमरावती क्षेत्र में रक्षा उद्योगों के विस्तार की योजना है। इन सभी क्षेत्रों को सड़क, रेल और औद्योगिक बुनियादी ढांचे से जोड़ा जाएगा।
30 हज़ार करोड़ निवेश का अनुमान
नागपुर पहले से ही रक्षा उद्योग के क्षेत्र में मजबूत आधार रखता है। यंत्र इंडिया लिमिटेड, सोलर इंडस्ट्रीज, इकोनॉमिक एक्सप्लोसिव्स लिमिटेड और एसबीएल एनर्जी जैसी प्रमुख इकाइयों की मौजूदगी के कारण 2023-24 में अनुमानित 10,500 करोड़ का वार्षिक रक्षा उत्पादन हुआ। 5 वर्षों में विदर्भ में 25 से 30 हजार करोड़ तक के नए निवेश की संभावना है। इससे गोला-बारूद, ड्रोन, लोइटरिंग म्यूनिशन, रक्षा उपकरणों के पुर्जों और एयरोस्पेस उत्पादों का उत्पादन कई गुना बढ़ सकता है।
उत्पादन में इजाफा
विदर्भ डिफेंस इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के मुताबिक रक्षा कॉरिडोर से विदर्भ में नई कंपनियां आएंगी। खासकर ड्रोन और गोला-बारूद उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। इससे छोटे उद्योगों को लाभ होगा और क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
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ट्रिलियन-डॉलर का सपना पूरा होगा
प्रशांत मोहतो, अध्यक्ष, विदर्भ इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के मुताबिक यह नीति महाराष्ट्र को देश का पहला ट्रिलियन-डॉलर राज्य बनाने की दिशा में अहम कदम है। एसोसिएशन की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी कर ली गई है। निवेश की पात्रता सीमा को 50 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 125 करोड़ रुपये करने को भी स्वीकार कर लिया गया है। नई नीति के तहत बड़े उद्योगों से विदर्भ को अतिरिक्त लाभ मिलेगा।
नीति से बदलेगी सूरत
जुल्फेश शाह, अध्यक्ष, कोसिया के मुताबिक महाराष्ट्र सरकार द्वारा घोषित नई उद्योग, निवेश एवं सेवा नीति राज्य के औद्योगिक और आर्थिक विकास की दिशा में एक निर्णायक पहल है। यह नीति अगले दशक में महाराष्ट्र को वैश्विक व्यापार के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की मजबूत आधारशिला रखती है।
Created On :   5 Jan 2026 6:54 PM IST












