comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

तालाब में डूबने लगी 10 साल की बहन , 12 साल के भाई ने उसे बचाने लगा दी छलांग, दोनों की मौत

तालाब में डूबने लगी 10 साल की बहन , 12 साल के भाई ने उसे बचाने लगा दी छलांग, दोनों की मौत

डिजिटल डेस्क छतरपुर । जुझारनगर थाना क्षेत्र के खेराकसार गांव में रविवार को सगे भाई-बहन की तालाब में डूबने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि 12 वर्षीय बालक अमन अपनी छोटी बहन आयुषी (उम्र 10 साल) पिता वीरेंद्र सिंह के साथ तालाब में नहाने के लिए गया था। दोपहर लगभग एक बजे बहन जब तालाब में नहा रही थी। उसी समय वह गहरे पानी में चली गई और डूबने लगी। बहन को तालाब में डूबता देख भाई अमन उसे बचाने के लिए प्रयास करने लगा। अमन को तैरना भी आता था, लेकिन ज्यादा गहराई होने की वजह से दोनों डूब गए। जब बच्चों के तालाब में डूबने की जानकारी ग्रामीणों को लगी तो उन्होंने मौके पर पहुंचकर दोनों बच्चों को तालाब से बाहर निकाला। तालाब से निकालने पर आयुषी की मौत हो चुकी थी। जबकि अमन जीवित था। आनन-फानन में अमन को गौरिहार अस्पताल ला जाया गया। लेकिन अस्पताल में डाक्टर के नहीं मिलने पर उसे लवकुशनगर लाया गया। जहां उसकी मौत हो गई।
एंबुलेंस में ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं थी
तालाब से निकालने के बाद परिजन और गांव के लोग जिस एंबुलेंस से अमन को अस्पताल लाए, उस एबुलेंस में ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं थी। परिजनों का कहना है कि पानी में डूबने की वजह से अमन के शरीर में पानी भर गया था, जिससे उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। परिजनों का कहना है कि अमन को अगर एंबुलेंस में आक्सीजन लग गई होती और गौरिहार में डाक्टर मिल गए होते तो उसकी जान बच जाती।
अस्पताल में डॉक्टर होते, तो बच सकती थी मासूम की जान
तालाब में डूबे अमन को जब तालाब से बाहर निकाला गया तो उसकी सांसें चल रही थी। भाई बहन के पिता का आरोप है कि अस्पताल के चिकित्सक एसडी प्रजापति को फोन भी लगाया, लेकिन न तो उन्होंने फोन उठाया और न अस्पताल पहुंचे। लिहाजा अमन को लवकुशनगर अस्पताल लेकर गए, जहां उसकी मौत हो गई। 
परिजनों के आरोपों की भी जांच कर रहे
भाई बहन की तालाब में डूबने से मौत के मामले में जुझारनगर पुलिस ने मर्ग कायम किया है। जुझारनगर थाना प्रभारी धर्मेंद्र सिंह का कहना है कि बच्चों के परिजनों ने जो आरोप लगाए हैं। उसकी भी जांच की जा रही है। दोनों बच्चों के पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है।
 

कमेंट करें
CliJV
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।