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सिंगरौली में बलियरी ऐश डाइक से मचेगी चौथी तबाही !-निवर्तमान नगर निगम अध्यक्ष का आरोप

सिंगरौली में बलियरी ऐश डाइक से मचेगी चौथी तबाही !-निवर्तमान नगर निगम अध्यक्ष का आरोप

डिजिटल डेस्क  सिंगरौली वैढऩ। ऐश डाइक से होने वाली चौथी तबाही शायद अब बलियरी ऐश डाइक से ही होगी। डाइक से लगातार पानी का रिसाव हो रहा है और डाइक से बाहर की जमीनों में लगातार इसका जमाव हो रहा है। इसे रोकने के लिए एनटीपीसी के अधिकारी गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। यह आरोप नगर निगम के निवर्तमान अध्यक्ष चंद्र प्रताप विश्वकर्मा ने लगाये हैं। उन्होंने कहाकि एस्सार, एनटीपीसी विंध्याचल की गहिलगढ़ ऐश डाइक और सासन पावर के सिद्धिकला डाइक फूटने से अब तक सिंगरौली ने भय और तबाही का मंजर देखा है। लेकिन, इन सबसे भयावह तस्वीर यदि बलियरी ऐश डाइक फूटी तब देखने को मिलेगी। 
श्री विश्वकर्मा, बलियरी ऐश डाइक से हो रहे रिसाव की फोटो दिखाते हुए कहते हैं (जो उन्होंने 30 अप्रैल को ही ली थी) कि डाइक से रिसाव लगातार जारी है। इस संबंध में स्थानीय लोग कई बार मुझे बता चुके हैं। मैंने भी प्रशासनिक अधिकारियों को दूरभाष पर बताया था। लेकिन, अब तक स्थिति नहीं सुधरी है। उन्होंने मांग की कि प्रशासन को बलियरी ऐश डाइक के आसपास की जमीनें भी एनटीपीसी से अधिगृहीत कराना चाहिए जिससे भविष्य में कभी डाइक के पास रह रहे लोगों पर कोई संकट न आये। हालांकि इस संबंध में विंध्याचल के प्रवक्ता मैनेजर एलएम पांडेय को फोटोग्राफ भेजकर विषय के बारे में संस्थान की ओर से अधिगृहीत जानकारी चाही गई थी लेकिन दो दिन बाद जब उनसे संपर्क किया गया तो उनका कहना था कि वहां तो काम चल रहा था, हो गया होगा। 
सड़क बदहाल, खतरे में जान 
ऐश डाइक जाने के लिए जो सड़क है, उसके दोनों ओर मकान बने हुए हैं। यहां घनी आबादी है। सड़क भी बहुत चौड़ी और पक्की नहीं है। दिनभर सड़क पर ही बच्चे खेलते हैं। भारी वाहनों की धमाचौकड़ी के कारण हर वक्त खतरे का अंदेशा बना रहता है। सड़क पर यूं तो पानी डाला जाता है लेकिन कुछ ही देर में पानी सूखने के बाद यहां सिर्फ धूल का गुबार ही दिखता है। वाहनों के शोर और धूल के कारण लोगों का रहना मुहाल हो गया है। श्री विश्वकर्मा कहते हैं कि आखिर, हम कब तक बैठकर किसी हादसे का इंतजार करते रहेंगे। पहली बात तो यह कि एनटीपीसी विंध्याचल को नैतिकता के आधार पर यहां सड़क बनानी चाहिए, दूसरी बात जिला प्रशासन को खुद मौके का जायजा लेकर लोगों के लिए सुरक्षित आवासीय सुविधा दिलाने का प्रयास करना चाहिए। 
एनआईटी जनवरी में हुई जारी
गहिलगढ़ की ऐश डाइक  के फूटने की घटना 6 अक्टूबर को हुई थी। इसके बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 10 करोड़ रूपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि जमा करने के लिए एनटीपीसी विंध्याचल को नोटिस दिया। विंध्याचल ने महज एक करोड़ रूपये की बैंक गारंटी जमा कराई। राख उठाने को लेकर क्या कार्रवाई की जा रही है इस पर न तो एमपीपीसीबी और ना ही विंध्याचल ने कोई बयान अपनी ओर से जारी किया। हाल ही में डेढ़ करोड़ में राख उठाने की बिड फायनल होने की बात सामने आई। दैनिक भास्कर ने इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया। इस संबंध में विंध्याचल के प्रवक्ता सहित जीएम एचआर उत्तम लाल से भी संपर्क किया गया, मगर जवाब नहीं मिला। खबर पर स्पष्टीकरण सहायक प्रबंधक एचआर संतोष कुमार श्रीवास्तव ने दिया। इसमें उन्होंने कहा कि राख सीधे पॉन्ड से उठाकर लो लाइन एरिया में डालने एवं अन्य भराव हेतु नियमित स्तर का कार्य है। इस कार्य को मई 19 में ही प्रस्तावित किया गया था। कांट्रेक्ट का संबंध ऐश डाइक टूटने से हुई एकत्रित राख को हटाने से संबंधित नहीं है। लेकिन, बिड डॉक्यूमेंट खुद बता रहा है कि टेंडर जनवरी 20 में जारी हुआ और 27 अप्रैल को बिड ओपनिंग डेट थी। जिसमें 1.42 करोड़ की वीके सिंह ने सबसे कम बिड डाली थी। इस कार्य में रूचि लेने वाले सभी ठेकेदारों से मौखिक रूप से कहा जा रहा था कि आपको ऐश डाइक फूटने से निकली राख उठाना है। ठेकेदारों ने नाम न छापने की शर्त पर अपनी बात कही थी और ये भी कहा था कि हमने जब बिड डॉक्यूमेंट में उल्लेखित स्थान के बारे में पूछा तो बताया गया था कि वेन्यू चेंज करना जीएम के पावर में आता है। दूसरी ओर दूरभाष पर विंध्याचल प्रवक्ता एलएम पांडेय ने कहा कि वी-1 डाइक से निकली राख को उठाने की प्रक्रिया अभी अंडर प्रोसेस है। 1.42 करोड़ के टेंडर पर डिटेल के सवाल पर उन्होंने पता कर सूचित किए जाने की बात रविवार को थी लेकिन सोमवार देर रात तक उनका कोई जवाब नहीं आया। 

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