- Home
- /
- राज्य
- /
- महाराष्ट्र
- /
- नागपुर
- /
- स्किन क्लिनिक पर छापा, 7 लाख की...
स्किन क्लिनिक पर छापा, 7 लाख की दवाएं जब्त, बिना लाइसेंस हो रही थी एलोपैथिक दवाओं की बिक्री

Nagpur News. शहर के धंतोली क्षेत्र में एक स्किन क्लिनिक पर एफडीए ने छापा मारकर 7 लाख रुपए की दवाएं जब्त की है। क्लिनिक में एलोपैथिक दवाएं बिना लाइसेंस के बेची जा रही थी। मरीजों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने के आरोप में अन्न एवं औषध प्रशासन (एफडीए) ने यह कार्रवाई की है। जांच में सामने आया कि क्लिनिक के पास दवा बिक्री का वैध लाइसेंस नहीं था, फिर भी मरीजों को दूसरी लाइसेंसधारी संस्था के नाम से बिल जारी किए जा रहे थे।
सूचना के आधार पर की गई कार्रवाई
एफडीए को मिली गोपनीय जानकारी के अनुसार धंतोली गार्डन के समीप स्थित ‘न्यू रूट्स स्किन, लेजर एंड हेयर ट्रांसप्लांट क्लिनिक’ है। यहां बिना लाइसेंस दवाओं की बिक्री किए जाने की आशंका थी। इसके आधार पर बुधवार को आयुक्त तुकाराम मुंडे और सहआयुक्त (औषधि) मिलिंद कालेश्वरकर के मार्गदर्शन में एफडीए की टीम ने क्लिनिक का निरीक्षण किया। जांच के दौरान वहां बड़ी मात्रा में एलोपैथिक दवाओं का संग्रह मिला।
नासिक की संस्था का दे रहे थे बिल
निरीक्षण के दौरान ऑपरेशन मैनेजर आकांक्षा बोंद्रे से दवाओं की खरीद से संबंधित दस्तावेज मांगे गए, लेकिन वह आवश्यक कागजात नहीं दे पायी। जांच में पता चला कि क्लिनिक के पास दवा बिक्री का लाइसेंस नहीं है, इसके बावजूद मरीजों को नासिक स्थित लाइसेंसधारी संस्था ‘116 रेमेडीज’ के नाम से बिल दिए जा रहे थे। एफडीए ने इसे औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 की धारा 18 का उल्लंघन माना है।
25 प्रकार की दवाएं जब्त
कार्रवाई के दौरान चार दवाओं के नमूने जांच और विश्लेषण के लिए लिए गए। जबकि 25 प्रकार की दवाओं का लगभग 7 लाख रुपए का स्टॉक पंचनामा बनाकर जब्त किया गया। जब्त दवाओं में एंटीबायोटिक्स, एंटीफंगल दवाएं, केटोकोनाजोल युक्त उत्पाद, मेडिकेटेड शैंपू तथा पीपीआई (प्रोटॉन पंप इन्हिबिटर) श्रेणी की दवाएं शामिल हैं।
शिकायत करने का आह्वान
एफडीए ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी प्रावधानों के तहत कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए हैं। विभाग ने नागरिकों से आह्वान किया है कि दवाओं की गुणवत्ता, भ्रामक विज्ञापनों या बिना लाइसेंस दवा बिक्री से जुड़ी किसी भी शिकायत की जानकारी सीधे अन्न एवं औषध प्रशासन को दें, ताकि समय पर कार्रवाई की जा सके।
Created On :   4 Jun 2026 9:06 PM IST














